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4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस पर विशेष आलेख

*United by Unique: व्यक्ति-केंद्रित दृष्टिकोण से कैंसर देखभाल की नई कहानी*

आज 4 फरवरी विश्व कैंसर दिवस है। जिसकी थीम है “united by unique” जिसका मतलब है, कैंसर का हर अनुभव अनूठा (unique) होता है और एक ऐसी दुनिया बनाने के लिए हम सभी को एकजुट (united) होना होगा, जहाँ हम बीमारी से परे देखें और मरीज से पहले उस इंसान को समझें।

इस विश्व कैंसर दिवस पर, आइए कैंसर देखभाल के भविष्य को फिर से लिखने के लिए हम एक साथ आएं, एक ऐसा भविष्य जहाँ लोगों और समुदायों की जरूरतें सबसे ऊपर हों। #UnitedByUnique#

“कैंसर” केवल एक मेडिकल डायग्नोसिस या रोग की पहचान मात्र नहीं है। यह एक अत्यंत व्यक्तिगत मामला है। हर डायग्नोसिस के पीछे एक अनूठी मानवीय कहानी छिपी होती है। दुख दर्द, उपचार, लचीलेपन, प्रेम और बहुत कुछ की कहानियाँ। यही कारण है कि कैंसर देखभाल के लिए ‘पीपल सेंटर्ड’ (व्यक्ति केंद्रित) दृष्टिकोण, जो करुणा और सहानुभूति के साथ प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरी तरह से एकीकृत करता है, स्वास्थ्य के सर्वोत्तम परिणामों की ओर ले जाता है।

यह अभियान व्यक्ति-केंद्रित कैंसर देखभाल के विभिन्न आयामों और बदलाव लाने के नए तरीकों का पता लगाने के लिए एकजुट प्रयास है, जिसमें पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर का क्षेत्रीय कैंसर संस्थान, जो कि छत्तीसगढ़ का एकमात्र शासकीय कंप्रिहेंसिव कैंसर सेंटर है, यह जागरुकता बढ़ाने से लेकर कैंसर के ईलाज के लिए ठोस कदम के लिए प्रतिबद्ध है।

इस आयोजन के तहत आज संस्थान में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कार्यकम की शुरुआत सुबह जागरूकता रैली एवं मैराथन से किया जायेगा, उसके बाद विभाग में निःशुल्क कैंसर जाँच शिविर आयोजित है जो प्रातः 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक है।

क्षेत्रीय कैसर संस्थान रायपुर में कैंसर के इलाज की सम्पूर्ण सुविधा उपलब्ध है। यहाँ पर उच्चतम स्तर की कैंसर की सिकाई से लेकर कैंसर सर्जरी, कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, पैलिए‌टिव केयर, बाल्य एवं शिशु कैंसर केयर की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध है। सभी तरह के कैंसर मरीज, आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग से लेकर आर्थिक रूप से संपन्न वर्ग, प्रारंभिक अवस्था से लेकर अंतिम अवस्था तक के मरीज यहाँ निःशुल्क स्वास्थ लाभ लेते हैं।

यदि हम कैंसर आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2003 में नए मरीजों की संख्या 1601 थी, 2025 में बढ़कर लगभग 2 से 3 गुना, 35 सौ से 4 हजार तक हो गयी है। जहां 2003 में मात्र 3500 मरीज फ़ॉलोअप के लिए आते थे, अब लगभग ढाई लाख से 3 लाख मरीज आते हैं।

पहले विभाग में कैंसर सिकाई के लिए मात्र टेलीकोबाल्ट एवं ब्रेकीथेरेपी की सुविधा भर थी, आज अत्याधुनिक मशीन एवं तकनीक जैसे IMRT, IGRT, VMAT की सुविधा उपलब्ध है जिससे कैंसर की PINPOINT सिकाई की जाती है एवं शरीर की सामान्य ऊतकों का अधिक से अधिक सुरक्षा कर पाना संभव है। अभी कैंसर सिकाई के लिए आने वाले मरीजों की संख्या 475 प्रतिवर्ष से बढ़कर 25000 है। यह छत्तीसगढ़ का एकमात्र संस्थान है जहां इंटरस्टियल इम्प्लांट के माध्यम से ब्रेकीथेरेपी (BRACHYTHERAPY) की जाती है जिममें मुख एवं गले का कैंसर, पेनिल कैंसर (PENILE CANCER), सारकोमा इत्यादि प्रमुख हैं।

कैंसर में अधिकांश मरीज एडवांस अथवा अंतिम अवस्था में पहुंचते हैं, जिसमें कीमोथेरेपी अनिवार्य हो जाता है। संस्थान में 1 हज़ार से लेकर लाखों की कीमोथेरेपी, इम्यूनोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। इसमें सामान्य कीमोथेरेपी से लेकर, पॉलीमर बाउंड, नैनोपार्टिकल, पेगीलटेड फॉर्म सम्मिलित हैं। वर्ष 2003 में कीमोथेरेपी लेने वालों की संख्या मात्र 2055 थीं जो 2025 में बढ़कर लगभग 24000 प्रतिवर्ष हो गई है। इसके अलावा मरीजों को जरुरत के अनुरूप इम्यूनोथेरेपी, हार्मोनल थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी भी दी जाती हैं। चूँकि प्रत्येक मरीज अलग है, संस्थान का प्रयास रहता है उनका इलाज भी अनोखा हो।

