Monday, April 15

पेंशनभोगियों को डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने वाले डीओपीपीडब्लू के राष्ट्रव्यापी अभियान का पूरे देश में सफलतापूर्वक समाप्ति हुई

30 नवंबर, 2022 तक, कुल 30.34 लाख केंद्रीय सरकार के पेंशनभोगियों ने डीएलसी का सफलतापूर्वक उपयोग किया, जिसमें चेहरा प्रमाणीकरण द्वारा 2.82 लाख पेंशनभोगियों का डीएलसी बनाया गया

नई दिल्ली (IMNB).

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत आने वाले पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने इस वर्ष केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र को बढ़ावा देने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरूआत की। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक और डीएलसी के उपयोग को बढ़ावा देना है जिससे पारदर्शिता और ‘ईज ऑफ लिविंग’ को सुनिश्चित किया जा सके। सभी पंजीकृत पेंशनभोगी संघों, पेंशन वितरण करने वाले बैंकों, भारत सरकार के मंत्रालयों और सीजीएचएस केंद्रों को पेंशनभोगियों के ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लिए विशेष शिविरों का आयोजन करते हुए जीवन प्रमाणपत्र देने के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र/चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक को बढ़ावा देने का निर्देश जारी किया गया।

जागरूकता में बढ़ोत्तरी होने के कारण, चेहरा प्रमाणीकरण की लोकप्रिय बढ़ रही है जो कि विशेष रूप से वृद्ध और अक्षम बुजुर्ग लोगों को राहत प्रदान करने में बहुत ही सक्षम है। 30 नवंबर, 2022 तक कुल 30.34 लाख केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों ने डीएलसी का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, जिसमें चेहरा प्रमाणीकरण के माध्यम से 2.82 लाख डीएलसी बनाए गए हैं।

इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय स्टेट बैंक और कुछ शहरों में पंजाब नेशनल बैंक ने विभाग के साथ सहयोग किया है और विभिन्न शहरों में शिविर स्थल प्रदान किया है। अभियान की प्रगति की निगरानी करने के लिए विभिन्न शहरों में डीओपीपीडब्ल्यू के विभिन्न अधिकारियों को नामित किया गया है। 01-30 नवंबर, 2022 की अवधि में,  देश के उत्तर में श्रीनगर से लेकर दक्षिण में नागरकोइल (कन्याकुमारी जिला) और पूर्व में गुवाहाटी से लेकर पश्चिम में अहमदाबाद तक पूरे देश के विभिन्न शहरों में विशेष जागरूकता शिविरों का आयोजन किया गया। इस अभियान में देश के विशेष शहरों दिल्ली (हौजखास, पंखा रोड, चाणक्यपुरी, जंगपुरा), नोएडा, चंडीगढ़, मोहाली, श्रीनगर (जम्मू और कश्मीर), नागपुर, पुणे (महाराष्ट्र), इलाहाबाद, जम्मू, जालंधर, ग्वालियर (एमपी), त्रिशूर (केरल), मदुरै, नागरकोइल, वडोदरा, अहमदाबाद, गुवाहाटी (असम), हैदराबाद, अंबरनाथ, मुंबई, भुवनेश्वर, बालासोर, कटक (उड़ीसा), तिरुवनंतपुरम, जयपुर, चेन्नई, कराईकल, पुदुचेरी, देहरादून, जगादरी (हरियाणा), हुगली, हावड़ा, कोलकाता, रांची, बैंगलोर, गुलबर्गा, मैसूर को शामिल किया गया। इस राष्ट्रव्यापी अभियान को भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की सहायता से डीओपीपीडब्ल्यू के अधिकारियों द्वारा चलाया गया और बैंकों ने अभियान स्थलों को प्रायोजित भी किया। इस अभियान में केंद्र सरकार के पंजीकृत पेंशनधारियों के संघों, आईपीपीबी, यूआईडीएआई, एनआईसी के प्रतिनिधियों के साथ-साथ सभी शहर में सीजीडीए की सक्रिय भागीदारी प्राप्त हुई।

कुछ पेंशनभोगियों का बायो-मैट्रिक्स विलुप्त होने के कारण उन्हें डीएलसी नहीं मिल रही थी और इस समस्या का समाधान करने के लिए पेंशन विभाग ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के साथ मिलकर आधार डेटाबेस पर आधारित चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक पद्धति को विकसित किया, जिसके माध्यम से किसी भी एंड्रॉइड आधारित स्मार्ट फोन पर एलसी देना संभव हो सकता है। इस सुविधा के अनुसार, चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक के माध्यम से एक व्यक्ति की पहचान की जा सकती है और डीएलसी उत्पन्न किया जा सकता है। इस सफल तकनीक की शुरुआत नवंबर 2021 में हुई, जिसने बाहरी बायोमेट्रिक उपकरणों पर पेंशनभोगियों की निर्भरता को कम किया और स्मार्टफोन-आधारित तकनीक का लाभ उठाकर इस प्रक्रिया को ज्यादा सुलभ और किफायती बनाया गया। इसने बुजुर्गों को ‘ईज ऑफ लिविंग’ प्रदान करने की दिशा में यह एक मील का पत्थर जैसी उपलब्धि प्राप्त की। कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ जितेंद्र सिंह ने व्यापक मंथन के बाद नवंबर 2021 में चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक की शुरुआत की थी।

