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भारी बारिश और बाढ़ से केरल और असम बेहाल, 25 लोगों की मौत, हजारों बेघर

केरल और असम में भारी बारिश और बाढ़ ने जमकर तबाही मचाई है. केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के ताजा आंकड़ों के अनुसार, बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक कम-से-कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि चार लोग लापता बताए जा रहे हैं. राज्य के कई इलाकों में पानी भरने से 18 हजार से अधिक लोगों को घर छोड़ना पड़ा है. दूसरी ओर, असम में भी नदियों का जलस्तर बढ़ने और लगातार बारिश से कई जिले प्रभावित हैं. दोनों राज्यों में राहत, पुनर्वास और नुकसान के आकलन का काम तेज कर दिया गया है.

बाढ़ से जुड़े प्रमुख आंकड़े

  • केरल में अब तक 25 लोगों की मौत, चार लापता
  • 418 राहत शिविरों में 18,434 लोगों ने शरण ली
  • 52 मकान पूरी तरह नष्ट और 565 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
  • पथनमथिट्टा के 133 शिविरों में 6,400 से अधिक लोग रह रहे
  • प्रभावित परिवारों को तत्काल 10 हजार रुपये देने की घोषणा

पथनमथिट्टा में अब भी नहीं उतरा बाढ़ का पानी

केरल के पथनमथिट्टा जिले में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. सबसे ज्यादा राहत शिविर तिरुवल्ला क्षेत्र में बनाए गए हैं, जहां कई इलाकों से पानी अब तक नहीं निकला है. मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने जिले का दौरा कर राहत कार्यों की समीक्षा की. उन्होंने अरनमुला के कोझेनचेरी रेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की और प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में किसी तरह की देरी न करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन को राहत कार्यों के लिए सभी जरूरी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने दिया मदद का भरोसा

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा है कि बाढ़ से प्रभावित प्रत्येक परिवार को तत्काल 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी. जिला प्रशासन को जरूरत के अनुसार धन खर्च करने का पूरा अधिकार दिया गया है. मुख्यमंत्री ने बाढ़ में पूरी तरह नष्ट हुए मकानों के लिए छह लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है. आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों, किसानों की फसलों और व्यापारियों को हुए नुकसान के लिए मुआवजे पर बुधवार को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में फैसला लिया जाएगा.

मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा- नदियों में गाद जमा होने से बढ़ी समस्या

मुख्यमंत्री सतीशन ने कहा कि पथनमथिट्टा में बाढ़ अब बार-बार होने वाली समस्या बन गई है. वर्ष 2018 और 2019 की विनाशकारी बाढ़ के बाद जरूरी दीर्घकालिक उपाय पूरी तरह लागू नहीं किए गए. हर साल आने वाली बाढ़ से नदियों में गाद जमा होती गई, जिससे उनकी गहराई और जल वहन करने की क्षमता कम हो गई है. मुख्यमंत्री ने नदियों से गाद हटाने के लिए तत्काल कदम उठाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि राज्य में मौसम की गंभीर स्थिति का पता कई बार बहुत कम समय पहले चलता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में कठिनाई होती है.

बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली बनाने का लक्ष्य

केरल सरकार ने देश की सबसे बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली विकसित करने और पथनमथिट्टा में आपदा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने का लक्ष्य रखा है. सीएम सतीशन कहा कि हाल की भारी बारिश आधिकारिक चेतावनी जारी होने से पहले ही शुरू हो गई थी, जिससे बचाव अभियान अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया. इसके बावजूद सरकारी मशीनरी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रही.

राहत शिविरों का किया निरीक्षण

मंगलवार को मुख्यमंत्री ने चिरयिरम्बु के एमटी एलपी स्कूल और रन्नी के सरकारी एलपी स्कूल में बनाए गए राहत शिविरों का दौरा किया. उन्होंने विस्थापित परिवारों से बातचीत की और भोजन, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य सुविधाओं की जानकारी ली. एमएस हायर सेकेंडरी स्कूल में आयोजित बैठक के दौरान उन्होंने व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की. व्यापारियों ने दुकानों और प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने उचित सहायता पर विचार करने का भरोसा दिया.

कोट्टायम में घरों और दुकानों में घुसा पानी

कोट्टायम जिले में भारी बारिश जारी है. कोडिमथा, थाझाथंगडी और इल्लीकल समेत कई निचले इलाकों में गंभीर जलभराव हो गया है. कई मकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस गया है. खराब मौसम को देखते हुए शिक्षण संस्थानों को बंद रखा गया है.

पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर

पथनमथिट्टा में पंबा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. मूझियार बांध के जलग्रहण क्षेत्र में रेड अलर्ट जारी किया गया है. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जलप्रवाह बढ़ने पर बांध के गेट कम समय की सूचना पर खोले जा सकते हैं. नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने को कहा गया है.

आठ जिलों में रेड अलर्ट

भारतीय मौसम विभाग ने पथनमथिट्टा, कोट्टायम, एर्नाकुलम, इडुक्की, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में रेड अलर्ट जारी किया है. अलप्पुझा, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है.

बारिश और बाढ़ से बेहाल असम, राहत अभियान तेज

असम का भी बाढ़ से बुरा हाल है. राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पांच दिवसीय दौरे पर ऊपरी असम के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा ले रहे हैं. उन्होंने शिवसागर स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी परिसर में बनाए गए राहत शिविर का निरीक्षण किया. इस शिविर में 162 परिवारों के 563 लोग रह रहे हैं. इनमें 35 बच्चे, 267 पुरुष और 261 महिलाएं शामिल हैं. मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को शिविरों में पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों, महिलाओं तथा बुजुर्गों के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए.

मृतकों के परिवारों को पांच लाख की अतिरिक्त सहायता

हिमंत बिस्वा सरमा ने बाढ़ में जान गंवाने वाले 10 लोगों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से पांच-पांच लाख रुपये के चेक सौंपे. इससे पहले राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत मृतकों के परिवारों को चार-चार लाख रुपये दिए जा चुके हैं. इस प्रकार प्रत्येक प्रभावित परिवार को कुल नौ लाख रुपये की सहायता मिल रही है.

नौ अगस्त से शुरू होगा नुकसान का सर्वे

मुख्यमंत्री ने बताया कि चार बाढ़ प्रभावित जिलों में स्थायी नुकसान का आकलन करने के लिए नौ अगस्त से सर्वे शुरू किया जाएगा. सर्वे पूरा होने के बाद घरों, फसलों, संपत्तियों और आजीविका को हुए नुकसान के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा.

ट्रैक्टर और रबर की नाव से पहुंचे प्रभावित इलाकों में

मुख्यमंत्री ने राजाबाड़ी, दिहिरगांव, धाई अली-दरीखाट, काकपथार-कुकुरपुहिया और बनमुख समेत कई प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया. उन्होंने रबर की नाव से पनबेचा, हातिमुरिया, बेतेना, धूपाबोरिया, तातीपथार और लुरुकी जैसे पानी से घिरे इलाकों में पहुंचकर स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं.

शिक्षण संस्थानों में भी भारी नुकसान

हिमंत बिस्वा सरमा ने शिवसागर गर्ल्स कॉलेज और फुलेश्वरी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के बाढ़ प्रभावित परिसरों का निरीक्षण किया. उन्होंने अधिकारियों को शिक्षण संस्थानों में जल्द सामान्य स्थिति बहाल करने और भविष्य में कृत्रिम बाढ़ की समस्या कम करने के लिए जमुना क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए. (इनपुट-एएनआई)

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