डीके शिवकुमार संविधान बदलेंगे या पार्टी, या टीएस सिंहदेव, सचिन पायलट की तरह ज़ब्त करेंगे, वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

इन दिनों कर्नाटक के मुख्यमंत्री न बन पाए वर्तमान उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार चर्चा में हैं। उन्होंने कर्नाटक में मुसलमानों को ठेकों में 4 प्रतिशत आरक्षण देने के लिये संविधान तक बदल देने की बात कही है।

ये नौबत इसलिये आई कि संविधान 50 प्रतिशत से अधिक किसी भी सूरत में आरक्षण की अनुमति नहीं देता। अब चूंकि संविधान आड़े आ रहा है तो संविधान को ही बदल दो।

डीके शिवकुमार की इस घोषणा की चहुंओर भत्र्सना हो रही है। ये कोई नयी बात नहीं है। ऐसी ही तुष्टिकरण की चढ़ाई चढ़ते-चढ़ते कांग्रेस अब गर्त में जाती दिख रही है।

पहले तो शिवकुमार सदगुरू जग्गी वासुदेव के महाशिवरात्रि के समारोह में शामिल हुए फिर कुम्भ में डुबकी लगाई और तारीफ भी कर दी, इससे शायद कांग्रेस आलाकमान की नाराजगी का अंदेशा होते ही अब मुस्लिम आरक्षण पर जोर मार रहे हैं।

लौटके शिवकुमार घर को आए

लुटी-पिटी कांग्रेस के राजा राहुल गांधी बीच में बहुत दिनों तक आम भारतीय को शिवजी (भगवान) को समझाने में….. जी हां समझाने में लगे थे क्यांेकि उनके अनुसार उन्होंने तो शिवजी को गहराई से जान लिया था। अध्यात्म के वे महागुरू बन गये थे। जनेउ शर्ट के उपर पहनकर पक्के हिंदु बन गये थे।

फिर एकाएक शायद अब उन्हें लग गया कि ये पैंतरा चला नही ंतो ‘हिंदुत्व’ गायब हो गया।

यहां तक कि शिवजी का ये महाभक्त हिंदुओं को दिखाने के लिये भी कुम्भ में डुबकी लगाने नहीं गया।

वे समझ गये कि हिंदु अब झांसे में आने वाले नहीं हैं तो जो झांसे में आएं वहीं चला जाए और वे लौट कर अपने पुराने ढर्रे पर वापस आ गये। यानि मुसलमानों की नैया खेने लगे।

शिवजी को राहुल ने समझा या नहीं समझा मगर शिवकुमार को अच्छी तरह समझ गये कि वे खफा हैं सीएम नहीं बनाने से। ईधर डीके शिवकुमार ने भी राहुल को समझ लिया कि उनकी मर्जी से हिलते पत्ते डीके नहीं पकड़ पा रहे। वे तो सिद्धारमैया को ही ठण्डी हवा दे रहे हैं। लिहाजा राहुल जी से मुंह फुलाने से कुछ हासिल होना नहीं है।

वे जान गये लुटिया डूब जाए तो डूब जाए राहुल गांधी टस से मस नहीं होने वाले।

कर्नाटक कांग्रेस पार्टी

डीके शिवकुमार के पास अब केवल दो ही विकल्प हैं। एक तो ममता दीदी की तृणमूल कांग्रेस की तरह वे भी बागी होकर कर्नाटक कांग्रेस पार्टी बना लें या फिर ‘उप’ पर ही संतोष कर राजनैतिक गाड़ी को धकियाते रहें।

*जैसे अपने यहां छत्तीसगढ़ में टीएस सिंहदेव कर रहे हैं।

सिंहदेव ने भी भूपेश बघेल को हिलाने का काफी प्रयास किया था मगर बघेल को हिला नहीं पाए। अंततोगत्वा उपमुख्यमंत्री बनकर ही संतोष करना पड़ा।*

राजस्थान की कहानी भी वैसी ही थी। वहां अशोक गहलोत के सामने सचिन पायलट की दाल नहीें गली। पायलट भी दीवार से सर टकरा कर मौन हो गये। तो लगता तो यही है कि कर्नाटक में शिवकुमार अपनी खिचड़ी नहीं पका पाएंगे यानि मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे।

तो फिर….. मंशा तो उनकी भाजपा में शामिल होने की हो रही होगी। क्योंकि भाजपा का सूरज ही भारत के आकाश में चमक रहा है। और भविष्य की संभावनाएं भाजपा के दामन से लिपटी दिख रही हैं। देश का हर उत्साही और महात्वाकांक्षी शख्स भाजपा का पल्लू थामने में समझदारी समझ रहा है।

लेकिन शिवकुमार का भाग्य साथ नहीं दे रहा है कि अभी वैसी कोई पगडण्डी दिख नहीं रही जो उन्हें भाजपा के रास्ते सत्ता के शीर्ष तक ले जाए।

कदाचित् भाजपा की जरूरत के समय यानि चुनाव के समय वैसा कुछ बन जाए तो बात बन जाए। अभी उनके पास ममता दीदी को फाॅलो कर तृणमूल कांग्रेस की तरह कर्नाटक कांग्रेस के नाम से अलग पार्टी बनाने का भी विकल्प है। लेकिन दीदी जैसा जोश और गिरने की असीमित सीमा जो दीदी के अंदर है डीके शिवकुमार मे शायद न हो।


जवाहर नागदेव वरिष्ठ पत्रकार, चिंतक, विश्लेषक,

मोबा. 9522170700

‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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