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पाकिस्तान पर मेहरबान US, सैन्य सहायता के 68 करोड़ डॉलर मंजूर, क्या है लिंक-16 तकनीक जिससे मजबूत होगा F-16 विमान

US 686 million dollar F-16 technology support Pakistan: यूएस ने पाकिस्तान के एफ-16 लड़ाकू विमानों के लिए 686 मिलियन (68.6 करोड़) डॉलर के उन्नत तकनीक व सहायता पैकेज को मंजूरी दे दी है. इस पैकेज में लिंक-16 सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपडेट, प्रशिक्षण और व्यापक लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं. इसकी मदद से अब पाकिस्तान को अपनी वायु सेना की क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलेगी.

अमेरिका और पाकिस्तान के बीच सैन्य संबंध में अब गर्मजोशी बढ़ती जा रही है. ट्रंप प्रशासन के विदेश विभाग ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमानों के लिए 686 मिलियन (68.6 करोड़) डॉलर के उन्नत तकनीक व सहायता पैकेज को मंजूरी दे दी है. इस बात की पुष्टि अमेरिकी डिफेंस सिक्योरिटी कोऑपरेशन एजेंसी (DSCA) द्वारा 8 दिसंबर को कांग्रेस को भेजे गए पत्र में की गई है. इस प्रस्ताव को अमेरिका संसद में भेज दिया गया है, जहां 30 दिनों की चर्चा और समीक्षा प्रक्रिया से गुजरने के बाद ही लागू होगा. इस पैकेज में लिंक-16 सिस्टम, क्रिप्टोग्राफिक उपकरण, एवियोनिक्स अपडेट, प्रशिक्षण और व्यापक लॉजिस्टिक सहायता शामिल हैं. इसकी मदद से अब पाकिस्तान को अपनी वायु सेना की क्षमता को बढ़ाने में मदद मिलेगी. इस पैकेज से वह एक्सरसाइज और ट्रेनिंग में इंटरऑपरेशन (अंतरसंचालन) को मजबूत कर सकेगा और विमानों की सर्विस लाइफ को भी 2040 तक विस्तारित किया जा सकेगा.

अमेरिका की नीति और सुरक्षा रणनीति से जुड़ा निर्णय

अमेरिकी DSCA के पत्र में इस प्रस्तावित सौदे का कारण स्पष्ट किया गया है. पत्र में लिखा है कि यह सौदा- अमेरिका की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा उद्देश्यों का समर्थन करेगा, क्योंकि इससे पाकिस्तान को चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियानों और भविष्य की आकस्मिक सैन्य जरूरतों में अमेरिकी व साझेदार बलों के साथ इंटरऑपरेबिलिटी बनाए रखने में मदद मिलेगी. पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन के अनुसार, यह सौदा पाकिस्तान के F-16 बेड़े को आधुनिक बनाने और परिचालन सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के उद्देश्य से भी किया जा रहा है. पत्र में कहा गया है कि यह पैकेज- ब्लॉक-52 और मिड लाइफ अपग्रेड F-16 बेड़े को अपडेट और रीफर्बिश कर पाकिस्तान की क्षमता को वर्तमान और भविष्य के खतरों का सामना करने योग्य बनाएगा.

लॉकहीड मार्टिन प्रमुख ठेकेदार

DSCA के पत्र के अनुसार पाकिस्तान इस तकनीक को अपनाने में सक्षम है. उसने अपनी सैन्य क्षमताओं को बनाए रखने की प्रतिबद्धता दिखाई है और वह इस उपकरण और सेवाओं को आसानी से अपनी सशस्त्र सेनाओं में शामिल कर सकेगा. इस पत्र में यह भी जोड़ा गया है कि प्रस्तावित उपकरण की बिक्री क्षेत्र में सैन्य संतुलन को प्रभावित नहीं करेगी. इस सौदे के लिए लॉकहीड मार्टिन कंपनी (फोर्ट वर्थ, टेक्सास) को प्रमुख ठेकेदार बनाया गया है.

पाकिस्तान अमेरिका सैन्य सहयोग, भारत-रूस दोस्ती के दरमियान

पाकिस्तान और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग का लंबा इतिहास रहा है. हालांकि ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में यह थोड़ा डगमगाया हुआ था, जब उन्होंने पाकिस्तान को दी जाने वाली सैन्य सहायता निलंबित कर दी थी. हालांकि अब नए अपग्रेड पैकेज से पाकिस्तान को अपनी सैन्य क्षमता को दुरुस्त करने में मदद मिल सकती है. वहीं इस नए पैकेज के पीछे भारत के ऑपरेशन सिंदूर की वजह से पड़ी मार से पाकिस्तान बुरी तरह कराह रहा है. इसके साथ ही भारत और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी भी अमेरिका की आंखों में चुभती नजर आ रही है. हाल ही पुतिन के भारत दौरे पर अमेरिकी मीडिया में इस पर काफी चर्चाएं हुईं.

