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एम्स में मल्टी मॉडलिटी ट्रीटमेंट बना स्तन कैंसर से जंग जीतने का हथियार, मरीजों ने बताए अनुभव

शिमला । हिमाचल के बिलासपुर का एम्स मल्टीमॉडलिटी ट्रीटमेंट से स्तन कैंसर पर जीत हासिल करने वाली तीन महिलाओं ने कार्यक्रम में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे स्तन कैंसर का पता चलने के बाद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और परिवार और एम्स के विशेषज्ञों की मदद से उन्होंने इस बीमारी पर जीत हासिल की। इस दौरान कैंसर से जंग लड़ने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया। एम्स बिलासपुर में मंगलवार को कैंसर पर विजय, स्तन कैंसर विजेताओं की गाथा कार्यक्रम ने हर किसी को भावुक कर दिया। तीन महिलाओं की जीवन यात्रा ने यह साबित कर दिया कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर भी हिम्मत, समय पर इलाज और आधुनिक चिकित्सा पद्धति से पूरी तरह विजय प्राप्त की जा सकती है। एम्स बिलासपुर के चिकित्सा ऑन्कोलॉजी एवं हीमेटोलॉजी विभाग की पहल पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यातिथि चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) दिनेश वर्मा रहे। तीनों ही महिलाएं स्तन कैंसर की मरीज थीं। खास बात यह है कि सभी की रिकवरी एक साल से भी कम समय में हुई है।
तीनों मरीजों का उपचार मल्टीमॉडलिटी ट्रीटमेंट से किया गया। यानि सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन का संयोजन। इस विधि में कैंसर की प्रकृति और स्टेज के अनुसार इलाज का क्रम तय किया जाता है। नियमित फॉलोअप से इन महिलाओं की सेहत लगातार बेहतर हो रही है। महिलाओं ने कहा कि जैसे ही उनको बीमारी का पता चला, उन्होंने सबसे पहले अपनी हिम्मत को और मजबूत किया। तय किया कि इस बीमारी से लड़कर जिंदगी को जीना है। इसमें जहां परिवार का साथ उन्हें मिला, उतना ही साथ इलाज करने वाली टीम का रहा। विशेषज्ञों ने उनके उपचार के लिए मल्टीमॉडलिटी ट्रीटमेंट को चुना। एक साल के अंदर ही इन्होंने इस बीमारी को हरा दिया।
चिकित्सा ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. प्रवेश धीमान ने कहा कि स्तन कैंसर की समय पर जांच से उपचार के बेहतर परिणाम मिलते हैं, खासकर ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी सुविधा बढ़ाना जरूरी है।
वहीं, विकिरण ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. मुनिंदर कुमार ने बताया कि उपचार के दौरान मानसिक सहयोग उतना ही जरूरी है जितना शारीरिक इलाज। शल्य ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. चित्रेश शर्मा ने कहा कि हर कैंसर विजेता की यात्रा साहस से शुरू होती है और दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है। डॉ. मृदुल खन्ना ने कहा कि डॉक्टर की जिम्मेदारी केवल इलाज तक सीमित नहीं, बल्कि मरीज को फिर से सामान्य जीवन में लौटाने तक होती है। एमएस डॉ. दिनेश कुमार वर्मा ने कहा कि एम्स बिलासपुर कैंसर उपचार, अनुसंधान और शिक्षण के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है।

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