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इक्कीसवीं सदी में शिक्षा ही बदल सकती है युवाओं का भविष्य : हरिवंश

 

* राज्यसभा के उपसभापति ने दी युवाओं को नई टेक्नोलाजी अपनाने की नसीहत
* टीडी कालेज के मनोरंजन हाल में ‘हरिवंश का सृजन-संसार’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम का आयोजन
बलिया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि इक्कीसवी सदी में युवाओं का भाग्य शिक्षा ही बदल सकती है। वे टीडी कालेज के मनोरंजन हाल में गुरूवार को ‘हरिवंश का सृजन-संसार’ विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। श्री मुरली मनोहर टाउन स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय और टाउन इंटर कालेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजयसभा के उपसभापति हरिवंश ने सबसे पहले भृगु मुनि को नमन करते हुए कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूं इसमें बलिया की मिट्टी का योगदान है। इसका गौरवपूर्ण अतीत रहा है। यह ऋषियों और साधकों व क्रान्तिकारियों की धरती है। अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मैं जहां पैदा हुआ, वहां छह महीने तक बाढ़ का पानी रहता था। श्री हरिवंश ने कहा कि शिक्षा ने बीते तीस-चालीस सालों में लोगों का भाग्य बदला है। युवाओं से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ही भाग्य बदल सकती है। उन्होंने उद्योगपति नारायण मूर्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि किस तरह उन्होंने शिक्षा के बल पर नए प्रतिमान गढ़े। उन्होंने कहा कि शार्टकट से सफलता पाना चाहते हैं तो आप जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। 2014 में मोदी के नेतत्व में टेक्नोलाजी में क्रन्तिकारी परिवर्तन हुए हैं। भारत दुनिया में मजबूत ताकत बन रहा है। यह पश्चिम दुनिया को सुहा नहीं रहा है। हमें सपेरे और जादूगरों का देश कहा जाता था। बावजूद इसके आज पूरी दुनिया भारत की तरफ उम्मीद की नजर से देख रही है। नए स्टार्टप्स का जिक्र करते हुए कहा कि 2014 के बाद सवा लाख से अधिक स्टार्टप्स हैं। हुनरमंद लोगों को अवसर मिल रहे हैं। बलिया के युवाओं से स्टार्टप्स शुरू करने की अपील की। नई तकनीक से आने वाले दस सालों में पांच करोड़ नौकरिया मिलने वाली हैं। हरिवंश ने कहा कि बलिया में वह ताकत है कि यहां के युवाओं को सही दिशा मिले तो नई इबारत लिख सकते हैं। इसलिए बलिया बदलाव की धरती बने। उन्होंने युवाओं के सामने पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उनसे प्रेरणा लें। कलाम की किताब का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि गरीबी की पृष्ठभूमि वाले परिवार से होने के उन्होंने बावजूद प्लेन बना लिया। जिसके लिए कभी उनके शिक्षक ने कभी हार्ड वर्क, हार्ड वर्क और हार्ड वर्क की नसीहत दी थी। हरिवंश ने इंजीनियर विश्वसरैया को आधुनिक विश्वकर्मा बताते हुए उन्हें आदर्श बनाने की अपील की। हरिवंश ने कहा कि संकल्प से साधना की ओर अग्रसर रहने की जरूरत है। युवाओं का नकारात्मक मानस बदले, इसके लिए महाविद्यालयों को आगे आना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य स्कील डेवलपमेंट भी होना चाहिए। यह गांधी जी भी चाहते थे। वर्ष 2014 के बाद नई शिक्षा नीति बनी है। इससे सकारात्मक बदलाव होगा। जबकि यह काम काफी पहले होना चाहिए था। देश की आजादी के बाद 2014 तक जिस गति से काम होना चाहिए था वह नहीं हुआ। अन्यथा देश बहुत आगे होता। उन्होंने चीन का हवाला देते हुए कहा कि वहां शुरू से ही मजबूत संकल्प से काम होता आया है। इसीलिए वह आज हमसे आगे है। उन्होंने कहा कि
दुनिया टेक्नोलाजी के परिवर्तन के द्वार पर खड़ी है। पुरानी टेक्नोलाजी वाली नौकरियां खतरे में हैं। इसलिए आज के चुनौतीपूर्ण दौर में युवा नई टेक्नोलाजी अपनाएं। भविष्य की नियति का लेखन नई टेक्नोलाजी बन रही है। सुखद है कि प्रधानमंत्री मोदी इस पर जोर दे रहे हैं। आज युवा छह घंटे सोशल मीडिया पर समय गंवा रहे हैं। इससे आप अपनी प्रतिभा का हनन कर रहे हैं। डिजिटल रचना का भी समय देता है और हमें कमजोर भी कर रहा है। इसलिए प्रधानमंत्री के डिजिटल उपवास के आह्वान पर ध्यान देने की भी हरिवंश ने अपील की।

