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जेलेंस्की के सबसे ताकतवर सहयोगी का इस्तीफा… कौन हैं एंड्री यरमक, जिनके जाने से यूक्रेन में मची हलचल

यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के करीबी सहयोगी एंड्री यरमक के इस्तीफे से राजनीतिक उथल-पुथल मची है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख के रूप में यरमक की भूमिका अहम थी। उनके इस्तीफे से जेलेंस्की सरकार पर असर पड़ सकता है और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका है।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री यरमक ने शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारियों द्वारा उनके घर पर छापेमारी के बाद उन्हें अपने पद से हटना पड़ा। यह पूरा मामला 100 मिलियन डॉलर के किकबैक घोटाले से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।

एंड्री यरमक यूक्रेन के दूसरे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माने जाते थे और रूस के आक्रमण के दौरान कूटनीति व शांति वार्ताओं के प्रमुख चेहरा थे। उन्होंने विदेशी संपर्कों का प्रबंधन किया और कीव में आने वाले नेताओं की मेजबानी की। इसके अलावा वे सैन्य एवं राजनयिक समर्थन के लिए राष्ट्रपति के साथ अंतरराष्ट्रीय मिशनों पर भी गए।

कौन हैं एंड्री यरमक?

एंड्री यरमक का जन्म कीव में हुआ। यरमक ने टारस शेवचेंको नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय निजी कानून की पढ़ाई की। इसके बाद 1997 में अपनी लॉ फर्म शुरू की। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत उन्होंने पार्टी ऑफ रीजन्स के सांसद और पूर्व ओलंपिक पहलवान एल्ब्रस टेडेयेव के कानूनी सलाहकार के रूप में की। इसके साथ ही उन्होंने मीडिया में भी कदम रखा, 2012 में उन्होंने गार्नेट मीडिया ग्रुप की स्थापना की। यह ग्रुप यूक्रेनी फिल्मों और टीवी प्रोजेक्ट्स पर काम करता था।

2020 में बने चीफ ऑफ स्टाफ

2011 में उनकी पहली मुलाकात जेलेंस्की से हुई, जब वे इंटर चैनल के जनरल प्रोड्यूसर थे। जेलेंस्की के राष्ट्रपति बनने के बाद यरमक को विदेश नीति सहायक बनाया गया। यरमक ने रूस के साथ कैदियों की अदला-बदली और अमेरिका के साथ संचार संभाला। इसके बाद 2020 में वे चीफ ऑफ स्टाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सदस्य बने।

रूस के 2022 के आक्रमण के बाद वे मानवीय मामलों के समन्वयक भी बने। अक्सर जेलेंस्की जैसी मिलिट्री स्टाइल पोशाक में नजर आने वाले यरमक को “ग्रीन कार्डिनल” का उपनाम मिला था। इसके बाद उन्हें लगभग सह-राष्ट्रपति, यूक्रेन का सबसे शक्तिशाली अनिर्वाचित व्यक्ति माना जाने लगा।

यमरक के जाने से क्या होगा असर?

बीते दिनों नेशनल एंटीकरप्शन ब्यूरो ने ऊर्जा क्षेत्र के घोटाले की जांच में उनके घर की तलाशी ली। जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दो मंत्रियों के इस्तीफे के बाद यह तीसरा बड़ा झटका है। क्योंकि, यरमक के जाने का यूक्रेन पर गहरा असर पड़ेगा। वे युद्धकालीन राजनीति के प्रवर्तक थे, जो आंतरिक अनुशासन बनाए रखते थे।

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