Saturday, May 18

दुर्ग मे बस दुर्घटना 15 मरे 15 गम्भीर घायल कोई बात नहीं थाने में महीना तो आ रहा है न, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी खरी

 

50 फीट नीचे गड़ढे में गिरी बस। चीख.पुकार। कातर ध्वनि। रोते.बिलखते लोग। खूनाखून। जब आसपास गांव के लोगों ने मदद की तो बस के अंदर से 15 लाशें निकलीं। लगभग 15 बुरी तरह घायल निकले जिन्हें जान का खतरा भी हो सकता है और बहुत से ऐसे घायल निकले जिन्हें जान का खतरा तो नहीं है।

लेकिन चोटों की लंबा समय पीड़ा भोगनी होगी काफी दिन बिस्तर पकड़ना होगा कामधाम का कोई ठिकाना नहीं। ठीक होने के बाद भी परफेक्ट हो जाएंगे इसका भरोसा नहीं।

पुलिस पहुंची। प्रशासन पहुंचा। राहत कार्य चालू किया गया। सभी को अस्पताल पहुंचाया गया।

बड़ी कृपा की सरकार ने। मुआवजा भी देगी ही। ठीक सामने चुनाव है मुआवजा तो अधिक से अधिक देने का प्रयास किया जाएगा। बहुत बढ़िया है। लेकिन मरे लोगों को वापस नहीं लाया जा सकेगा। वे चले गये हमेशा.हमेशा के लिये।

जुर्म दर्ज किया गया है बस मालिकों के खिलाफ। भारी जुर्माना किया जाएगा। सजा का प्रावधान नहीं है। कानून होगा भी तो सजा होती नहीं है। केस ही ऐसा बनाया जाता है कि सजा न मिल सके। या फिर पुलिस अपनी कार्यवाही में ऐसा झोलझाल कर देती है कि कोर्ट में मजिस्ट्रेट की डांट सुननी पड़ती है।
मगर चलता है। थोड़ी डांट के सामने बस मालिकांे से मिलने वाली रकम कहीं अधिक होती है। और फिर लगातार हर महीने जो बंधा है वो तो मिलता ही है।

यमलोक वाहक

इन पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानि लोकवाहकों को यमलोक वाहक कहा जाना ज्यादा मुनासिब होगा। सवारी के लिये अंधाधंुध गाड़ी दौड़ाना। जहां सवारी दिखी बिना पीछे से आने वालों की परवाह किये मामूली से किनारे करकेए कभी वो भी नहीं पूरी सड़क जाम किये रोक कर सवारी बिठाना आम बात है।

बताया जाता है कि इस बस का इंश्योरेंस और फिटनेस दोनों 2 साल पहले ही समाप्त हो चुका था फिर भी यह बेखौफ सड़क पर दौड़ रही थी

अनुभवी लोग बताते हैं कि राॅंग साईड चलने में तो कोई संकोच ही नहीं है। पुलिस को पुलिंदा पहुंच ही जाता है टाईम टू टाईम।

आम इंसान को इतनी हिम्मत नहीं की रोकटोक सके। ऐसा अगर किसी ने साहस दिखाया तो ये लोकवाहक उसे ठोकने में कोताही नहीं करते। रिपोर्ट भी कहां होगी थाना अपना है।

जानलेवा राॅंग साईड

छत्तीसगढ़ के किसी न किसी कोने में हर रोज ऐसी दुर्घटनाएं होती हैं जिनमें नियमविरूद्ध चलने के कारण कोई अपनी जान गंवा देता है। कई लोग अपाहिज होकर लंबे समय के लिये बिस्तर पकड़ लेते हैं।

कुछ वर्ष पूर्व परिवार के साथ पिकनिक मनाने जा रहे है बाईक पर साला और बहनोई राॅंगसाईड से आ रही जीप का शिकार हो गये। पुलिस को पता था कि जीप किसकी थी। ये भी पता था कि जीप मे शराब जा रही थी। मगर कुछ हुआ नहीं।
क्यों नहीं हुआ ये आसानी से समझा जा सकता है।

दो जानें चली गयीं। दो लड़कियां जीवन के पहले पड़ाव पर ही विधवा हो गयीं। मगर प्रशासन को क्या घ् आज भी ऐसे वाहन बेपरवाह चलते हैंए किसी भी साईड से अपनी सुविधानुसार

बिना इंश्योरेंस और बिना फिटनेस के चल रही जिस बस की दुर्घटना हुई है उसकी एक लाईट खराब बताई जा रही हैं स्पीड तेज बताई गयी। हो सकता है चालक भी एक्सपर्ट न हो। यानि कोई न कोई कमी तो रही ही होगी लेकिन जानकार लोग बताते हैं कि कार्यवाही नाममात्र को होगी ये पक्का है।

इंसान की कीमत से अधिक महत्व उस रकम का है जो निरंतर थाने में पहुंचाई जाती है।
कदाचित् यही कारण है कि नियमों का पालन करवाने में प्रशासन की दिलचस्पी नहीं होती।

डूमरतराई रायपुर में एक शराब दुकान है। जहां से हर दिन एक बाईक पर सवार होकर तीन लोग राॅंग साईड निकलते हैं और मस्ती झूमते जहंा डिवाईडर कटा है वहां तक जाकर अपनी साईड पकड़ते हैं। यानि हर दिन उनकी जान जोखिम में होती है।

डूमरताराई राजधानी की नेशनल हाईवे रोड पर है। थोड़ा आगे कौशल्या विहार चैक् पर पुलिस खड़े होकर चालान काटती है लेकिन इन अपनी और सामने वाले की जान जोखिम मंे डालने वालों को कुछ नहीं कहती।
न जाने कब थमेगा ये सिलसिला
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जवाहर नागदेवए वरिष्ठ पत्रकारए लेखकए चिन्तक विश्लेषक
मोबाण् 9522170700
ष्बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है
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