
पटना । बिहार विधानसभा चुनाव के जैसे-जैसे रुझान सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे इतिहास खुद को दोहराने लग गया है। इस बार के चुनाव में भी कुछ ऐसा ही दिख रहा है। हाल ही में वोटिंग के बाद से आए तमाम एग्जिट पोल्स में एनडीए को 140-150 सीटें मिलने का अनुमान जताया था। कुछ ने थोड़ा और आगे बढ़कर 160 तक जीतने का अनुमान लगाया था। मगर, परिणाम कुछ और ही कह रहे हैं, ज्यादातर एग्जिट पोल्स के अनुमान फेल होता दिख रहे हैं।
बहुमत के आंकड़े से काफी आगे निकला एनडीए
बिहार में इस बार मुख्य मुकाबला नीतीश कुमार की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले विपक्षी महागठबंधन के बीच है। वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में जुटी हुई थी। राज्य में कुल 243 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 122 है। मतगणना के शुरुआती रुझानों में एनडीए को करीब-करीब 190 सीटें मिलती दिख रही हैं। ऐसे में ज्यादातर एग्जिट पोल्स जिनमें एनडीए को 140-150 सीट का अनुमान लगाया था वो सभी गलत साबित हो गए।
इस बार रिकॉर्ड वोटिंग
बिहार चुनाव में इस बार वोटिंग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त हो गए हैं। शाम पांच बजे तक 67.14 फीसदी वोटिंग हुई थी। 2000 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान 62.57 फीसदी मतदान हुआ था। वहीं, 1998 के लोकसभा चुनाव में 64.6 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो राज्य में सर्वाधिक मतदान का रिकॉर्ड था जो इस बार टूट गया है।
बीते 3 चुनावों में गलत साबित हुए थे एग्जिट पोल
पिछले 3 विधानसभा चुनावों (2010, 2015, 2020) के एग्जिट पोल्स के रुझान बताते हैं कि सर्वे एजेंसियां वोटर्स का मूड ठीक से पकड़ नहीं पाईं। 2015 में ज्यादातर एग्जिट पोल्स ने एनडीए यानी भाजपा+ को बढ़त दी थी, जबकि नतीजों में महागठबंधन (आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस) ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया। वहीं, 2020 में तस्वीर उलट रही। इस बार कई एजेंसियों ने महागठबंधन की जीत का अनुमान लगाया, लेकिन परिणामों में एनडीए ने 125 सीटें जीतकर सरकार बनाई। यानी ज्यादातर पोल्स फिर गलत साबित हुए।





