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पीएम-किसान निधि से बदली छत्रपाल सिंह की जिंदगी

रायपुर, 01 जनवरी 2026/कोरबा जिले के विकासखंड पोंडी-उपरोड़ा के ग्राम मादन के किसान छत्रपाल सिंह, पिता नेवरात सिंह कंवर, खेती को ही अपने परिवार की आजीविका का मुख्य आधार मानते हैं। वे एक साधारण किसान हैं और परिवार में पत्नी तथा दो बच्चों की जिम्मेदारी है। सीमित आय, बढ़ती कृषि लागत और खेती में लगातार बढ़ते खर्चों के कारण वर्षों तक उनके लिए परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती रहा।

खेती हमेशा से ऐसा कार्य रहा है जिसमें खर्च पहले करना पड़ता है और आमदनी बाद में मिलती है। बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी के बढ़ते खर्चों ने कई बार उन्हें मुश्किल स्थिति में ला खड़ा किया। समय पर पूँजी उपलब्ध न होने के कारण वे उन्नत बीज या आवश्यक दवाइयाँ नहीं खरीद पाते थे, जिससे फसल प्रभावित होती थी। धान कटाई के समय मजदूरों का भुगतान करना भी कठिन हो जाता था और कई बार उन्हें मजबूरी में उधार लेना पड़ता था।

वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव शुरू हुए। योजना के अंतर्गत प्रति वर्ष 6000 रुपये की आर्थिक सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में मिलने लगी। भले ही यह राशि बहुत बड़ी न लगे, लेकिन सही समय पर मिल जाने से उनके लिए यह बहुत बड़ी राहत बन गई।

पीएम-किसान से प्राप्त राशि का उपयोग छत्रपाल सिंह पूरी तरह खेती में करते हैं। खरीफ मौसम में वे अच्छे और उन्नत किस्म के बीज खरीद पाते हैं। फसल में कीट या रोग लगने पर समय से दवाइयाँ ला सकते हैं। धान कटाई के समय मजदूरों का भुगतान भी बिना किसी तनाव के कर पाते हैं। इन सभी परिवर्तनों के कारण उनकी फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब उन्हें खेती के दौरान आर्थिक तंगी का सामना नहीं करना पड़ता। इस सहायता ने उनके परिवार की जिम्मेदारियों को भी सहज बनाया है। वे अपने बड़े बच्चे की पढ़ाई के लिए समय पर कॉपी-किताबें, कपड़े और अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीद पाते हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा बिना किसी अवरोध के जारी है और उनका भविष्य सुरक्षित हो रहा है।

छत्रपाल सिंह कहते हैं कि पीएम-किसान योजना ने न केवल आर्थिक रूप से उन्हें मजबूती दी है, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान भी प्रदान किया है। अब उन्हें साहूकार से कर्ज लेने या किसी के आगे हाथ फैलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। सरकार द्वारा सीधे किसान के खाते में सहायता पहुँचने से यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि देश का किसान अब अकेला नहीं है, सरकार उसके साथ खड़ी है।

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