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तालिबान के बड़े हमले से कांपा पाकिस्तान! ‘सबूतों का पिटारा’ लेकर UN से भारत-अमेरिका तक जाएगा जुल्म और नाकेबंदी का डोजियर

पाकिस्तान और अफगान तालिबान के रिश्तों में जबरदस्त तनाव बढ़ गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, काबुल ने पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन, आर्थिक नाकेबंदी और शरणार्थियों के मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगाते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की तैयारी कर ली है.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्ते वैसे भी आसान नहीं रहे हैं. लेकिन अब मामला एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है. अफगान तालिबान सरकार पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कूटनीतिक हमला करने की तैयारी में है. काबुल ने एक विस्तृत डोजियर तैयार किया है, जिसमें पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने, अफगानिस्तान पर आर्थिक दबाव बनाने और अफगान नागरिकों व शरणार्थियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं. यह डोजियर दुनिया के ताकतवर देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं तक पहुंचाने की योजना है.

Taliban Pakistan Dossier in Hindi: डोजियर किसने बनाया और आगे क्या प्रक्रिया है?

सीएनएन-न्यूज18 से जुड़े काबुल के वरिष्ठ सूत्रों के अनुसार, यह डोजियर अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने मिलकर तैयार किया है. फिलहाल इसे तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्ला अखुंदजादा की मंजूरी का इंतजार है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही अंतिम स्वीकृति मिलती है, यह दस्तावेज क्षेत्रीय और वैश्विक ताकतों को भेज दिया जाएगा.

Taliban Pakistan Dossier in Hindi: पाकिस्तान पर सबसे गंभीर आरोप क्या लगाए गए हैं?

डोजियर में पाकिस्तान को सीधे तौर पर आतंकियों के लिए सुविधा केंद्र बताया गया है. अफगान तालिबान सरकार का आरोप है कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान इलाके में ISIS के तत्वों को पनपने दिया जा रहा है और इन्हें अफगानिस्तान, भारत और ईरान जैसे पड़ोसी देशों को अस्थिर करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. काबुल का दावा है कि इन आरोपों को साबित करने के लिए उसके पास ठोस सबूत मौजूद हैं.

ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस पर क्या कहा गया?

डोजियर में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) पर भी सीधे आरोप लगाए गए हैं. अफगान तालिबान सरकार के अनुसार, ये एजेंसियां ISIS और अन्य आतंकी संगठनों को लॉजिस्टिक मदद और आर्थिक सहयोग दे रही हैं. काबुल का कहना है कि यही संगठन पूरे क्षेत्र में बढ़ती हिंसा और असुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं. इतने कड़े आरोपों के बीच भी तालिबान सरकार ने यह साफ किया है कि वह पाकिस्तान के साथ सुरक्षा से जुड़े मुद्दों और द्विपक्षीय रिश्तों पर बातचीत के लिए तैयार है. हालांकि, काबुल का कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा मांगें अवैध, गैर-कानूनी और व्यवहार में असंभव हैं.

अफगान नागरिकों और शरणार्थियों को लेकर क्या शिकायत है?

डोजियर में पाकिस्तान पर अफगान नागरिकों और शरणार्थियों के साथ अमानवीय व्यवहार करने का आरोप लगाया गया है. अफगान सरकार के मुताबिक, पाकिस्तान ने बिना किसी ठोस वजह के पिछले दो महीनों से सीमा पार आवाजाही और अफगान ट्रांजिट व्यापार को रोक रखा है. इसके अलावा, अफगानिस्तान के भारत के साथ ट्रांजिट व्यापार को भी लंबे समय से बाधित किया जा रहा है, जबकि अफगानिस्तान एक स्थलरुद्ध देश है.

अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देकर क्या कहा गया?

तालिबान सरकार ने 1965 के ‘लैंड-लॉक्ड देशों के ट्रांजिट व्यापार’ से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते का हवाला दिया है. डोजियर में कहा गया है कि अफगानिस्तान को पाकिस्तान और ईरान जैसे पड़ोसी देशों के जरिये बिना रोक-टोक व्यापार करने का अधिकार है. काबुल का आरोप है कि पाकिस्तान की मौजूदा नीतियां अफगानिस्तान पर आर्थिक नाकेबंदी जैसी हैं. डोजियर के मुताबिक, पाकिस्तान मेडिकल और स्टूडेंट वीजा रद्द कर रहा है. साथ ही अफगान नागरिकों, शरणार्थियों और पख्तूनों के साथ बदसलूकी, अपमान और प्रताड़ना की जा रही है. अफगान सरकार का यह भी कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना के बड़े पैमाने पर लोगों को देश से बाहर निकाला जा रहा है.

संकट के समय में कार्रवाई पर सवाल

काबुल का आरोप है कि यह सब ऐसे वक्त में हो रहा है, जब अफगानिस्तान गंभीर मानवीय संकट से गुजर रहा है. देश हाल ही में आए दो बड़े भूकंपों से हुए नुकसान से उबरने की कोशिश कर रहा है और बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा किया जा रहा है. ऐसे समय में शरणार्थियों को जबरन लौटाना अमानवीय है. तालिबान सरकार का कहना है कि पाकिस्तान पुनर्वास के इस दौर में शरणार्थियों को वापस भेजकर संयुक्त राष्ट्र के नियमों और मानवीय समझौतों का उल्लंघन कर रहा है. डोज़ियर में अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की गई है कि वह पाकिस्तान पर दबाव बनाए ताकि वह अंतरराष्ट्रीय कानून और लोकतांत्रिक मानकों का पालन करे.

इन देशों और संस्थाओं तक पहुंचेगा मामला

अफगान अधिकारियों के अनुसार, अंतिम मंजूरी के बाद यह डोज़ियर संयुक्त राष्ट्र और उसकी सहयोगी एजेंसियों के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस, चीन, ईरान, भारत, कतर, तुर्की, सऊदी अरब, यूएई, अरब देशों, मध्य एशियाई देशों और अन्य मुस्लिम देशों को भेजा जाएगा. कुल मिलाकर, काबुल इस लड़ाई को सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि इसे वैश्विक मंच पर ले जाने की पूरी तैयारी कर चुका है.

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