Saturday, May 18

‘उसने’ हिंदुस्तान में इंसाफ का रंग उकेरा है, हिंदू विरोधी जालिमों के मंसूबों पर पानी फेरा है,‘ वो’ इतना उठता नहीं, गर ‘ये’ इतना गिरते नहीं, करते नहीं अन्याय तो आज, मारे-मारे फिरते नहीं,

वरिष्ठ पत्रकार जवाहर नागदेव की खरी… खरी…

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी से लोकसभा के लिये नामांकन दाखिल किया हैं उनका नामांकन दाखिल करना किसी राजनैतिक मुहिम का हिस्सा कम और किसी धार्मिक आयोजन के क्रियान्वयन की तैयारी अधिक लगी।

मोदीजी के काम करने का अंदाज कुछ अलग ही होता है, आम इंसान की सोच से कुछ हटके। विपक्ष अपने अस्तित्व के लिये मैदान में है वरना सबको पता है कि कौन जीत रहा है, कौन सरकार बना रहा है।

एक साक्षात्कार के दम्र्यान सुप्रसिद्ध कलाकार आशुतोष राणा ने ये विचार व्यक्त किये कि ‘देश मानचित्रों का विषय नहीं होता। देश, देश में रहने वाले नागरिकों के ‘मन’ चित्रों का विषय होता है’। यानि देश में नक्शा कैसा कितना है ये महत्वपूर्ण नही होता।

देश के नागरिकों की मनःस्थिति कैसी है ये महत्व का विषय है।

काश ये बात हमारे देश के दलों को समझ में पहले ही आ जाती तो आज अधिकांश दलों की ये दुर्गति नहीं होती और अवाम पर सत्ताधारियों के निरंकुश होने का खतरा नहीं मण्डराता।

जनता को मिला विकल्प

देश की सम्पदा की लूट-खसोट कर-कर के, हर सरकारी योजना में बेशर्म काली कमाई कर-कर के, तुष्टिकरण कर-कर के और हिंदुओं को प्रताड़ित कर-कर के इन दलों ने इतना गदर मचाया कि जैसे ही अवाम को इनसे छुटकारे के रूप् में दूसरा विकल्प मिला अवाम ने तत्काल लपक लिया। सर आंखों पर बिठा दिया।

और जैसे ही अवाम ने दूसरे विकल्प के रूप् मे भाजपा और मोदीजी को मौका दिया, समझो इन दलों के लिये उपेक्षा और बर्बादी का रास्ता प्रशस्त हो गया।

मोदी के छक्के पे छक्के

मोदीजी ने आते ही जनता के हित में इतने चैके-छक्के लगाए, इतने चैके-छक्के लगाए कि सारा देश दंग रह गया।

बस अवाम ने एक-एक कर सारे विरोधी दलों को आउट करना शुरू कर दिया और ये सिलसिला अब तक कायम है।

हर बार मोदी और मोदी विरोधियों के बीच जंग दिखती है जो बहुधा एकतरफा होती है।

क्योंकि हर बार मोदीजी कुछ न कुछ ऐसा करते हैं जिससे अवाम के जीवन में खुशी बढ़ती है, सुख बढ़ता है, इंसाफ बढ़ता है और इससे उनकी लोकप्रियता में वृद्धि होती है।

राममंदिर के रूप एक और शतक लगाया है जिससे विपक्ष चारों खाने चित्त नजर आया।

अभी ठीक से विपक्षी बौखलाहट थमी भी नहीं थी कि सीएए का बम फोड़ दिया।

कोई दो मत नहीं कि इन चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ हो जाए।

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जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक

मोबा. 9522170700‘

बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’

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