महाकुम्भ को सफल बनाने में योगदान देने वाले अधिकारी और कर्मचारी प्रशंसा के पात्र हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार बधाई की पात्र है। आज दुनिया चकित है कि 54 करोड़ लोग एक स्थान पर एकत्रित होकर सफलता पूर्वक वापस जा चुके हैं। आने वाले दिनों में महाकुम्भ में दो-तीन अमेरिका नहा लेगा। यह भारत का पौरुष है। जब मैं दुनिया में जाता था और बताता था कि एक दिन में कोरोना का टीका लगता है तो लोग आश्चर्य में पड़ जाते थे।
विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि हरिवंश जी का सृजन संसार बहुत विशाल है। इतना अध्ययनशील राजनेता और पत्रकार वर्तमान दौर में बहुत कम रह गए हैं। हरिवंश जी की किताब ‘सृष्टि का मुकुट कैलाश मानसरोवर’ का जिक्र करते हुए कहा कि मानव अपने किए होने का एहसास न करे तो उसका जीना बेकार है। मनुष्य को कृतज्ञ होना चाहिए। हरिवंश जी दुनिया को आँखों से ही नहीं दिल से देखते हैं। जबकि दिल से दुनिया को देखने का चलन कम हो गया है। बलिया सौभाग्यशाली है कि यहां पैदा हुआ व्यक्ति दिल से दुनिया को देखता है। इनकी चिंताओं का दायरा बहुत व्यापक है। हरिवंश जी का गद्य कविता की तरह होता है। जिसमें मिट्टी की सुगंध सहज मिलती है। कहा कि आज सूचना का विस्फोट तो हुआ है पर ज्ञान की कमी हो रही है। हरिवंश जैसे लेखक ज्ञान के दायरे को बढ़ाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। ये हिन्दी पत्रकारिता के देदीप्यमान नक्षत्र हैं।
बीज वक्तव्य देते हुए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि अभी तक हरिवंश जी ने 28 मौलिक किताबों का सृजन किया है। यह उनकी पत्रकारिता और लेखन यात्रा को समझने के लिए काफी है। हरिवंश जी की लेखनी में देश और दुनिया की समस्याओं पर चिंतन है। साथ ही समस्याओं का समाधान भी है। हरिवंश जी की लेखनी में नैतिक मूल्यों की झलक मिलती है। चार दशकों तक हरिवंश जी देश के विरले संपादक हैं जिन्होंने न सिर्फ देश और समाज के समक्ष सवाल उठाये बल्कि समाधान भी प्रस्तुत किया। सादा जीवन और ईमानदार व्यक्तित्व इन्हें आज के दौर में सबसे अलग साबित करता है। अध्यक्षता टीडी कालेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष व संचालन प्रो. दयालानंद राय ने किया। संगोष्ठी में स्वागत वक्तव्य टीडी कालेज के प्राचार्य प्रो. रवींद्र नाथ मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन टाउन इंटर कालेज के प्राचार्य डा. अखिलेश सिन्हा ने दिया।

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इनसेट
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राजयसभा के उपसभापति ने दिए सवालों के जवाब
राष्ट्रीय संगोष्ठी को सम्बोधित करने के बाद राजयसभा के उपसभापति हरिवंश ने टीडी कालेज के मनोरंजन हाल में जैसे ही बैठना चाहा, सामने से दर्जनों युवाओं ने सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने एक-एक कर छात्रों के सभी सवालों के जवाब दिए। अधिकतर युवाओं के सवाल शिक्षा और रोजगार से जुड़े थे। उन्होंने कर्म करने और आगे बढ़ने की नसीहत दी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कोरोना के दौर में दुनिया के सामने भारत ने अपने सामर्थ्य परिचय दिया। यह देश की प्रतिभाओं के कर्म से सफल हुआ। उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि मोबाइल पर कम और किताबों पर युवा अधिक समय दें।
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