
6 और 7 मई की बीच की रात हमला भारत का इतनी चतुराई से किया गया कि पाकिस्तान को न उगलते बन रहा है न निगलते।

आतंकवादियो के ठिकानों को नेस्तनाबूत किया जा रहा है। पाक अंदर ही अंदर विचलित हो रहा है पर बोल कुछ नहीं सकता। कुछ बोला तो उस पर विश्व में आतंक को संरक्षण का ठप्पा लगा।बेचारगी की हालत में है। अपने ही भाई-बंधुओं की बर्बादी पर आंसू भी नहीं बहा पा रहा। 90 आतंकियों के मरने की खबर आई है, गिनती अभी जारी है।
आधा दम तो डर से ही निकल गया थाबण्डलबाज फिल्म में राजेश खन्ना एक गपोड़ी युवक था। काॅलेज की हीरोईन से प्यार करता था, वो भी करती थी। रंजीत भी था विलेन। बाॅक्सिंग चैंपियन। हीरोईन के सामने हीरो को चैलंेज करता है कि लड़ ले। हीरोईन के सामने चैलेंज। हीरो को बात दिल पर लग गयी। रिंग में उतर गया। दोनों बाॅक्सर तैयार। रंजीत बीच में खड़ा और राजेश खन्ना उसके चारों ओर चक्कर लगाने लगा। मारता नहीं था। हीरोईन ने कहा ‘मारो उसे, ये क्या कर रहे हो’। हीरो बोला ‘विरोधी को थका रहा हूं’।चक्कर काटते-काटते राजेश खन्ना हांफ गया। रंजीत बीच में खड़ा अपना सर खुजाने लगा कि ये कर क्या रहा है। हांफ-हांफ कर राजेश खन्ना के पसीने छूट गये। भारत ने पाक को थका दियाभारत से पाक को अटैक की उम्मीद थी और हुआ भी। अब उसने राहत की सांस ली कि वो भागना है तो भागेगा, रोना है तो रोएगा। युद्ध के बाद जो करना है करेगा। पर इस बीच इंतजार करते-करते उसकी जान निकल रही थी। मुसीबत से अधिक मुसीबत का डर मार डालता है। भारत सामने कुछ भी नहीं कर रहा था और पाकिस्तान भारतनाट्यम करता नजर आ रहा था कि कब मारेगा, कब मारेगा। भारत तो मार ही नहीं रहा था। राजेश खन्ना रंजीत से नहीं जीत पाया पर नीति ठीक थी दुश्मन को थकाने की। भारत ने भी पाक को थका दिया है। असमंजस मंे डाल दिया था कि मार क्यों नहीं रहा। अब मारा भी तो पाकिस्तान न हंस पा रहा और चाहकर भी रो भी नहीं पा रहा।
————————–जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषकमोबा. 9522170700‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’——————————–







