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पोषण वाटिका से बदली बच्चों की सेहत की तस्वीर कंडेल आंगनबाड़ी केंद्र की पहल बनी कुपोषण से लड़ाई का सफल मॉडल

 

धमतरी, 18 जून 2026/कुपोषण के खिलाफ चल रही मुहिम में धमतरी जिले के ग्राम कंडेल स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-01 ने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा के निर्देश पर बच्चों को ताजा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र परिसर में विकसित की गई पोषण वाटिका आज न केवल बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य का आधार बन रही है, बल्कि ग्रामीण समुदाय में पोषण के प्रति जागरूकता का भी माध्यम बन गई है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती अंगूरी रैदास और सहायिका श्रीमती चैतबती साहू ने सीमित संसाधनों के बावजूद लगभग 2 डिसमिल भूमि में पोषण वाटिका तैयार की। प्रारंभ में यह एक छोटा प्रयास था, लेकिन नियमित देखभाल और समर्पण ने इसे बच्चों के पोषण का सशक्त स्रोत बना दिया। वाटिका में विभिन्न प्रकार की हरी पत्तेदार सब्जियां, लौकी, कुम्हड़ा, भाटा (बैंगन), धनिया तथा मौसमी सब्जियां उगाई जा रही हैं।
इन सब्जियों का उपयोग प्रतिदिन आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए तैयार किए जाने वाले भोजन में किया जाता है। ताजी और रसायनमुक्त सब्जियों के नियमित सेवन से बच्चों को आवश्यक विटामिन, खनिज तत्व और पोषक तत्व सहज रूप से प्राप्त हो रहे हैं। इसका सकारात्मक प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
केंद्र की कार्यकर्ता बताती हैं कि पहले कुछ बच्चों में पोषण की कमी के लक्षण दिखाई देते थे, लेकिन पोषण वाटिका से प्राप्त सब्जियों को भोजन में शामिल किए जाने के बाद उनकी सेहत में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। विशेष रूप से एक बच्चा, जो मध्यम कुपोषित श्रेणी में दर्ज था, अब सामान्य श्रेणी में आ चुका है। यह उपलब्धि पोषण वाटिका की उपयोगिता और प्रभावशीलता को प्रमाणित करती है।
पोषण वाटिका ने केवल बच्चों के भोजन की गुणवत्ता ही नहीं बढ़ाई, बल्कि अभिभावकों की सोच में भी सकारात्मक बदलाव लाया है। केंद्र में आने वाले माता-पिता को पौष्टिक आहार, हरी सब्जियों के महत्व और घर पर छोटी-सी पोषण वाटिका विकसित करने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। कई परिवार अब अपने घरों में भी सब्जियां उगाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
कंडेल आंगनबाड़ी केंद्र की यह पहल दर्शाती है कि सामुदायिक सहभागिता, स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग और समर्पित प्रयासों से कुपोषण जैसी चुनौती का प्रभावी समाधान संभव है। यह पोषण वाटिका बच्चों के स्वस्थ बचपन, बेहतर भविष्य और कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक सफल और अनुकरणीय मॉडल बनकर उभरी है।

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