Thursday, January 26

अज्ञात बीमारी से मौत की खबर के बाद चिकित्सा दलों ने किया बस्तर क्षेत्र का दौरा

बीजापुर/नारायणपुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर और नारायणपुर जिले में कथित रूप से अज्ञात बीमाारी से 39 लोगों की मौत की खबर के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने इन क्षेत्रों का दौरा किया है तथा शिविर आयोजित कर ग्रामीणों की जांच की है. जिलों के अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.

अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच से जानकारी मिली है कि बीजापुर जिले में स्थित दो गांवों में पिछले वर्ष जून से अब तक 12 लोगों की मौत हुई है, वहीं नारायणपुर के दो गांवों में 13 लोगों की मौत हुई है. हालांकि यह मौत उम्र से संबंधित बीमारियों, प्राकृतिक कारणों तथा अन्य कारणों से हुई है न कि किसी विशेष बीमारी या किसी अज्ञात बीमारी से.

बीजापुर जिले के कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने बताया कि कुछ स्थानीय मीडिया ने खबर जारी किया था कि अबूझमाड़ में इंद्रावती नदी के दूसरी तरफ स्थित गांवों – बैल (धर्मा), पेठा और मर्रामेटा (बीजापुर) तथा रेंगावाया और पिदियाकोट (नारायणपुर) में 39 लोगों की मौत हो गई है और खबर के बाद 23 सितंबर को वहां चिकित्सा दल भेजा गया था. कटारा ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट में 39 मौतों का आंकड़ा बताया जा रहा है, लेकिन 32 मृतकों की एक सूची मीडियार्किमयों ने उपलब्ध कराई थी, जिसमें 15 मामले बीजापुर के गांवों के थे और शेष नारायणपुर के थे.

मीडिया से जानकारी मिलने के बाद राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की नाव पर सवार होकर दोनों जिलों के स्वास्थ्य दल ने 23 सितंबर को नदी पार किया और इन गांवों में तीन दिन रुक कर ग्रामीणों की चिकित्सीय जांच की और उनका उपचार किया .
कलेक्टर ने बताया कि मौतों के बारे में मीडिया रिपोर्टों का सत्यापन किया गया, जिसमें जानकारी मिली कि मर्रामेटा में नौ और बैल में तीन लोगों की मौत पिछले साल जुलाई से इस वर्ष सितंबर तक हुई है, लेकिन उन सभी की मौत उस कारण से नहीं हुई, जैसा कि दावा किया जा रहा था.

उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की मृत्यु उम्र से संबंधित समस्याओं, दिल का दौरा, निमोनिया, तपेदिक सहित विभिन्न कारणों हुई है.
कलेक्टर ने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया कि ये मौतें पिछले दो-तीन महीनों में हुई है. कटारा ने कहा कि बीजापुर के चिकित्सा दलों ने क्षेत्र के पांच गांवों में खांसी, जुकाम, बुखार से पीड़ित 610 लोगों का इलाज किया और उनमें से कोई भी गंभीर रूप से बीमार नहीं पाया गया.

उन्होंने बताया कि इसी तरह, नारायणपुर के स्वास्थ्य दलों ने पिछले चार महीनों में रेकावाया गांव में 10 और पिदियाकोट में तीन लोगों के मौत की पुष्टि कई कारणों से की, जिनमें उम्र से संबंधित बीमारियां, डूबने से मृत्यु, आत्महत्या और कमजोरी आदि शामिल है.
नारायणपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) देवेश कुमार ध्रुव ने बताया कि चिकित्सा दलों की जांच से जानकारी मिली है कि दो गांवों में पिछले चार महीनों में हुई मौतें ज्यादातर प्राकृतिक कारणों से हुई हैं और प्रथम दृष्टया किसी अज्ञात बीमारी का कोई संकेत नहीं है. हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि चार गांवों में इन 25 मौतों में से चार मृतकों के शरीर पर सूजन होने की सूचना है और यह विभिन्न कारणों से हो सकता है.

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