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प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान अंतर्गत दो दिन में 40 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच

*843 स्वास्थ्य संस्थानों में चला अभियान, 10 हज़ार से अधिक हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी की समय रहते पहचान व प्रबंधन*

*”छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी” थीम पर आधारित है कार्यक्रम*

रायपुर, 25 सितंबर 2025/ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में मातृत्व सुरक्षा को लेकर विशेष स्वास्थ्य सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत 24 और 25 सितंबर को प्रदेश के 843 शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में आयोजित इन सत्रों में 40 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं ने भाग लिया। उन्हें निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, परामर्श और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

“छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी” की थीम पर आधारित इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में मातृ मृत्यु दर को घटाना तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें समुचित उपचार उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस अभियान ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को और सुदृढ़ किया, बल्कि जनसहभागिता को प्रोत्साहित करते हुए मातृत्व सुरक्षा को लेकर जनजागरूकता भी बढ़ाई है।

इन सत्रों में हीमोग्लोबिन, रक्तचाप, वजन, रक्त परीक्षण, अल्ट्रासाउंड एवं पोषण परामर्श जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। इस दौरान लगभग 10 हज़ार से अधिक महिलाओं को ‘उच्च जोखिम गर्भावस्था’ (High-Risk Pregnancy) की श्रेणी में चिन्हित कर विशेषज्ञ चिकित्सकों के परामर्श और सतत निगरानी में लाया गया, जिससे संभावित जटिलताओं का समय रहते उपचार संभव हो सका।

अभियान अंतर्गत 6 हज़ार से अधिक महिलाओं की अल्ट्रासोनोग्राफी भी की गई। इससे जटिलताओं की समय पर पहचान और इलाज की दिशा में ठोस कार्रवाई संभव हुई। खासकर दूरस्थ अंचलों की महिलाओं के लिए यह सेवाएं विशेष रूप से लाभकारी सिद्ध हुईं।

कार्यक्रम की निगरानी हेतु राज्य एवं जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 187 सत्रों का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया गया। सेवाओं की गुणवत्ता, प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और हितग्राहियों तक सेवा की वास्तविक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए यह निरीक्षण अहम रहा।

*बिलासपुर जिले में हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं पहुंचीं*

इसी अभियान के अंतर्गत बिलासपुर जिले ने मातृत्व स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। फेडरेशन ऑफ ऑब्स्ट्रेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के सहयोग से जिले के हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं पहुंचाई गईं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महतारी, हम सबकी जिम्मेदारी के संकल्प के साथ हमारी सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत दो दिनों में 40 हज़ार से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच और 10 हज़ार से अधिक उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान इस बात का प्रमाण है कि हमारी स्वास्थ्य सेवाएं दूरस्थ अंचलों तक भी प्रभावी रूप से पहुँच रही हैं। मातृ मृत्यु दर में कमी लाना और हर बहन को सुरक्षित मातृत्व उपलब्ध कराना हमारी प्रतिबद्धता है, तथा यह केवल स्वास्थ्य का प्रश्न नहीं बल्कि सशक्त परिवार और समृद्ध समाज की मजबूत नींव है।

स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में जिस व्यापक स्तर पर गर्भवती महिलाओं की जांच, परामर्श और उपचार की सुविधा सुनिश्चित की गई है, वह मातृ स्वास्थ्य को लेकर हमारी सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। दो दिनों में 40 हज़ार से अधिक महिलाओं की जांच और 10 हज़ार से अधिक उच्च जोखिम गर्भावस्थाओं की पहचान यह साबित करती है कि समय पर जांच और विशेषज्ञ सेवाओं से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

*अभियान का मुख्य उद्देश्य*

गर्भवती महिलाओं को समय पर संपूर्ण जांच, परामर्श एवं उपचार की सुविधा देना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य है। इसके अंतर्गत स्थानीय चिकित्सकों के साथ-साथ विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों ने महिलाओं की एनीमिया, रक्तचाप, शुगर स्तर, भ्रूण की स्थिति, वजन आदि की जांच की। साथ ही प्रसव पूर्व देखभाल, पोषण, सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशु की देखभाल संबंधी जानकारी भी प्रदान की गई। इस पहल से न केवल मातृ मृत्यु दर में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाओं को पहली बार विशेषज्ञ सेवाएं सुलभ रूप से उपलब्ध कराई जा सकीं। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान प्रत्येक माह की 9 और 24 तारीख को आयोजित किया जाता है, लेकिन विभाग द्वारा “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान को देखते हुए सितंबर माह में इसका दायरा तीन अतिरिक्त दिनों के लिए बढ़ाया गया है, ताकि एक भी गर्भवती महिला आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रह जाए।

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