
छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसियेशन के अध्यक्ष संजय सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश के समस्त निजी वि. वि. द्वारा संचालित व्यवसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु शुल्क का निर्धारण छत्तीसगढ़ निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्था (प्रवेश का विनियमन एवं शुल्क का निर्धारण) अधिनियम, 2008 के अंतर्गत गठित प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति, रायपुर के माध्यम से ही किया जाना सुनिश्चित करें।
ठाकुर ने बताया की इस संबंध में प्रवेश एवम फीस विनियामक समिति के पूर्व अध्यक्ष रिटायर्ड जज श्री प्रभात शास्त्री ने दिनांक 13 सितंबर 2024 को निजि विश्वविद्यालय विनियामक आयोग को पत्र जारी कर बताया था कि छत्तीसगढ़ के सभी निजि विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया जाता है, कि वे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के शुल्क का निर्धारण संबंधित समिति से ही कराये तथा इस कार्यालय को आवश्यक रूप से अवगत कराये,
इसके पश्चात छग के समस्त निजि वि.वि. को स्पष्ट आदेश छग निजी विश्व विद्यालय विनियामक आयोग, द्वारा दिनांक 23-6-2025 के पत्र के माध्यम से पहले ही दे चुका है, लेकिन शासन का भ्रष्ट तंत्र यह होने नहीं दे रहा। जब भी मांग उठती है ,शासन के साथ मार्गदर्शन लेने का खेल शुरु हो जाता है।
ठाकुर ने बताया की AFRC चेयरमैन द्वारा लिखा जा चुका है , कि फीस तय करना AFRC के अंतर्गत आता है। निजि विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के सचिव ने सभी निजि विश्वविद्यालयो के कुलसचिवों को लिख दिया कि फीस AFRC से ही तय कराना है, और तो और तकनीकी शिक्षा संचालनालय ने भी मंत्रालय को स्पष्ट प्रतिवेदन दे दिया है,कि फीस AFRC ही तय करेगी।
अब इतना सब कुछ हो जाने के पश्चात शासन को स्पष्ट चेतावनी के साथ दिशा निर्देश जारी कर भ्रष्ट गतिविधि पर रोक लगानी चाहिये।
संजय ठाकुर ने बताया की सन् 2008 में केंद्र शासन के निर्देश पर देश के सभी राज्यों में प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति AFRC का गठन हुआ था जिसका मूल उद्देश्य राज्य के सभी निजी व शासकीय विश्वविद्यालय में संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रमों जैसे – MBA,B.E, Pharmacy B.Tech ,B.Ed., M.Ed., M.C.A, B.P.Ed, M.P.Ed. B.Arch की फीस तय करना था। दुःखद है की आज 18 साल भी यह लागू नहीं हो पा रहा है।
संजय ठाकुर ने कहा की एक लंबे समय से छात्र मांग करते आ रहे हैं कि व्यवसायिक पाठ्यक्रमों के शुल्क निर्धारण प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता एवं विधिसम्मत व्यवस्था सुनिश्चित की जाये लेकिन लाखों छात्रों से जुड़े इस विषय को प्रशासनिक प्रक्रिया में उलझाकर वर्षों से छात्रों का शोषण जारी है। अगर छात्र आंदोलित हो गये तो छग को जंतर मंतर बनते देर नहीं लगेगी।
संजय सिंह ठाकुर
अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ आरटीआई एक्टिविस्ट एसोसियेशन









