
*इस वर्ष राज्य के 660 पारंपरिक वैद्यों का होगा प्रमाणन, औषधीय पौधों के संरक्षण और स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा को मिलेगा बढ़ावा*
रायपुर, 21 जुलाई 2026/ छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) द्वारा महासमुंद वनमंडल के सहयोग से पहली बार जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन का आयोजन वन विद्यालय, महासमुंद में किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा को संरक्षित करना, वैद्यों को शासन की योजनाओं से जोड़ना तथा औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा देना था।
कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण से हुई। बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने लाल चंदन, उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने लक्ष्मी तरु तथा बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने रीठा का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर वैद्य सम्मेलन का शुभारंभ किया गया।
*राज्य के सभी जिलों में होंगे वैद्य सम्मेलन*
बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज और पारंपरिक वैद्यों ने वर्षों से स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा, पारंपरिक उपचार पद्धति और औषधीय ज्ञान को सुरक्षित रखा है। इस अमूल्य ज्ञान को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के माध्यम से राज्य के 660 पारंपरिक वैद्यों का प्रमाणन कराने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक जिले से लगभग 20 वैद्यों का चयन कर उन्हें प्रमाण-पत्र दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
*वैद्यों के लिए कई हितकारी योजनाएं संचालित*
बोर्ड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बोर्ड द्वारा वैद्यों के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें औषधीय पौधों की खेती, विनाश-विहीन विदोहन तकनीक का प्रशिक्षण, हीलर हर्बल गार्डन योजना, स्कूलों में हर्बल गार्डन की स्थापना तथा समूहों को निःशुल्क पल्वराइजर मशीन उपलब्ध कराने जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से वैद्यों को तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
*वैद्यों ने साझा किया पारंपरिक ज्ञान*
सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से आए वैद्यों ने जड़ी-बूटियों से उपचार संबंधी अपने पारंपरिक अनुभव साझा किए। उन्होंने वन क्षेत्रों से आवश्यकता अनुसार औषधीय पौधे एकत्र करने में सहयोग की मांग भी रखी।
इस पर बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री अंजय शुक्ला ने वन अधिकारियों से वैद्यों की समस्याओं के समाधान का आग्रह किया। महासमुंद वनमंडलाधिकारी श्री मयंक पांडे ने आश्वासन दिया कि नियमानुसार अनुमति लेकर वन क्षेत्रों में जाने वाले वैद्यों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन में भाग लेने वाले वैद्यों एवं वन प्रबंधन समिति के सदस्यों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए।
इस अवसर पर महासमुंद वनमंडलाधिकारी श्री मयंक पांडे, संयुक्त वनमंडलाधिकारी सुश्री डिम्पी बैस, उपवनमंडलाधिकारी श्री गोविंद सिंह, परिक्षेत्र अधिकारी श्री सियाराम करमाकर, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जिले के पारंपरिक वैद्य, लगभग 50 वैद्य तथा वन प्रबंधन समितियों के 200 से अधिक सदस्य उपस्थित रहे।







