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किसानों की समृद्धि और स्वास्थ्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 

मुख्यमंत्री ने “मेलिओइडोसिस” के संक्रमण को लिया गंभीरता से
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और कृषि को रोकथाम के उपाय करने के दिए निर्देश
एम्स की रिपोर्ट पर लिया संज्ञान

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धान किसानों की चिंता करते हुये टीबी जैसे लक्षणों वाले घातक रोग ‘मेलिओइडोसिस’ की रोकथाम के उपाय किये जाने पर गंभीर रूख अपनाया है। उन्होंने इस संबंध में प्रमुख सचिव स्वास्थ्य और कृषि विभाग को साथ मिलकर जांच और उपचार रोकथाम के लिए यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि किसानों और आमजन का स्वास्थ्य और समृद्धि हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। मध्यप्रदेश सरकार गरीब, किसान और वंचित वर्गों के हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

किसानों को करें सजग और जागरूक

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य और कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि संभावित और प्रभावित क्षेत्रों में इन प्रकरणों की जांच करें। इसकी रोकथाम के लिए कृषकों को सजग और जागरूक करें। यदि कोई कृषक या व्यक्ति चिन्हांकित होता है, तो उसके समुचित उपचार के प्रभावी प्रबंध सुनिश्चित करें।

उल्लेखनीय है कि एम्स भोपाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदेश में धान का रकबा बढ़ने और पानी के स्रोत अधिक होने से इस बीमारी का संक्रमण बढ़ रहा है। जारी रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में ‘मेलिओइडोसिस’ से प्रभावित रोगियों की पुष्टि हुई है। विशेषत: धान के खेतों की संक्रमित मिट्टी में पाए जाने वाले बैक्टीरिया से होने वाले इस रोग के संबंध में जागरूकता, समय पर पहचान और उपचार के संबंध में एम्स भोपाल द्वारा प्रशिक्षण-सत्र आयोजित किए गए हैं, जिसमें प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों तथा अस्पतालों के प्रबंधकों और चिकित्सकों ने भी सहभागिता की है।

‘मेलिओइडोसिस’ बीमारी के लक्षण

‘मेलियोइडोसिस’ एक संक्रामक बीमारी है जो ‘बर्कहोल्डरिया स्यूडोमैली’ नामक बैक्टीरिया से होती है। यह बैक्टीरिया आम तौर पर मिट्टी और पानी में पाया जाता है । बीमारी के प्रमुख लक्षण लंबे समय तक बुखार रहना या बार-बार बुखार आना, लगातार खांसी होना, जो टीबी जैसी हो सकती है। सांस लेने या सामान्य गतिविधि के दौरान सीने में दर्द होना और टीवी समझकर शुरू किए गए इलाज के बावजूद लक्षण में सुधार न होना है। इस बीमारी का सबसे अधिक खतरा खेती-किसानी से जुड़े लोगों को हो सकता है, क्योंकि उनका सीधा संपर्क मिट्टी और पानी से होता है। डायबिटीज (मधुमेह) के मरीज और अधिक शराब का सेवन करने वालों को भी यह बीमारी हो सकती है। इस बीमारी की तत्काल जाँच के साथ उपचार एवं सावधानी रखकर बचाव किया जा सकता है।

 

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