
सबसे पहले प्रणाम है उस महामानव को, जिसने देश की खातिर बलिदान दिया। जिसने देश प्रेम क्या होता है, सदाचरण क्या होता है, इसका अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। जिनका 2 अकटूबर को जन्मदिन है लाल बहादुर शास्त्री।
दुर्भाग्य से जिनके निधन पर आज भी संदेह के बादल मण्डरा रहे हैं। रूस के ताशकन्द में उनकी मृत्यु सहज नहीं थी बल्कि एक षड्यंत्र का हिस्सा थी, हत्या थी, ऐसा माना जाता है।
मगर कदाचित् विदेश नीति में असंतुलन न आ जाए, रूस से हमारी दोस्ती पर चोट न पहुंचे, इस भय के कारण हम लोग इस बात को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करने से बचते हैं।
महामानव लाल बहादुर शास्त्री को शत-शत नमन है।
क्यों पीछे सर्वे में भाजपा
ज्यों-ज्यों संकट आ रहे हैं त्यों-त्यों मोदीजी निखरते जा रहे हैं। देश में ही नहीं प्रदेशों में भी उनके नाम का डंका बज रहा है पर ऐसा क्या हुआ कि छत्तीसगढ़ में सर्वे में भाजपा को पीछे दिखा दिया।
यू ंतो मोदीजी के कामों की बड़़ी लंबी लिस्ट है।
एक से एक दुरूह काम मोदीजी ने निपटाए हैं। यही कारण है कि वे हर बार शहंशाह की कुर्सी पर बिठाए गये। लेकिन जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं में जो गफलत नजर आ रही है, जनता के राजमर्रा के जीवन में जो असंतोष पनपता रहा है उसमे शासन पंगु नजर आ रहा है।
छत्तीसगढ़ में एक सर्वे के अनुसार भाजपा सरकार के नंबर कम हो रहे हैं।
सर्वे के मुताबिक आाज की डेट में भाजपा को 37 और कांग्रेस को 52 सीटें मिलने की संभावना है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि फिर से जनता देश में भाजपा और प्रदेश में कांग्रेस का ऐलान करने वाली है।
वैसे इस सर्वे का कितना विश्वास किया जा सकता है, ये नहीं कहा जा सकता, लेकिन इस बात को नकारा नहीं जा सकता कि छत्तीसगढ़ शासन बहुत अच्छा नहीं चल रहा है।
शासन तो कांग्रेस का भी अच्छा नहीं था परन्तु कांग्रेस से उम्मीद ज्यादा नहीं थी, भाजपा से है, जिसमें भाजपा अभी तक बहुत सफल नहीं दिख रही है।
बदस्तूर जारी है भ्रष्टाचार
भ्रष्टाचार हमारे आचरण में इस कदर घर कर गया है कि हम लोग इससे कभी असहज नहीं होते। लेकिन जब कभी हमारे जीवन में भ्रष्टाचार के कारण कोई असामान्य घटना घट जाती है या बड़ा नुकसान हो जाता है तब भयंकर पीड़ा होती है।
बाहुबलियों को शासन का भरपूर संरक्षण मिलता है। आम आदमी भ्रष्टाचार के कारण खून के आंसू रोता है।
किसी एक विभाग में नहीं। सारे सरकारी विभागों में काम करने वालों का जमीर मर चुका है। एकाध को छोड़कर कोई भी सरकारी आदमी बिना रिश्वत के काम नहीं करता। मंत्री से संतरी तक केवल और केवल पैसे कमाने में लगे हैं।
जो ईमानदार होने का प्रयास करता है उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
अमानवीय घोटाले
स्वास्थ्य सेवाओं मे
यदि खुलेदिल से निष्पक्ष होकर कहा जाए तो यही सच है कि मानव सेवा के हर विभाग मे अमानीयता का बेईमानों का बोलबाला है।
स्वास्थ्य सेवाओं में कहीं भी ईमानदारी से काम नहीं हो रहा। इंसान मरे तो मरे डाॅक्टरों, अधिकारियों को अपनी मनमानी करनी है।
सरकारी स्तर पर भी इंसान को निचोड़ा जाता है, यही हाल प्राईवेट सेक्टर का भी है।
इंसान की जान की कोई कीमत नहीं है। हर जगह पैसे से काम होता है। जिन सरकारी महकमों में निशुल्क इलाज होता है, वहां बड़े आराम से, तसल्ली से और लापरवाही से काम होता है। क्यांेकि पता होता है कि यदि किसी को कुछ हो गया तो भी हमारी तनख्वाह नहीं कटनी और कुछ नहीं बिगड़ना।
पुलिस को साधना होगा
अफसोस है कि तमाम कोशिशों के बाद भी शहर में अपराध थम नहीं रहे हैं।
हर दिन चाकूबाजी की घटनाएं घट रही हैं, जिनमें कई जानें जा रही हैं। पुलिस को टाईट करना अति आवश्यक है जिसमें छत्तीसगढ़ शासन फिलहाल विफल दिख रहा है।
नशे में अपराध बेतहाशा बढ़े हैं।
हालांकि जिस तरीके से उपमुख्यमंत्री विष्णुदेव साय नशेड़ियों और चाकूबाजों के पीछे पड़े हैं उससे हड़कम्प मचा हुआ है। नशे का कारोबार करने वाले एक से एक धुरंधर फंसते जा रहे हैं। केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं, देश के कोने-कोने से नशे के व्यापारियों की धरपकड़ हो रही है। लेकिन ये प्रयास शायद नाकाफी हैं।
कुल मिलाकर प्रशासन पर पकड़ कमजोर है। भाजपा से प्रदेश को उम्मीदें हैं। यदि लगातार सत्ता काबिज रहना है तो प्रयासों में ईमानदारी लानी होगी। भाई-भतीजा वाद पर अंकुश लगाना होगा।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’








