
भारतीय संविधान प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानजनक जीवन, प्रशिक्षण तथा भेदभाव रहित रोजगार के अवसर प्रदान करने की गारंटी देता है। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए नक्सल विचारधारा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुर्नवासित युवाओं के आजीविका संवर्धन हेतु जिला प्रशासन द्वारा महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत इन युवाओं को आजीविका डबरी प्रदान कर उन्हें मछली पालन, सब्जी उत्पादन एवं मुर्गी पालन जैसे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
जिला प्रशासन की पहल पर मनरेगा अधिकारियों की टीम युवाओं के बीच पहुंचकर योजना की विस्तृत जानकारी दे रही है तथा इच्छुक युवाओं के नाम दर्ज कर रही है। कलेक्टर श्री संबित मिश्रा के निर्देशन एवं जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन में सहायक परियोजना अधिकारी मनीष सोनवानी और उनकी टीम ने युवाओं के साथ बैठक कर आजीविका डबरी से जुड़ी संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
अधिकारियों ने बताया कि आजीविका डबरी के माध्यम से वर्ष भर में कम से कम एक लाख रुपये तक की आमदनी संभव है। जिले में कई किसान डबरी आधारित मछली पालन, मुर्गी पालन और सब्जी उत्पादन कर उत्कृष्ट आय अर्जित कर रहे हैं जिनके उदाहरण भी युवाओं के साथ साझा किए गए।
युवाओं को यह भी जानकारी दी गई कि डबरी निर्माण के दौरान यदि वे स्वयं मनरेगा कार्य में श्रम प्रदान करते हैं तो उन्हें योजना के तहत वर्तमान मजदूरी दर 261 रुपये प्रतिदिन प्राप्त होगी। जानकारी मिलते ही कई युवाओं ने डबरी निर्माण हेतु इच्छा जताई जिनके नाम तत्काल पंजीकृत कर लिए गए।
जिला प्रशासन की यह पहल न केवल पुर्नवासित युवाओं को आजीविका सुरक्षा प्रदान करेगी बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।








