
बीजापुर जिले में ग्रामीण आजीविका संवर्धन के उद्देश्य से महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत प्राथमिकता के साथ आजीविका डबरी के कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। आजीविका डबरी निर्माण से न केवल जल संरक्षण एवं जल संवर्धन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि किसानों को सिंचाई की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है। जिले के कई हितग्राही डबरी निर्माण के बाद नियमित आय प्राप्त कर आर्थिक समृद्धि की ओर अग्रसर हो रहे हैं।
ऐसी ही एक प्रेरक सफलता की कहानी है जनपद पंचायत भोपालपटनम की ग्राम पंचायत पेगड़ापल्ली के निवासी दुब्बा निलैया की। निलैया ने अपनी कृषि भूमि में आजीविका डबरी का निर्माण कर लगभग 60 हजार रुपये की अतिरिक्त वार्षिक आमदनी अर्जित की है।
श्री दुब्बा निलैया को ग्राम पंचायत की बैठक में जानकारी मिली कि महात्मा गांधी नरेगा योजना के अंतर्गत छोटे किसानों की निजी भूमि पर आजीविका डबरी का निर्माण किया जाता है। योजना की जानकारी मिलने पर उन्होंने अपनी 2 एकड़ कृषि भूमि में डबरी निर्माण का निर्णय लिया और ग्राम पंचायत में आवेदन प्रस्तुत किया।
तत्पश्चात उनके खेत में 2 लाख 99 हजार रुपये की लागत से डबरी स्वीकृत हुई और कार्य शीघ्र प्रारंभ किया गया। डबरी निर्माण कार्य के दौरान 43 जॉब कार्डधारी परिवारों के 240 श्रमिकों को रोजगार मिला जिससे कुल 1359 मानव दिवस का सृजन हुआ।
डबरी बनी आय का मजबूत आधार- डबरी निर्माण के पश्चात निलैया ने धान की फसल के बाद उद्यानिकी फसलों के रूप में बरबट्टी, बैंगन, मूली एवं मिर्च की खेती की इससे उन्हें लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी प्राप्त हुई साथ ही उन्होंने डबरी में मछली पालन के लिए मछली बीज का संचयन किया जिससे मछली पालन से भी लगभग 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई।
इस प्रकार आजीविका डबरी ने दुब्बा निलैया के लिए आय का स्थायी एवं मजबूत आधार तैयार किया है। उनकी यह सफलता कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है जो महात्मा गांधी नरेगा योजना के माध्यम से अपनी आजीविका सुदृढ़ कर आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा सकते हैं।