इस उद्देश्य के लिए विकसित किए गए चेहरा प्रमाणीकरण ऐप से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर, एनआईसी ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए इसको शामिल किया। उदाहरण के लिए, जीवन प्रमाणपत्र का ओटीपी प्राप्त करने और उसे डाउनलोड करने के बाद उसे ऐप में खोला जा सकता है और पेंशनभोगियों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर, जीवन प्रमाणपत्र के लिए ओटीपी डालने के तुरंत बाद एक्सेस किया जा सकता है। सभी स्थानों पर भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों ने इस अभियान को बढ़ावा देने के लिए अपनी पूरी क्षमता लगा दी है और उनके अधिकारीगण छुट्टियों के दिन भी इसमें उत्साहपूर्वक शामिल हुए।

देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले पेंशनभोगियों ने इस अभियान की व्यापक रूप से सराहना की है। इस अभियान को पूरे देश में समाचारपत्रों और दूरदर्शन द्वारा व्यापक रूप से कवर किया गया है। 01-30 नवंबर, 2022 की अवधि में, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने अपने ट्विटर अकाउंट से 532 ट्वीट जारी किया है। इसके अलावा, इस अभियान के अन्य हितधारकों ने इस अवधि में 605 ट्वीट को री-ट्वीट भी किया है। विभाग के यूट्यूब पेज पर पांच वीडियो भी अपलोड किया गया। विभाग के आधिकारिक यूट्यूब चैनल- DOPPW_INDIA पर हिंदी और अंग्रेजी में दो वीडियो अपलोड किए गए, जिसमें विभाग के अधिकारीगण सरल भाषा में चेहरा प्रमाणीकरण तकनीक के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया को समझाते हैं।

पेंशनभोगियों द्वारा जीवन प्रमाणपत्र जमा करना एक महत्वपूर्ण कार्य है, जिसे पेंशनभोगियों द्वारा प्रत्येक वर्ष नवंबर माह में (80 वर्ष और उससे ज्यादा आयु के पेंशनभोगियों के लिए अक्टूबर माह में जीवन प्रमाणपत्र जमा कराने का विशेष प्रावधान है) किया जाता है जिससे उन्हें बिना किसी बाधा के निरंतर पेंशन मिलता रहे। पारंपरिक रूप से में पेंशनभोगियों को अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कराने के लिए पेंशन वितरण प्राधिकरण जाना पड़ता था, जिसके लिए बैंक शाखाओं में लंबी कतारें लगती थी और इंतजार करना पड़ता था। यह वृद्ध, बीमार और अशक्त पेंशनभोगियों के लिए असुविधाजनक था और पेंशनभोगियों के लिए पेंशन वितरण प्राधिकरण के रिकॉर्ड में अपने जीवन प्रमाणपत्र को अपडेट करने के संबंध में जानकारी प्रदान करने वाला कोई तंत्र नहीं था।

केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लिए, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट यानी जीवन प्रमाणपत्र को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दे रहा है। शुरुआत में बायोमेट्रिक्स का उपयोग करके डीएलसी जमा करना शुरू किया गया था। विभाग ने डीएलसी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न शहरों में 50 पंजीकृत पेंशनभोगी संघों को शामिल किया गया। विभाग ने डीएलसी को ग्रामीण डाक सेवकों की एजेंसी के माध्यम से डोर-स्टेप सेवाओं में शामिल करने के लिए इंडियन पोस्ट एंड पेमेंट बैंक (आईपीपीबी) को शामिल किया, जिनकी संख्या 1.9 लाख से ज्यादा है। पेंशन वितरण करने वाले बैंकों को जीवन प्रमाणन की वीडियो आधारित केवाईवी पद्धति को अपनाने के लिए कहा गया और 12 बैंकों के एक संघ को डीएलसी के लिए डोर-स्टेप सेवाएं प्रदान करने के लिए भी कहा गया। 80 वर्ष और उससे ज्यादा उम्र के अति वरिष्ठ पेंशनभोगियों के लिए, डीओपीपीडब्ल्यू ने इस आयु वर्ग को 01 अक्टूबर से ही अपना एलसी जमा करने की अनुमति प्रदान करने का आदेश जारी किया गया जिससे उन्हें एक विशेष खिड़की प्रदान की जा सके और विभिन्न पेंशन वितरण बैंक शाखाओं में भीड़ से बचा जा सके। भारतीय दूतावासों/वाणिज्य दूतावासों को भी सलाह दी गई कि वे विदेशों में रहने वाले प्रवासी पेंशनभोगियों की सहायता करें जो अब अपने ईमेल पर एक ओटीपी प्राप्त करके डीएलसी दे सकें।

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