
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ अपनी याचिका पर सुनवाई से पहले सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत , न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ मोस्तरी बानू और टीएमसी सांसदों डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन की तीन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी.
सूत्रों ने कहा कि एलएलबी की डिग्री धारक मुख्यमंत्री बनर्जी सुनवाई में उपस्थित होकर अपनी दलीलें पेश कर सकती हैं. बनर्जी ने यह याचिका 28 जनवरी को दायर की थी. इस मामले में उन्होंने निर्वाचन आयोग (ईसी) और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पक्ष बनाया था. बनर्जी ने इससे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को पत्र लिखकर चुनाव से पहले राज्य में जारी “मनमाने और खामियों से भरे” एसआईआर को रोकने का आग्रह किया था.
पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को विभिन्न निर्देश जारी करते हुए कहा था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी को असुविधा नहीं होनी चाहिए.
ममता ने कविताओं के माध्यम से किया एसआईआर का विरोध
एसआईआर के खिलाफ जारी राजनीतिक और कानूनी लड़ाई के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विरोध का एक अनूठा रूप अपनाया और इस मुद्दे पर 26 कविताएं लिखी हैं. बनर्जी ने ‘एसआईआर: 26 इन 26’ नामक पुस्तक लिखी है जिसमें ‘पैनिक’ (घबराहट), ‘डूम’ (विनाश), ‘मॉकरी’ (उपहास), ‘फाइट’ (लड़ाई), ‘डेमोक्रेसी’ (लोकतंत्र) और ‘हू इज टू ब्लेम’ (दोष किसे दें) शीर्षक वाली कविताएं उल्लेखनीय हैं. इस पुस्तक का विमोचन 22 जनवरी को 49वें अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में हुआ.
पुस्तक की प्रस्तावना में बनर्जी ने इसे ‘विनाशकारी खेल में अपनी जान गंवाने वालों’ को समर्पित किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगाल के लोगों पर ‘निरंतर भय का अभियान’ चलाया गया है. वह लिखती हैं कि ये कविताएं ‘प्रतिरोध की भावना’ से उत्पन्न होती हैं.





