
Indian Airlines : इंडियन एयरलाइंस ने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि खर्च बढ़ गया है. वेस्ट एशिया संकट से हालात थोड़े अनिश्चित हैं. कंपनियां नुकसान से बचने के लिए उड़ानों की संख्या कम कर रही हैं. इससे कुल फ्लाइट्स कम होंगी, लेकिन इसका मकसद खर्च कंट्रोल करना और खतरे को घटाना है. यह खबर हिंदुस्तान टाइम्स ने प्रकाशित की है. अब तक सरकार की ओर से फ्लाइट्स कम किए जाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
पिछले साल समर शेड्यूल में इंडियन एयरलाइंस हर हफ्ते करीब 25,610 उड़ानें चला रही थीं, जो 2024 के 24,275 से ज्यादा थीं. लेकिन इस बार 29 मार्च से शुरू हो रहे समर शेड्यूल में यह संख्या घटकर करीब 22,600 रह सकती है. यह शेड्यूल 31 अक्टूबर तक चलेगा, यानी इस पूरे समय फ्लाइट्स पहले के मुकाबले कम रहेंगी.
ट्रैवल डिमांड घटने का डर है एयरलाइंस को
मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि एयरलाइंस बढ़ते खर्च, खासकर फ्यूल और विदेशी मुद्रा (फॉरेन करेंसी) की लागत के कारण उड़ानों की संख्या कम कर रही हैं. साथ ही वेस्ट एशिया में जारी तनाव की वजह से ट्रैवल डिमांड घटने का डर भी है, इसलिए कंपनियां पहले से ही सावधानी बरतते हुए अपनी क्षमता कम कर रही हैं.
अधिकारी ने बताया कि इस बार समर शेड्यूल में पिछले साल के मुकाबले करीब 12% कम उड़ानें चलाई जाएंगी.
एयरलाइन का खर्च क्यों बढ़ रहा है?
देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने कहा है कि अप्रैल 2026 में वह रोजाना करीब 2000 घरेलू उड़ानें शुरू करने की योजना बना रही है. अंतरराष्ट्रीय उड़ानें फिलहाल सर्दियों जैसी रहेंगी, लेकिन मिडिल ईस्ट के हालात के अनुसार बदलाव हो सकता है. कंपनी ने बताया कि फ्यूल और विदेशी मुद्रा महंगी होने से खर्च लगातार तेजी से बढ़ रहा है.






