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कम जल खपत वाली धान की नई किस्म एमटीयू 1156 एवं 1153 से अधिक उपज – कीट एवं व्याधि के प्रति प्रतिरोधी फसल

धमतरी । प्राकृतिक संसाधनों से परिपूर्ण एवं रत्नागर्भा कहलाने वाला जिला धमतरी वनों से आच्छादित है तथा इसे नैसर्गिक संपदा का वरदान प्राप्त है। महानदी के उद्गम स्थल के रूप में प्रसिद्ध यह जिला सुनिश्चित सिंचाई क्षेत्र के विस्तृत रकबे के लिए भी जाना जाता है। मेहनतकश किसानों द्वारा खरीफ एवं रबी दोनों मौसम में बड़े पैमाने पर धान की खेती की जाती है। धान फसल के लिए उपयुक्त जलवायु एवं उपजाऊ भूमि के कारण इस जिले को ‘धनहा धमतरी’ के नाम से भी जाना जाता है।
कृषि के क्षेत्र में निरंतर प्रगति के साथ-साथ भूमिगत जल स्रोतों के संरक्षण की आवश्यकता भी बढ़ी है। चूंकि जिले में बड़े पैमाने पर धान की पैदावारी की जाती है, जिससे जल की अधिक खपत होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने कम जल खपत वाली नई धान की किस्में विकसित की हैं।
जिला धमतरी में एमटीयू श्रृंखला की दो नई किस्में – एमटीयू 1153 (चन्द्रा) एवं एमटीयू 1156 (तरंगिनी) – किसानों को प्रदर्शन फसल के रूप में उपलब्ध कराई गई हैं।
एमटीयू 1153 (चन्द्रा)
एमटीयू 1153 किस्म को वर्ष 2015 में विकसित किया गया। यह मध्यम अवधि की किस्म है, जो लगभग 115 से 120 दिनों में पककर तैयार होती है। इसकी पौध की ऊँचाई कम तथा तना मजबूत होने के कारण फसल गिरने (लॉगिंग) की संभावना नगण्य होती है। यदि फसल गिर भी जाए तो जल अंकुरण की समस्या नहीं होती। इसमें दो सप्ताह की सुसुप्ता अवस्था का गुण पाया जाता है। यह ब्लास्ट एवं भूरा माहू जैसी प्रमुख बीमारियों के प्रति प्रतिरोधी है। अनुकूल परिस्थितियों में इसकी औसत उपज 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक प्राप्त की जा सकती है।
एमटीयू 1156 (तरंगिनी)
एमटीयू 1156, जिसे वर्ष 2015 में राइस रिसर्च स्टेशन मरूतेरू द्वारा विकसित किया गया, मध्यम अवधि की उच्च उपज देने वाली किस्म है। इसके दाने लंबे, पतले तथा उच्च प्रसंस्करण गुणवत्ता वाले होते हैं, जिससे टूटने की संभावना कम रहती है। यह किस्म 115 से 120 दिनों में पक जाती है तथा तना मजबूत होने से फसल गिरने की संभावना कम रहती है। यह भी ब्लास्ट एवं भूरा माहू रोगों के प्रति प्रतिरोधी है। इसकी औसत उपज 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पाई जाती है।
विक्रम टीसीआर
विक्रम टीसीआर किस्म उच्च पैदावारी के लिए विकसित की गई है, जिसकी उत्पादन क्षमता 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म 125 से 130 दिनों में पकती है, कम पानी की आवश्यकता होती है तथा कीट-व्याधियों के प्रति प्रतिरोधी है।
कृषक अनुभव
विकासखण्ड धमतरी के ग्राम झिरिया में कृषक श्री धमेन्द्र कुमार चन्द्राकर के खेत में नई किस्म एमटीयू 1156 का प्रदर्शन प्लॉट तैयार किया गया। उप संचालक कृषि द्वारा निरीक्षण कर कृषकों को आवश्यक समसामयिक सलाह प्रदान की गई।
कृषक श्री चन्द्राकर ने बताया कि इस किस्म की खेती आसान है तथा कीट-व्याधि का प्रकोप कम होने से कृषि लागत में कमी आती है। यह उच्च उपज देने वाली फसल है तथा प्रति एकड़ 28 से 30 क्विंटल तक उपज मिलने की संभावना है।

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