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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा:दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है।

इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा- वे कहते थे, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे में क्या लिखा, ये पढ़ने से पहले ये कार्टून देखिए…

प्रधान ने इस्तीफे को लेकर चिट्ठी पोस्ट की। दो पेज और 575 शब्दों में लिखी इस चिट्ठी में प्रधान ने बाकी बातों के साथ दो जगह युवाओं को भ्रमित करने की बात भी लिखी। चिट्ठी का यह हिस्सा नीचे हाइलाइट किया गया है।

12 साल में पहली बार विरोध के बाद इस्तीफा

2014 में पहली बार मोदी सरकार बनने के बाद 12 साल के कार्यकाल में धर्मेंद्र प्रधान पहले मंत्री हैं, जिन्हें विरोध के चलते इस्तीफा देना पड़ा है। हालांकि, इससे पहले 2018 में विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने इस्तीफा दिया था, लेकिन तब दुनियाभर में ‘मी टू’ आंदोलन चल रहा था और अकबर पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे।

दीपके बोले- कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है

जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी दो और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं। जिन बच्चों ने सुसाइड किया, उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिसवालों पर एक्शन हो।

दिल्ली पुलिस अधिकारी याद रखें कि उन्होंने कॉकरोच से पंगा लिया है। हमने तो एक मंत्री का इस्तीफा ले लिया, तो तुम लोग क्या चीज हो। छात्रों पर केस वापस होने चाहिए। भैया, ये लोकतंत्र है। मुझे एक महीने से लोग कहते थे- क्या कर रहे हो, कब तक बैठोगे, ये इस्तीफा नहीं देंगे। ये मनमानी सरकार है, लेकिन हमने कर दिखाया।

वांगचुक बोले- ये लोकतंत्र की जीत

सोनम वांगचुक ने अस्पताल से किए पोस्ट में लिखा- यह लोकतंत्र की जीत है, प्रत्यक्ष लोकतंत्र… सड़कों से मिली जीत। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और GenZ को बधाई। देश के हर कोने से उठ खड़े होने के लिए सभी नागरिकों को धन्यवाद।

भागवत के बयान के 4 घंटे बाद आया प्रधान का इस्तीफा

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार सुबह दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था, ‘हम मनमानी करेंगे, शक्ति से सबके मालिक बनेंगे, ऐसा नहीं हो सकता।’

भागवत ने कहा था- आज की नई पीढ़ी बहुत सारे सवाल पूछती है। हमें आदेश देने की बजाय उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्हें हर बात के पीछे का तर्क समझाना चाहिए, न कि आदेश देना चाहिए। संवाद के जरिए ही उन्हें सही दिशा दिखाई जा सकती है।

भागवत का बयान आने के 4 घंटे बाद ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया।

कल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के 47 अफसर बर्खास्त हुए थे

शुक्रवार रात NEET पेपर लीक मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारी बर्खास्त किए गए थे। बर्खास्त अधिकारियों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज करने की बात भी कही गई। एक दिन पहले सरकार ने गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय के दो सचिवों को बदला था।

दीपके ने क्यों कहा- BJP कहती थी, हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते

जून 2015 में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि हमारे यहां इस्तीफे नहीं होते हैं। यह UPA सरकार नहीं है। दरअसल, भाजपा सरकार पर भगोड़े ललित मोदी की गुपचुप तरीके से मदद करने के आरोप लगे थे। तब सुषमा स्वराज विदेश मंत्री थीं। कांग्रेस ने कहा कि ललित मोदी एक भगोड़ा अपराधी है, लेकिन सरकार उसकी मदद कर रही है। ऐसे में विदेश मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।

एमजे अकबर का भी आरोप के बाद इस्तीफा हुआ था

2018 में ‘मी टू’ आंदोलन चल। उस समय एम.जे. अकबर विदेश राज्य मंत्री थे। आंदोलन के दौरान कई महिला पत्रकारों ने उन पर पत्रकारिता के दिनों में यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। जब यह विवाद बहुत ज्यादा बढ़ गया और सरकार पर दबाव बढ़ा, तब अक्टूबर 2018 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

29 साल पहले पेपर लीक मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान ने भी विरोध प्रदर्शन किया था। प्रधान के सहयोगी रहे प्रशांत राउत ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि 1997 में ओडिशा में एक पेपर लीक हुआ था, तब प्रधान ने प्रदर्शन किया था। इसमें करीब 1,500 छात्र शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज कर दिया था। धर्मेंद्र प्रधान को बुरी तरह पीटा गया था। उनके शरीर में कई जगह चोटें आईं और फ्रैक्चर भी हुआ था।

मौजूदा पेपर लीक रोकने का कानून, 4 पॉइंट

  1. जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं।
  2. कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया।
  3. NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम लागू किया। इसमें पेपर लीक, मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी को सजा के दायरे लाया गया।
  4. ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, इनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है। पहला- पेपर लीक वगैरह करने पर 3 से 5 साल की सजा और 10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। दूसरा- एग्जाम करवाने वाली संस्था या एजेंसी के डायरेक्टर या मैनेजमेंट के ऑफिसर्स ने कोई अपराध किया, तो 3 से 10 साल तक की जेल और एक करोड़ का जुर्माना हो सकता है।
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