
आजीविका सेवा केंद्र के माध्यम से 16 गांवों की लगभग 1200 महिला किसान दीदियों को घर-घर पहुंचकर सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इन सेवाओं में कृषि सामग्री, बायो संसाधन, टूल बैंक, ब्रुडिंग, कोल्ड चेन, मुर्गी दाना, हैचिंग, हल्दी प्रसंस्करण तथा मंडिया प्रसंस्करण इकाइयों का समावेश है। योजना के तहत उन्नत सब्जी उत्पादन, मुर्गीपालन, हल्दी की खेती, गेंदा फूल की खेती जैसी आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। आईएफसी का मुख्य उद्देश्य महिला किसान दीदियों को तीन से चार आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उन्हें लखपति बनाना है, जिससे उनकी आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित हो सके।
शुभारंभ कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती कश्यप ने कहा, यह केंद्र न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगा। कार्यक्रम में जनपद पंचायत के बीपीएम, एसी, संकुल पदाधिकारी, आईएफसी एंकर, सीनियर सीआरपी बिहान, समस्त कैडर समूह की दीदियां तथा तकनीकी सहयोगी संस्था प्रदान के आशीष एवं विकास सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। यह पहल बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों में सतत विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी, जो ग्रामीण आजीविका को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।









