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धमतरी में आईएफएस प्रशिक्षु अधिकारियों ने सीखा वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन का व्यवहारिक ज्ञान 10 दिवसीय फील्ड अभ्यास सत्र संपन्न, सतत वन प्रबंधन और जनभागीदारी के विविध पहलुओं का किया अध्ययन

 

धमतरी, 23 मई 2026/ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून के वर्ष 2024-25 बैच के भारतीय वन सेवा (IFS) के 50 प्रशिक्षु अधिकारियों ने धमतरी वनमंडल में आयोजित 10 दिवसीय व्यावहारिक प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण किया। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की कार्य आयोजना (वर्किंग प्लान) के अध्ययन हेतु 12 मई से 22 मई तक आयोजित इस विशेष अभ्यास कार्यक्रम में अधिकारियों ने वनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, संरक्षण, संवर्धन एवं जनसहभागिता आधारित गतिविधियों की जमीनी समझ विकसित की।

उल्लेखनीय है कि वन विभाग की कार्य आयोजना एक वैज्ञानिक एवं दीर्घकालिक रणनीतिक दस्तावेज है, जिसके माध्यम से आगामी 10 वर्षों के लिए वनों के सतत प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों के संवर्धन और पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने की रूपरेखा तैयार की जाती है।

प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों ने धमतरी वनमंडल के विभिन्न वन परिक्षेत्रों का भ्रमण कर फील्ड आधारित अध्ययन किया। केरेगांव वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक-167 में प्रशिक्षुओं ने बायोमैट्रिक एक्सरसाइज, सागौन वृक्षारोपण तथा शुष्क पर्णपाती वनों के सैंपल प्लॉट से डेटा संकलन की तकनीकों का अभ्यास किया। इसके पश्चात उत्तर सिंगपुर, बिरगुड़ी एवं दुगली वन क्षेत्रों में सागौन वृक्षारोपण, ग्रिड सर्वे और वन प्रबंधन की तकनीकी प्रक्रियाओं को समझा गया।

दुगली क्षेत्र में अधिकारियों ने बांस वृक्षारोपण एवं क्षतिग्रस्त वनों के पुनर्वास संबंधी गतिविधियों का अध्ययन किया, वहीं नगरी वन परिक्षेत्र में बहुमूल्य साल वनों के संरक्षण एवं प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी प्राप्त की। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक वन सर्वेक्षण तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप वन प्रबंधन की रणनीतियों पर भी विशेष जोर दिया गया।

वनों के साथ स्थानीय जनजीवन के संबंधों को समझने के उद्देश्य से प्रशिक्षु अधिकारियों ने तुमड़ाबहार, खिडकीटोला एवं डांगीमांचा गांवों में सामाजिक-आर्थिक सर्वे किया। इस दौरान ग्रामीणों एवं जनजातीय समुदायों की आजीविका, लघु वनोपज आधारित गतिविधियों तथा वन संरक्षण में उनकी सहभागिता का अध्ययन किया गया।

अधिकारियों ने दुगली वन प्रसंस्करण केंद्र में लघु वनोपजों के प्रसंस्करण कार्यों तथा नगरी डिपो में इमारती लकड़ियों के रखरखाव और प्रबंधन की प्रक्रियाओं का भी अवलोकन किया। दक्षिण सिंगपुर परिक्षेत्र में भू-जल संरक्षण के तहत ‘पम्पारनाला’ संरचना का अध्ययन कर जल संरक्षण उपायों की जानकारी ली गई। साथ ही संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से स्थानीय समुदायों की भागीदारी आधारित वन संरक्षण मॉडल को भी समझा गया।

पूरे प्रशिक्षण सत्र के दौरान धमतरी के वनमंडलाधिकारी (DFO) श्री जाधव श्रीकृष्ण ने प्रशिक्षु अधिकारियों का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें वन प्रबंधन के व्यवहारिक पक्षों, चुनौतियों एवं समाधान आधारित कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि भविष्य के वन अधिकारियों के लिए फील्ड आधारित प्रशिक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे न केवल तकनीकी दक्षता विकसित होती है, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और ग्रामीण समाज के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण भी मजबूत होता है।

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