
रायपुर पुलिस ने कुछ लड़कांे को पकड़ा जिन्होंने तीन-चार जगह चाकूबाजी कर दी। पीड़ित में एक आध की जान को भी खतरा हो गया है।
पुलिस ने इन्हें अच्छी तरह धुना और कोर्ट के बाद जेल भिजवा दिया।
ये एक सच्ची कहानी है।
अब आगे की सच्ची कहानी सुनिये जो इन पर लागू नहीं होती पर किसी और पर लागू है। इन लड़कों ने पिटाई के बाद बाहर आकर मुफलिसी में दिन गुजारने शुरू किये।
इन्हें मोहल्ले में कोई काम भी नहीं देता था। पैसे की तंगी थी। इन्होंने ईधर-उधर उधार मांगना शुरू कर दिया।
बहुत मुश्किल से एक बड़े आदमी की सिफारिश पर इनमें से एक को कुछ पैसे उधर मिल गये। सबने सोचा अब ये इन पैसों से छोटा-मोटा व्यापार करेगा। ठेला लगाएगा। घर संभालेगा। मां-बाप को संभालेगा।
पर उस लड़के ने सबसे पहला काम ये किया कि उन उधार के पैसों से एक बढ़िया सा बड़ा सा बटनदार चाकू आॅनलाईन मंगवाने का आर्डर दे दिया।
बस आगे की कहानी यहां इन लड़कों पर लागू नहीं होती। ये कहानी लागू होती है पाकिस्तान पर।
आपरेशन सिंदूर से तबाह पाक
फिर से बसाने तत्पर आतंक
7 मई की रात को भारत ने आॅपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के 9 आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया।
इसके बाद पाकिस्तान बेचारगी सा मुंह लेकर दुनिया के आगे उधार के लिये गुहार लगाने लगा। यहां-वहां, जहां आशा दिखी वहां हाथपैर जोड़े पर किसी ने मदद नहीं की।यहां तक कि विश्व के मुस्लिम समाज ने, मुस्लिम देशों ने भी पाक को अंगूठा दिखा दिया।
अंततः अमेरिका की सिफारिश से विश्व बैंक से पाक को लोन मिल गया। क्यांेकि हमको उंगली करने के लिये अमरीका पाक का इस्तेमाल करता ही है।
पाक को नया लोन मिला तो विश्व को लगा कि अब खाद्यसामग्री, दूध, शिक्षण सामग्री और जीने के लिये जरूरी सबकुछ अपनी जनता के लिये उपलब्ध कराएगा पाकिस्तान। पर ये क्या…. उसने पैसे लगाने की शुरूआत, बर्बाद हुए आतंकी संगठनों को फिर से खड़ा करने में लगाकर की।
इन आतंकी ठिकानों के दुरूस्त करने के लिये पाक ने इसके आकाओं को सौ करोड़ रूप्ये दे दिये।
इसे कहते हैंे कुत्ते की दुम। जो कभी सीधी नहीं होती। बर्बादी के कगार पर पहुंच जाने के बाद भी पाकिस्तान सुधर नहीं रहा है। वो शायद भूल गया है कि आॅपरेशन सिंदूर समाप्त नहीं हुआ है।
आॅनलाईन चाकू मंगवाने में
कोरियर वालों का क्या दोष
मंदिर हसौद के पेट्रोल पम्प कर्मी पर चाकू से हमला करने वाले लड़के ने चाकू आॅनलाईन मंगवाया था।
इस पर पुलिस ने लड़कों को तो पकड़ा ही, आॅनलाईन माल भेजने वाली ई-काॅमर्स कंपनी और पहुंचाने वाली कोरियर कंपनी को भी आरोपी बनाया है।
यहां प्रश्न ये उठता है कि जिसे कंपनी ने माल भेजा है उसे तो पता है कि उसने क्या माल भेजा है मगर कोरियर वाले को क्या पता कि उसने जो पार्सल पहुंचाने की जवाबदारी ली है उसके अंदर क्या है ? कोरियर कंपनी का काम तो बस पैसे लेकर पार्सल पहुंचाने तक सीमित है।
अफसोस है कि पुलिस ने बिना मेहनत किये केवल खानापुर्ति करने के लिये केस में अपनी प्रगति दिखाने के लिये आनन-फानन में कोरियर कंपनी को भी लपेट लिया। दिखता यही है कि भविष्य में वे इस जंजाल से छूट जाएंगे।
लेकिन सालों तक चलने वाले इस केस में कोरियर कंपनी के तीन कर्मचारियों का दम जरूर निकल जाएगा। वाह रे इंसाफ की पैरोकार पुलिस…. निर्दोष लोगों को भी सजा का इंतजाम कर दिया। पता नहीं क्या हासिल होगा इससे उन्हें…. ?
————————–
जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’









