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रेबीज से बचाव को लेकर स्वास्थ्य अमले का एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित

समय पर उपचार और टीकाकरण से शत-प्रतिशत रोका जा सकता है रेबीज-विशेषज्ञ
राज्य शासन के दिशा-निर्देशानुसार एवं  कलेक्टर   मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिले में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत रेबीज जैसी घातक बीमारी की रोकथाम एवं प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में यह प्रशिक्षण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आरोग्यम् सभाकक्ष में संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण में मास्टर प्रशिक्षक के रूप में मेडिकल कॉलेज से डॉ. आनंद मसीह लकड़ा, डॉ. जितेन्द्र नायक तथा पुसौर विकासखंड से डॉ. कलेश्वर राठिया ने चिकित्सा अधिकारियों, नर्सिंग स्टाफ, औषधि वितरकों (फार्मासिस्टों) एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को रेबीज से बचाव एवं रोकथाम की विस्तृत जानकारी दी।  इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी (महामारी विशेषज्ञ) डॉ. कल्याणी पटेल, रामकुमार जांगड़े, एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के जिला डेटा प्रबंधक जानकी देवांगन सहित जिले के समस्त विकासखंडों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
मास्टर प्रशिक्षकों ने बताया कि रेबीज एक शत-प्रतिशत घातक रोग है, किंतु कुत्ता, बंदर, बिल्ली अथवा अन्य जानवरों के काटने के बाद घाव की तत्काल एवं समुचित साफ-सफाई, एंटी-रेबीज टीका तथा इम्यूनोग्लोबुलिन का समय पर उपयोग कर इससे शत-प्रतिशत बचाव संभव है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रेबीज रोग के लक्षण, प्राथमिक उपचार, पशु काटने के पश्चात् निवारक उपचार, टीकाकरण अनुसूची, दवाइयों का समुचित प्रबंधन, प्रकरण पंजीयन, संदर्भन प्रणाली एवं आंकड़ा प्रविष्टि की विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान निर्देशित किया गया कि जिले की सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर) एवं निजी स्वास्थ्य केंद्रों में संस्था प्रमुख द्वारा एक नोडल अधिकारी नामित किया जाए। साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) में जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रेबीज टीके की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पशु काटने के प्रत्येक मामले में त्वरित एवं मानक उपचार प्रदान करने के निर्देश दिए गए।
इसके अतिरिक्त अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय जैसे घेराबंदी, बाउंड्रीवाल, प्रवेश द्वार एवं अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता संबंधी गतिविधियों को प्रभावी रूप से लागू करने पर भी विशेष जोर दिया गया। जन-जागरूकता एवं सूचना, शिक्षा एवं संप्रेषण गतिविधियों के अंतर्गत सभी स्वास्थ्य संस्थानों में रेबीज रोकथाम, कुत्ते के काटने पर प्राथमिक उपचार एवं एंटी-रेबीज टीके की उपलब्धता से संबंधित पोस्टर एवं श्रव्य-दृश्य सामग्री प्रदर्शित की जा रही है। डॉग बाइट से बचाव के लिए हेल्पलाइन नंबर 1100 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है, वहीं स्वास्थ्य संबंधी अन्य जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क किया जा सकता है।

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