
Varalakshmi Vrat 2026 does and don’ts: वरलक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी की कृपा, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना से रखा जाता है. दक्षिण भारत सहित देश के कई हिस्सों में विवाहित महिलाएं विशेष रूप से यह व्रत करती हैं. व्रत के दिन पूजा के साथ नियमों और शुद्धता का भी ध्यान रखना महत्वपूर्ण माना जाता है. हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और पारिवारिक परंपराओं में पूजा विधि में कुछ अंतर हो सकता है.
वरलक्ष्मी व्रत में क्या करें?
- सुबह जल्दी उठें और स्नान करें: स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा की तैयारी करें. पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखें.
- मां वरलक्ष्मी का विधिवत पूजन करें: पूजा स्थान पर कलश स्थापित कर मां लक्ष्मी का ध्यान करें. अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री का उपयोग करें.
- संकल्प जरूर लें: व्रत और पूजा शुरू करने से पहले परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना के साथ संकल्प लें.
- श्रद्धा से मंत्र, स्तोत्र या कथा सुनें: मां लक्ष्मी की पूजा के दौरान लक्ष्मी स्तुति, व्रत कथा या अन्य पारंपरिक पाठ किए जा सकते हैं.
- दान-पुण्य करें: अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है.
- प्रसाद बांटें: पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में प्रसाद वितरित करें.
वरलक्ष्मी व्रत में क्या न करें?
- पूजा में जल्दबाजी न करें: मन को शांत रखकर श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पूजा करें.
- घर और पूजा स्थल को गंदा न रखें: स्वच्छता का विशेष ध्यान दें.
- क्रोध और कटु वचन से बचें: इस दिन संयमित व्यवहार और मधुर वाणी को महत्व दिया जाता है.
- व्रत के नियमों को लेकर भ्रमित न हों: निर्जला या फलाहार व्रत हर परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है. इसलिए अपनी पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखें.
- दिखावे से बचें: पूजा का मूल उद्देश्य श्रद्धा और आस्था है, इसलिए अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने के बजाय सादगी से पूजन करना बेहतर माना जाता है.
- में सबसे महत्वपूर्ण है सच्ची श्रद्धा, स्वच्छता और सकारात्मक भाव. पूजा की विधि क्षेत्र और परिवार के अनुसार अलग हो सकती है, इसलिए घर में चली आ रही परंपरा का पालन करना सबसे उचित रहता है.
वरलक्ष्मी व्रत 2026: तारीख और पंचांग
- तारीख: शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
- सूर्योदय: सुबह 6:00 बजे
- सूर्यास्त: शाम 7:23 बजे
- तिथि: प्रतिपदा
- योग: सुकर्मा, रात 9:06 बजे तक
- नक्षत्र: शतभिषा, शाम 4:43 बजे तक
वरलक्ष्मी व्रत के शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:36 से 5:18 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:15 से 1:09 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:56 से 3:49 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 10:14 से 11:53 बजे तक








