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बस्तर में ई-ऑफिस और कर्मयोगी पोर्टल पर अधिकारियों ने लिया प्रशिक्षण

जगदलपुर, 12 फरवरी 2026/ राज्य शासन के निर्देशानुसार बस्तर जिले में शासकीय कामकाज को पूरी तरह आधुनिक और पेपरलेस बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम उठाया गया है। कलेक्ट्रेट स्थित प्रेरणा सभा कक्ष में गुरूवार को जिला प्रशासन द्वारा आयोजित विशेष प्रशिक्षण शिविर में अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल कार्यप्रणाली के नए दौर से जोड़ा गया। यह पहल केवल कागजी फाइलों को कंप्यूटर स्क्रीन पर लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासन में जवाबदेही, पारदर्शिता और गति सुनिश्चित करने का एक महा-अभियान है। कलेक्टर कार्यालय की इस मुहिम के तहत ई-ऑफिस प्रणाली को लागू कर फाइलों के पुराने दौर को पीछे छोड़ते हुए अब त्वरित निर्णय लेने की संस्कृति विकसित की जा रही है, जिससे आम जनता के कार्यों का निपटारा बिना किसी विलंब के संभव हो सकेगा।
इस महत्वपूर्ण सत्र में शासन द्वारा नामांकित मास्टर ट्रेनर्स ने ई-ऑफिस के साथ-साथ प्रशासन के अन्य डिजिटल स्तंभों जैसे स्पैरो, ई-एचआरएमएस और आईजीओटी कर्मयोगी पोर्टल के सूक्ष्म पहलुओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। ई-ऑफिस के माध्यम से जहाँ फाइलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी, वहीं स्पैरो पोर्टल के जरिए अधिकारियों के वार्षिक कार्य मूल्यांकन की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर उसे अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी बनाया गया है। इसी कड़ी में ई-एचआरएमएस पोर्टल का उपयोग कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्त जानकारी को डिजिटल स्वरूप देने के लिए किया जाएगा, जिससे अवकाश प्रबंधन से लेकर सेवा पुस्तिका के संधारण तक के कार्य सुगम हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त मिशन कर्मयोगी के तहत आईजीओटी पोर्टल के माध्यम से सरकारी सेवकों की दक्षता बढ़ाने और उन्हें निरंतर नवीन कौशल सिखाने पर जोर दिया गया, ताकि वे बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रख सकें।
प्रशासनिक सुगमता को ध्यान में रखते हुए इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम को दो सुनियोजित चरणों में संपन्न किया गया। सुबह की पहली पाली में कलेक्ट्रेट की विभिन्न शाखाओं, संयुक्त जिला कार्यालय, नगर निगम जगदलपुर और जिला पंचायत बस्तर के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जबकि दोपहर के दूसरे सत्र में जिले के अन्य सभी विभागों के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। इस समग्र डिजिटल बदलाव का दूरगामी प्रभाव सरकारी कामकाज की गुणवत्ता पर पड़ेगा, जहाँ अब भौतिक फाइलों के रखरखाव का बोझ कम होगा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पेपरलेस कामकाज एक मील का पत्थर साबित होगा। बस्तर प्रशासन की यह सक्रियता न केवल फाइलों के निपटारे में तेजी लाएगी, बल्कि शासन और प्रशासन के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को भी एक नई गति प्रदान करेगी।

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