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आदि कर्मयोगी अभियान: वर्ष 2030 तक लक्षित ग्रामों को विकसित गांवों के रूप में परिवर्तित करने का लक्ष्य

राज्य के 28 जिलों के 6,650 जनजातीय बाहुल्य ग्रामों का चयन

 

लगभग 1 लाख 48 हजार आदि कर्मयोगी तैयार

 

विकसित भारत में सशक्त होगा जनजातीय समाज

 

2.17 लाख हितग्राहियों का आधारकार्ड, 1.50 लाख का आयुष्मान कार्ड, 54,248 को पीएम किसान सम्मान निधि और 85,276 को पीएम जनधन से लाभान्वित

 

             प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आव्हान और मुख्यमंत्री   विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में आदि कर्मयोगी अभियान के तहत् राज्य के जनजातीय समाज को सशक्त एवं विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए निरंतर प्रयास किया जा रहा है। प्रधानमंत्री   मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प अवश्य पूरा करने राज्य के चिन्हांकित गांवों को वर्ष 2030 तक विकसित गांवों के रूप में परिर्वतित करने का लक्ष्य रखा गया है।

28 जिलों के 6 हजार 650 जनजातीय बाहुल्य ग्रामों को चिन्हांकित

            आदिमजाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा ने बताया कि आदि कर्मयोगी अभियान के तहत् राज्य के 28 जिलों के 6 हजार 650 जनजातीय बाहुल्य ग्रामों को चिन्हांकित किया गया है। इस अभियान के तहत् जनजातीय बहुल्य क्षेत्रों के ही उनके भाषा व बोली को समझने वाले 1 लाख 47 हजार 935 आदि कर्मयोगी तैयार किए जा चुके हैं जो लगातार जनजातीय समाज के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए शासन की योजनाओं से उन्हें लाभान्वित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

चिन्हांकित ग्रामों के विलेज एक्शन प्लान तैयार करने पर जोर

            प्रमुख सचिव श्री बोरा ने बताया कि इस अभियान के तहत् 2 लाख 17 हजार 343 हितग्राहियों का आधारकार्ड, 149,859 का आयुष्मान कार्ड, 54,248 को पीएम किसान सम्मान निधि और 85,276 को पीएम जनधन से लाभान्वित किया गया है। अभियान को और कारगार बनाने के उद्देश्य से चिन्हांकित ग्रामों के विलेज एक्शन प्लान तैयार करने के लिए गांवों में एन्ट्री पाईंट एक्टिविटी, ग्राम भ्रमण तथा ग्रामीणों एवं स्थानीय समुदायों के साथ विलेज विजनिंग एक्सासाईज पर जोर दिया जा रहा है।

आदि कर्मयोगी अभियान देशभर के 30 राज्यों में संचालित

 

            गौरतलब है कि देश की आजादी के बाद यह पहला अवसर है जब किसी सरकार ने जनजातीय समाज के जीवन स्तर को उपर उठाने के लिए देशव्यापी अभियान छेड़ा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार जैसे मूलभुत सुविधाओं से जोड़ने और इनका लाभ दिलाने के लिए आदि कर्मयोगी अभियान की शुरूआत की है। यह अभियान देशभर के 30 राज्यों में संचालित किया जा रहा है। यह अभियान देश भर के 550 से ज्यादा जिलों और 1 लाख से अधिक आदिवासी बहुल गांवों में बदलाव के लिए काम करेगी।

आदिवासी समाज को आगे बढ़ाए बिना सपना नहीं होगा साकार

            बता दें कि जब भारत 2047 में अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरा करेगा। उस समय तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए यह जरूरी है कि समाज का कोई भी वर्ग पीछे न छूटे। आदिवासी समाज को आगे बढ़ाए बिना यह सपना अधूरा रहेगा। आदि कर्मयोगी अभियान इस अंतर को भरने के लिए एक ठोस कदम है। यह अभियान शासन और समाज के बीच की दूरी को कम करेगा, पारदर्शिता लाएगा और योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाएगा।

वृहद स्तर पर आदिकर्म योगियों को प्रशिक्षण

            मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अभियान को सेवा पर्व का रूप दिया है। उनका कहना है कि यह केवल योजनाओं की जानकारी देने का प्रयास ही नहीं, बल्कि समाज और शासन को जोड़ने वाला पुल है। छत्तीसगढ़ में इस अभियान के लिए वृहद स्तर पर आदिकर्म योगियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये कर्मयोगी जनजातीय परिवारों से घर-घर संपर्क कर उनकी आवश्यकताओं और जरूरतों को समझेंगे तथा केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करेंगे, राज्य और जिला स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। राज्य सरकार के सभी विभागों के अधिकारी इस कार्य में संवेदनशीलता के साथ सीधे जुड़ें हैं।

जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल

            आदिकर्मयोगी अभियान का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर इसलिए भी है क्योंकि भारत की जनजातीय आबादी लगभग 10 करोड़ से अधिक है। इतने बड़े समुदाय को मुख्यधारा में लाए बिना 2047 तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा। यह अभियान प्रधानमंत्री की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें हर क्षेत्र, हर समाज और हर नागरिक को विकसित भारत” की यात्रा में समान अवसर देना है। भारत का विकास केवल शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह सकता। एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र वही कहलाएगा, जहाँ समाज के हर तबके को समान अवसर मिले और उसकी संस्कृति को उचित सम्मान दिया जाए। इसी सोच को मूर्त रूप ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ के जरिए दिया जा रहा है। यह वस्तुतः जनजातीय समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।

जनजातीय योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने का ठोस प्रयास

            आदिम जाति कल्याण मंत्री श्री राम विचार नेताम ने अधिकारियों को पंचायतों में आदि सेवा केंद्र स्थापित करने और जनजातीय परिवारों को पेंशन, स्वास्थ्य बीमा, छात्रवृत्ति, रोजगार, कौशल विकास जैसी सुविधाओं के लिए मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा है कि इस अभियान को सेवा पर्व के रूप में मनाया जाए और जनजातीय योजनाओं को घर-घर तक पहुँचाने का ठोस प्रयास किया जाए।

आदिवासी समुदायों के अंतिम छोर तक शासन की योजनाओं की पहुंच

            बता दें कि भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा 10 जुलाई 2025 को आरंभ किए गए “आदि कर्मयोगी अभियान” का उद्देश्य भारत में जनजातीय समाज के लिए एक मजबूत, उत्तरदायी और सहभागी शासन प्रणाली विकसित करना है। इस अभियान के माध्यम से आदिवासी समुदायों के अंतिम छोर तक शासन, योजनाओं और सेवाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है।

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