Thursday, February 22

बात बेबाक – कुर्सीनामा भाग -15 चंद्र शेखर शर्मा (पत्रकार)

कहने को कवर्धा में दो दो राजा है एक जिनकी रियासत आजादी के बाद खो गई पर राजा आज भी कहलाते है कवर्धा रियासत के राजा योगेश्वर राज सिंह जो कवर्धा विधानसभा चुनाव 2013 और पुनः 2018 के विधानसभा चुनाव में टिकट कटने से उपजे बगावती तेवर के फुस्स होने के बाद 2023 में फिर से निराश व अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहे है और दूसरे प्रजातंत्र के जनता द्वारा जनता के किये चुने गए छत्तीसगढ़ के राजा रहे मुख्यमंत्री डॉ रमण कुमार सिंह जिनकी राजगद्दी 15 बरस राज करने के बाद कांग्रेस के किसानों की कर्जमाफी के दावे – वादे और प्रदेश में बेलगाम रही अफसर शाही की सुनामी में बह गई । दोनों ही राजाओं में डॉ रमण साहब तो अपना जलवा बरकरार रखे हुए है । 2023 के समर में उनके तेवर आक्रमक होने लगे है संगठन और टिकट वितरण में उनके प्रभाव व वर्चस्व को नकारा नही जा सकता वही विगत 10 सालों से सक्रिय राजनीति से दूरी और जनता जनार्दन के बीच से लापता योगिराज की बर्थडे पार्टी बुझते दिए की भभक से ज्यादा कुछ नज़र नही आती वर्तमान में बने राजनैतिक हालात के चलते “तोर मन कैसे लागे राजा महल भीतरी मा ” ममता चंद्रकार द्वारा छत्तीसगढ़ी में गाया गया यह गीत महल में कैद पूर्व कांग्रेसी विधायक पर फिट बैठता दिख रहा है ।
और अंत मे :-
चौराहे पर लुटता चीर , प्यादे से पिट गया वजीर ,
चलूँ आखिरी चाल कि , बाजी छोड़ विरक्ति सजाऊँ ।
राह मैं कौन सी जाऊँ ?
#जय हो 02 अक्टूबर 2023 कवर्धा (छत्तीसगढ़)

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