पाकिस्तान ने इस सैन्य अपग्रेड का स्वागत किया है. इससे वह अपनी सैन्य क्षमता को मजबूत कर सकता है. DSCA की इस मदद पर अमेरिकी सांसदों ने सवाल भी उठाए. विशेषकर उसकी आतंकवाद के खिलाफ ढुलमुल रवैये को लेकर. हालांकि डीएससीए ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह पैकेज केवल वर्तमान बेड़े के मेनटेनेंस और अपग्रेड के लिए दिया जा रहा है. इससे नए विमान खरीद नहीं हो सकेगी.

अमेरिका के 686 मिलियन डॉलर रक्षा मदद की लागत का ब्योरा

DSCA के अनुसार इस बिक्री को लागू करने के लिए अमेरिका को पाकिस्तान में अतिरिक्त सरकारी या ठेकेदार कर्मियों को तैनात करने की आवश्यकता नहीं होगी. इस सौदे से अमेरिकी रक्षा तत्परता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा. कुल सौदे की अनुमानित कीमत 686 मिलियन डॉलर है, जिसमें 37 मिलियन डॉलर  के 92 Link-16 डेटा लिंक सिस्टम और 6 निष्क्रिय (इनर्ट) Mk–82 500-पाउंड बम बॉडी (इनमें विस्फोटक नहीं होगा और ये केवल परीक्षण के लिए उपयोग होंगे) प्रमुख रक्षा उपकरण (MDE) होंगै. वहीं 649 मिलियन डॉलर अन्य रक्षा उपकरण शामिल हैं.

Link-16 क्या है?

लिंक-16 एक उन्नत, सुरक्षित और रीयल-टाइम कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और इंटेलिजेंस (C3I) सिस्टम है, जिसे अमेरिका और NATO बल उपयोग करते हैं. यह दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से भी सुरक्षित रहता है. यह युद्धक्षेत्र में निगरानी, पहचान, एयर कंट्रोल, हथियार तैनाती समन्वय और सभी सहयोगी बलों के बीच दिशा-निर्देश जैसी महत्वपूर्ण क्षमताएँ उपलब्ध कराता है.

649 मिलियन डॉलर के उपकरणों में क्या-क्या है

गैर-MDE में AN/APQ-10C सिंपल की लोडर्स,. AN/APX-126 एडवांस्ड IFF (Identification Friend or Foe) सिस्टम, ऑपरेशनल फ्लाइट प्रोग्राम व अनिवार्य एवियोनिक्स अपडेट के लिए हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर, KY-58M और KIV-78 क्रिप्टोग्राफिक उपकरण (NSA-प्रमाणित), सुरक्षित संचार, प्रिसिजन नेविगेशन सिस्टम, ज्वाइंट मिशन प्लानिंग सिस्टम, मिसाइल अडैप्टर यूनिट्स (ADU-981), स्पेयर पार्ट्स, रिपेयर पार्ट्स, तकनीकी दस्तावेज, प्रकाशन, फुल-मोशन सिमुलेटर, प्रशिक्षण उपकरण व स्टाफ प्रशिक्षणऔर लॉजिस्टिक और प्रोग्राम सपोर्ट शामिल है.

क्यों आया यह सौदा?

पाकिस्तान के पास माना जाता है कि फिलहाल 75 एफ-16 हैं. यह 1980 से उसकी सेना का हिस्सा हैं. पाकिस्तान ने 2021 में F-16 अपग्रेड की मांग की थी, लेकिन दोनों देशों के तनावपूर्ण संबंधों के कारण देरी हुई. पाकिस्तान इस सैन्य विमान के बेड़े को लेकर आधुनिक चुनौतियों का सामना कर रहा है. इस नई मदद से अब पाकिस्तान F-16 के कम्यूनिकेश को अपग्रेड कर सकेगा, साथ ही सेंसर सिस्टम को भी दुरुस्त कर सकेगा.

वहीं अमेरिका के साथ ही पिछले दिनों पाकिस्तान ने चीन के साथ भी नजदीकी बढ़ाई है. पाकिस्तान पहले जैसा निर्भर नहीं है, क्योंकि उसने अन्य लड़ाकू प्लेटफॉर्म खरीदे और विकसित किए हैं. इनमें चीन का जे-10 सी विमान भी है. अमेरिका की विदेश और राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियों को समर्थन देने से पाकिस्तान अपने F-16 बेड़े को सुरक्षित और प्रभावी तरीके से संचालित कर सके. वहीं पाकिस्तान के सैन्य आधुनिकीकरण से दक्षिण एशिया में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.

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