
संभाग तथा दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को मिलेगी इलाज की आधुनिक सुविधा*
रायपुर, 25 अगस्त, 2026/
छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) बिलासपुर में मरीजों को आधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। सिम्स में नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन एवं सी-आर्म मशीनों का शुभारंभ किया गया। नई नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन को इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में स्थापित किया गया है। इससे सिम्स में आधुनिक जोड़ सर्जरी की सुविधा का रास्ता साफ हो गया है।
स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जासयसवाल की पहल से लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि से सिम्स को दो सी-आर्म मशीन तथा एक अत्याधुनिक नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन प्राप्त हुई है। नई मशीनों के उपलब्ध होने के बाद सिम्स में कुल तीन सी-आर्म मशीनें हो गई हैं। इनसे प्रतिमाह लगभग 90 से 120 ऑपरेशन किए जा सकेंगे। वहीं नी-आर्थ्रोस्कोपी मशीन से प्रतिमाह लगभग 20 से 30 ऑपरेशन किए जाने की क्षमता होगी।
*घुटने की सर्जरी में मिलेगी दूरबीन तकनीक की सुविधा*
नी-आर्थ्रोस्कोपी आधुनिक दूरबीन आधारित शल्य तकनीक है। इसमें घुटने के जोड़ में छोटे छिद्र के माध्यम से कैमरा और विशेष उपकरण पहुंचाकर अंदर की स्थिति को हाई-डेफिनिशन मॉनिटर पर देखा जाता है। इसके माध्यम से लिगामेंट, मेनिस्कस और कार्टिलेज से संबंधित समस्याओं का सटीक उपचार किया जा सकता है। बड़े चीरे की आवश्यकता कम होने के कारण मरीज को कम दर्द, कम रक्तस्राव और अपेक्षाकृत जल्दी रिकवरी का लाभ मिलता है।
*मरीजों को दूसरे शहर जाने से मिलेगी राहत*
अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने कहा कि सिम्स में नी-आर्थ्रोस्कोपी सुविधा शुरू होने से घुटने और जोड़ से संबंधित जटिल मामलों के मरीजों को आधुनिक उपचार के लिए निजी अस्पतालों अथवा दूसरे शहरों में जाने की आवश्यकता कम होगी। सिम्स का प्रयास है कि मरीजों को शासकीय संस्थान में ही आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध कराया जाए।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने कहा कि नई मशीनों के शुरू होने से सिम्स में ऑपरेशन की क्षमता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध होगा। विशेष रूप से इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर में सी-आर्म और नी-आर्थ्रोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने से गंभीर एवं आपातकालीन मरीजों के उपचार में चिकित्सकों को काफी सहायता मिलेगी।