कैंसर के प्रत्येक अवस्था में पैलिएटिव केयर की आवश्यकता होती है। पैलिएटिव केयर में सामान्य लक्षणों के निदान एवं उपचार के अलावा भावनात्मक सहयोग, सामजिक एवं पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता होती है जिसका ध्यान संस्थान में सभी अवस्था के मरीजों के लिए रखा जाता है। विभाग में पैलिएटिव केयर हेतु 30 बेड का अलग से वार्ड है. दर्द की श्रेणी के अनुसार मरीजों का इलाज किया जाता है, दर्दनिवारक के रूप में सामान्य पैरासिटामोल से लेकर वीक/स्ट्रांग ओपिओइड्स(WEAK/STRONG OPIOIDS), मॉर्फिन की सुविधा है। वर्ष 2003 में मात्र 1312 मॉर्फिन टेबलेट दी जाती थी जो 2025 में बढ़कर लगभग 20000 हो गयी।

वर्ष 2014 में विभाग में कैंसर सर्जरी की सुविधा है, प्रतिवर्ष लगभग 500 से 700 मरीजों की निःशुल्क सर्जरी की जाती है, यहाँ सामान्य सर्जरी के अलावा, मिनिमल इनवेसिव सर्जरी हाईपेक व पाईपेक (HIPAC, PIPAC) भी की जाती है।

बाल्य एवं शिशु कैंसर केयर कठिन है, उन मरीजों अलग रूप से विशेष केयर की जरुरत पड़ती जिसमें उनके मानसिक दशा, डाईट, नार्मल ग्रोथ का भी ध्यान रखना जरुरी होता है। विभाग में बाल्य एवं शिशु कैंसर हेतु वर्ष 2018 में, अलग से ओपीडी एवं वार्ड संचालित हैं, जहां उनका विशेष ध्यान रखा जाता है। अब तक लगभग 1000 मरीज स्वास्थ लाभ ले चुके हैं।

*कैंसर देखभाल: जागरूकता से इलाज तक*

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करीब 10 साल पहले (लगभग 2015) कैंसर को लेकर सार्वजनिक जागरूकता सीमित थी। लोग इस विषय पर खुलकर बात करने से डरते थे और समाज में इससे जुड़ी भ्रांतियां अधिक थी। उस समय कैंसर जांच (स्क्रीनिंग) के बारे में जानकारी कम थी, जिसके कारण जांच कराने वालों की संख्या भी सीमित रहती थी। जानकारी के मुख्य स्रोत डॉक्टर, टीवी और पोस्टर हुआ करते थे। इलाज को लेकर आम धारणा यह थी कि कैंसर का मतलब सिर्फ कीमोथेरेपी या रेडिएशन है। रोकथाम को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता था। सही और विस्तृत जानकारी का भी अभाव था।

इसके विपरीत आज की स्थिति में कैंसर को लेकर खुली चर्चा हो रही है। अब जल्दी पहचान और स्क्रीनिंग पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। जानकारी के स्रोतों में बड़ा बदलाव आया है। आज इंटरनेट और सोशल मीडिया प्रमुख माध्यम बन चुके हैं। इलाज के क्षेत्र में भी व्यापक प्रगति हुई है, जहाँ अब इम्यूनोथेरेपी और टारगेटेड थेरेपी जैसे आधुनिक विकल्प उपलब्ध हैं। रोकथाम को महत्वपूर्ण माना जाने लगा है, विशेष रूप से HPV वैक्सीनेशन और स्वस्थ जीवनशैली पर ज़ोर है। हालांकि जानकारी की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन इसके साथ ही गलत जानकारी और अफवाहें भी बढ़ी हैं, जो एक नई चुनौती के रूप में सामने आई हैं।

*डॉ. विवेक चौधरी, डीन. पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर*

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क्षेत्रीय कैंसर संस्थान में आधुनिक तकनीक, अनुभवी चिकित्सक दल और समग्र उपचार सुविधाओं के माध्यम से राज्य के प्रत्येक कैंसर मरीज तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाने का सतत प्रयास किया जा रहा है। कैंसर को लेकर किसी भी प्रकार की भ्रांतियों से दूर रहें, समय पर जांच कराएं, रोकथाम को अपनाएं और केवल प्रमाणित एवं विश्वसनीय चिकित्सा संस्थानों से ही जानकारी प्राप्त करें। जागरूकता, समय पर पहचान और सही इलाज ही कैंसर से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है।

*डॉ. संतोष सोनकर, अधीक्षक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय, रायपुर*

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*HPV वैक्सीनेशन:* 2015 में इसके बारे में जानकारी न के बराबर थी, लेकिन आज यह गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (Cervical Cancer) से बचाव के लिए एक सशक्त माध्यम बन चुका है। आज WHO की गाइडलाइंस हैं।

*टेलीमेडिसिन और ऐप्सः* आज मेटास्टेटिक कैंसर जैसी स्थितियों के लिए मरीज घर बेठे विशेषज्ञों से राय ले सकते हैं, जो 10 साल पहले संभव नहीं था।

*जीनोमिक टेस्टिंग:* अब इलाज सिर्फ वन साइज फिट्स ऑल’ नहीं रहा। पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के जरिए मरीज के जेनेटिक प्रोफाइल के आधार पर सटीक इलाज किया जा रहा है।

*गलत जानकारी (Infodemic):* जहाँ इंटरनेट ने जागरूक किया है, वहीं चमत्कारी घरेलू नुस्खों जैसे भ्रामक दावों ने जोखिम भी बढ़ाया है। हमेशा विश्वसनीय संस्थाओं की जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।

*लेखक :-*
*डॉ. प्रदीप चंद्राकर*
*प्रोफेसर क्षेत्रीय कैंसर संस्थान*

*डॉ. मंजूला बेक*
*विभागाध्यक्ष, क्षेत्रीय कैसर संस्थान*

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