
ग्रामीणों को मिलेगा लाभांश, विकास कार्यों का मार्ग हुआ प्रशस्त
बीजापुर वनमंडल क्षेत्र के मोसला कूप कक्ष क्रमांक OA-269 में राज्य सरकार और भारत सरकार के समन्वय से चल रही वैज्ञानिक वन प्रबंधन प्रक्रिया से क्षेत्र में वन संरक्षण और ग्रामीण विकास दोनों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वर्ष 2023-24 से 2032-33 तक की स्वीकृत कार्य आयोजना के अंतर्गत यहाँ केवल आड़े, तिरछे, सूखे और गिरे हुए वृक्षों के विदोहन की अनुमति दी गई है, ताकि वन क्षेत्र को स्वस्थ रखते हुए प्राकृतिक पुनरुत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
वैज्ञानिक पद्धति से कटाई, वन को मिलेगी नई ऊर्जा- स्वीकृत 181.420 हेक्टेयर क्षेत्र में से 16.338 हेक्टेयर कार्य योग्य भूमि में 1810 वृक्षों की वैज्ञानिक कटाई प्रस्तावित है। इसी के तहत वर्ष 2024-25 में 428 वृक्षों का विदोहन कर प्राप्त लकड़ी को नीलाम डिपो तक सुरक्षित पहुँचाया गया। कूप कार्य के अपूर्ण रहने के कारण वर्ष 2025-26 में पुनः कार्य प्रारंभ हुआ और 26 नवंबर से 9 दिसंबर के बीच 160 वृक्षों की कटाई की गई, जिसकी सामग्री कूप में सुरक्षित रखी गई है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि फलदार वृक्षों में महुआ और तेंदू के केवल वही वृक्ष काटे गए जो बरसात में गिर चुके थे और जिनकी विधिवत मार्किंग की गई थी। इससे फल उत्पादन पर किसी प्रकार का नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण सहभागिता और पारदर्शिता पर जोर- विभाग ने बताया कि ग्रामीणों को पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया था। 13 सितंबर 2025 को ग्राम पंचायत भवन पेद्दा कोड़ेपाल में हुई बैठक में ग्रामीणों को लाभांश राशि, समिति के माध्यम से गांव में होने वाले विकास कार्यों तथा संपूर्ण प्रक्रिया के लाभों की विस्तृत जानकारी दी गई थी।
लाभांश से गांव को नए विकास कार्य मिलेंगे- वन विभाग ने दोहराया कि स्वीकृत कटाई का उद्देश्य वन स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। कटाई के बाद प्राप्त होने वाली लाभांश राशि सीधे ग्राम विकास में उपयोग की जाएगी जिससे गांव में मूलभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा समिति के माध्यम से पारदर्शी विकास कार्य किया जाएगा।
इस हेतु वन विभाग ने ग्रामीणों से सहयोग की अपील की है कि वे वैज्ञानिक वन प्रबंधन की इस प्रक्रिया में सहयोग प्रदान करें। विभाग का मानना है कि यह पहल न केवल वन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी।








