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मैनपाट महोत्सव 2026ः प्रकृति, संस्कृति और विकास का संगम

छत्तीसगढ़ी लोकगायक एवं स्थानीय प्रतिभाओं ने बिखेरा हुनर का जलवा
भोजपुरी मशहूर गायक ने मनोज तिवारी की प्रस्तुतियों ने बाँधा समां
भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने भोजपुर गीतों के साथ साथ छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट सज रहा है जिले के विकास कार्यों की सौगात का किया उल्लेख

अंबिकापुर 14 फरवरी 2026/  सरगुजा जिले के पर्यटन स्थल मैनपाट के रोपाखार जलाशय के समीप आयोजित तीन दिवसीय मैनपाट महोत्सव 2026 का शुभारंभ भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और विकास की प्रतिबद्धता के संदेश के साथ हुआ। प्रकृति की गोद में आयोजित इस महोत्सव ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, स्थानीय प्रतिभाओं और राज्य सरकार की विकासपरक सोच का सशक्त प्रदर्शन किया।

महोत्सव के विशेष आकर्षण के रूप में आमंत्रित  सुप्रसिद्ध भोजपुरी गायक मनोज तिवारी ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों में ओ राजा जी ऐकरे त रहल हो हां जरूरत महूरत खुबसूरत हो और रिंकिया के पापा गीतों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने लोकप्रिय भोजपुरी गीतों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट सज रहा है गीत में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा जिले को प्रदान की गई 500 करोड़ से अधिक की विकास कार्यों की सौगातों का उल्लेख करते हुए,राज्य सरकार की विकासपरक नीतियों की सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया हमको आज लग रहा है गीत से अभिवादन किया। विकास और संस्कृति के इस संगम ने दर्शकों में उत्साह का संचार किया और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही विशेष धूम
महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर कला, परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों ने अपनी विविध प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को भव्य और यादगार बना दिया। प्रत्येक प्रस्तुति ने दर्शकों को एक अलग सांस्कृतिक अनुभव प्रदान किया और पूरे आयोजन स्थल को उत्साह, उमंग और तालियों की गूंज से भर दिया।

रिदम व्हिसल रॉक बैंड की ऊर्जावान शुरुआत कार्यक्रम का शुभारंभ रिदम व्हिसल रॉक बैंड द्वारा लोकप्रिय बॉलीवुड गीतों की आकर्षक प्रस्तुति से हुआ। बैंड के सधे हुए वादन, आधुनिक संगीत संयोजन और जोशपूर्ण अंदाज़ ने शुरुआत से ही माहौल को जीवंत बना दिया। युवा दर्शकों में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

आयुष नामदेव की भावपूर्ण गायकी ने अपनी मधुर एवं सुरीली आवाज़ से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनकी प्रस्तुति में सुर, लय और भावनाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिला। गीतों की प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने  मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे और अंत में जोरदार तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।

’ओडिसी नृत्य की गरिमा ’ विधि सेन गुप्ता ने ओडिसी नृत्य की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर शास्त्रीय नृत्य की उत्कृष्टता को मंच पर जीवंत किया। उनकी सधी हुई मुद्राएँ, आकर्षक वेशभूषा और अभिव्यक्ति की गहराई ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की समृद्धि का अनुभव कराया। प्रत्येक भाव में अनुशासन और सौंदर्य का अद्भुत संतुलन दिखाई दिया।

कथक की मनमोहक प्रस्तुति आनंदिता तिवारी एवं रित्विका बनर्जी ने कथक नृत्य की शानदार प्रस्तुति दी। पांवों की सटीक थाप, सुंदर गति और ताल के साथ सामंजस्य ने शास्त्रीय नृत्य की गरिमा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। दर्शकों ने उनकी प्रस्तुति को भरपूर सराहा।

’‘शिव तांडव’ बना विशेष आकर्षण’आंचल पांडे द्वारा प्रस्तुत ‘शिव तांडव’ कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहा। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति, सशक्त भावाभिव्यक्ति और नृत्य की तीव्र लय ने पूरे पंडाल को भक्ति और शक्ति के भाव से ओत-प्रोत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान दर्शकों ने तालियों से उनका स्वागत किया।

गीत-संगीत से सुरमय हुआ वातावरण अमित दास, संतोष जायसवाल एवं अश्विका दास ने विविध गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में मधुरता घोल दी। उनकी गायकी में लोक और आधुनिकता का सुंदर मेल देखने को मिला, जिससे सभी आयु वर्ग के दर्शकआनंदित हुए।

भोजपुरी लोक रंग- भोजपुरी गायिका शीतल यादव ने अपनी सशक्त और प्रभावशाली आवाज़ से लोक संस्कृति की छटा बिखेरी। उनकी प्रस्तुतियों में ग्रामीण जीवन की झलक और लोकधुनों की मिठास स्पष्ट दिखाई दी, जिसने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

छत्तीसगढ़ी लोकधुनों की गूंज लोकगायक सुनील सोनी की प्रस्तुति पर दर्शक विशेष रूप से उत्साहित दिखाई दिए। उनकी लोकधुनों और पारंपरिक गीतों ने स्थानीय संस्कृति की आत्मा को मंच पर साकार कर दिया। मोर छाइयां भुइयां की प्रस्तुति पर दर्शक  झूमते और साथ गुनगुनाते नजर आए।

’छऊ नृत्य की रोमांचक प्रस्तुति’कार्यक्रम में प्रस्तुत छऊ नृत्य ने रोमांच और ऊर्जा का संचार किया। पारंपरिक परिधानों, मुखौटों और सशक्त शारीरिक मुद्राओं के साथ कलाकारों ने वीरता और लोकगाथाओं का प्रभावशाली मंचन किया। यह प्रस्तुति दर्शकों के लिए अत्यंत आकर्षक और रोमांचकारी रही।

स्वप्नील जायसवाल की दमदार प्रस्तुति ने जीता दर्शकों का दिल-सरगुजा संभाग ही नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुके स्वप्नील जायसवाल ने मैनपाट महोत्सव के प्रथम दिवस स्थानीय कलाकार के रूप में अपनी शानदार प्रस्तुति दी। सरगुजा अंचल से निकलकर मुंबई में अपनी गायकी की धाक जमाने वाले स्वप्नील ने मंच पर अपनी सशक्त एवं प्रभावशाली आवाज़ से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

पर्यटन संवर्धन और स्थानीय प्रतिभाओं को मंच
मैनपाट महोत्सव का उद्देश्य न केवल सांस्कृतिक संरक्षण एवं संवर्धन है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर का मंच प्रदान करना और पर्यटन को बढ़ावा देना है। राज्य शासन के प्रयासों से मैनपाट क्षेत्र में अधोसंरचना विकास एवं पर्यटन सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिलेगी।

मैनपाट महोत्सव सरगुजा की सांस्कृतिक विविधता, प्राकृतिक सौंदर्य और विकास की नई दिशा का प्रतीक बना है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित नागरिकों की सहभागिता ने आयोजन के शुभारंभ को ऐतिहासिक बनाया।

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