
अम्बिकापुर 04 जून 2026/ विश्व पर्यावरण दिवस के परिप्रेक्ष्य में सरगुजा जिले में प्रकृति संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का एक उत्कृष्ट मॉडल आकार ले रहा है। जिले के चार विकासखंडों- सीतापुर, बतौली, उदयपुर और लुण्ड्रा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) और जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के सफल अभिसरण से 7,400 मिश्रित फलदार पौधे लहलहा रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की सतत निगरानी और उचित देखभाल के परिणामस्वरूप इन पौधों की जीवित रहने की दर 90 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।
योजनाओं का सफल अभिसरण, हरियाली के साथ मिला रोजगार
वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा एवं डीएमएफ के संयुक्त प्रयासों से इस वृहद वृक्षारोपण अभियान को धरातल पर उतारा गया। कार्ययोजना के तहत मनरेगा के माध्यम से गड्ढा खुदाई, पौधों का रोपण एवं सिंचाई कार्य कराए गए, जबकि पौधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए डीएमएफ मद से फेंसिंग (घेराव) की स्वीकृति प्रदान की गई। इस अभिनव पहल से न केवल जिले में वन आवरण और हरियाली का विस्तार हुआ है, बल्कि वृक्षारोपण कार्यों के जरिए स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार के पर्याप्त अवसर भी सुलभ हुए हैं।
सामुदायिक भूमि पर उन्नत किस्मों का हुआ रोपण
जिले के सीतापुर विकासखंड के ग्राम डेकीडोली, बतौली के महेशपुर, उदयपुर के सरगवां और लुण्ड्रा के करेसर में चयनित सामुदायिक भूमि पर आम, अमरूद, कटहल, जामुन, नींबू, मुनगा, सीताफल और आंवला जैसे विभिन्न फलदार पौधों की उन्नत किस्मों का रोपण किया गया है। वर्तमान में उद्यान विभाग द्वारा इन पौधों का विधिवत रखरखाव किया जा रहा है। आगामी तीन वर्षों तक विभाग द्वारा ही इनकी सघन देखभाल सुनिश्चित की जाएगी। ’स्व-सहायता समूहों को मिलेगी 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आयरू सीईओ जिला पंचायत’ इस दूरगामी पहल के संबंध में जिला पंचायत सीईओ श्री विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि, डेकीडोली, महेशपुर, सरगवां और करेसर में रोपे गए पौधों की ग्रोथ बहुत अच्छी है। 3-4 साल बाद जब ये पौधे पूर्ण विकसित होकर फल देने लगेंगे, तो इनसे जुड़े महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) को सालाना 25 से 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
श्री अग्रवाल ने आगे बताया कि वर्तमान में मैनपाट के रोपाखार और जजगा में भी वृक्षारोपण का कार्य प्रगति पर है। सरगुजा जिले को हरा-भरा बनाने, पर्यावरण को बढ़ावा देने और महिलाओं की आजीविका को समृद्ध कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से इस कार्य को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा तथा भविष्य में ऐसी और भी परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की जाएगी।
ग्राम भकुरा बन चुका है सफल मॉडल
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व उद्यान विभाग द्वारा अंबिकापुर विकासखंड के ग्राम भकुरा में भी मनरेगा के तहत फलदार पौधरोपण कराया गया था। आज वहां पौधों से भरपूर फल उत्पादन हो रहा है, जिसने जिले में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन के एक सफल और अनुकरणीय मॉडल के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है।









