
08 लाख रुपये की लागत से निर्मित भवन में बच्चों को मिला सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधायुक्त वातावरण
रायपुर, 05 अगस्त 2026/मुंगेली जिले के ग्राम पंचायत बछेरा में मनरेगा के अंतर्गत निर्मित आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक-04 का नया भवन ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर बाल विकास और मातृ-शिशु सेवाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। लगभग 08 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह भवन अब गांव के नौनिहालों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ, आकर्षक और सुविधायुक्त वातावरण उपलब्ध करा रहा है। नए भवन के निर्माण से पहले आंगनबाड़ी केन्द्र सीमित सुविधाओं वाले भवन में संचालित होता था, जिसके कारण बच्चों के बैठने, खेलने, पोषण आहार वितरण तथा शैक्षणिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं था। अब आधुनिक भवन मिलने से इन समस्याओं का समाधान हुआ है और आंगनबाड़ी की गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा रहा है।
भवन को विशेष रूप से बच्चों के अनुकूल बनाया गया है। दीवारों पर फल-सब्जियां, अक्षर ज्ञान, रंग-बिरंगे चित्र और बाल शिक्षा से संबंधित आकर्षक पेंटिंग बनाई गई हैं। सुंदर एवं मनमोहक वातावरण से बच्चों में आंगनबाड़ी आने के प्रति उत्साह बढ़ा है। खेल-आधारित गतिविधियों और प्रारंभिक शिक्षा के लिए पर्याप्त स्थान मिलने से बच्चों के सीखने की रुचि को भी बढ़ावा मिल रहा है। नया आंगनबाड़ी भवन अब केवल पोषण आहार वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, प्रारंभिक शिक्षा, खेल गतिविधियों, स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण तथा मातृ-शिशु परामर्श का महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है। गर्भवती एवं धात्री माताओं को भी यहां नियमित रूप से स्वास्थ्य, पोषण एवं देखभाल संबंधी जानकारी प्रदान की जा रही है।
मनरेगा के माध्यम से निर्मित इस भवन ने ग्रामीण विकास की दोहरी तस्वीर प्रस्तुत की है। निर्माण कार्य से स्थानीय श्रमिकों को रोजगार मिला, वहीं गांव को बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए एक स्थायी और उपयोगी सामुदायिक परिसंपत्ति प्राप्त हुई। यह निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन के साथ शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में मनरेगा की उपयोगिता को दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले आंगनबाड़ी में बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन नए भवन के बनने से बच्चों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिला है। दीवारों पर बने रंगीन शैक्षणिक चित्र बच्चों को आकर्षित करते हैं और उनमें सीखने की रुचि बढ़ी है। इससे अभिभावकों का आंगनबाड़ी केन्द्र के प्रति विश्वास भी मजबूत हुआ है।









