बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिवसीय जागरूकता कार्यक्रमों की शुरुआत

जिला कलेक्टर   संबित मिश्रा के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की प्रथम वर्षगांठ पर द्वितीय चरण के रूप में 100 दिवसीय जन जागरूकता अभियान की शुरुआत की गई। बाल विवाह उन्मूलन को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से जिलेभर में व्यापक आउटरीच गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं।
अभियान का मुख्य लक्ष्य बच्चों, बालिकाओं, महिलाओं एवं समुदाय को बाल विवाह के दुष्परिणाम, उनके अधिकारों एवं सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाना है, ताकि जिले को बाल विवाह मुक्त बनाया जा सके। वर्ष 2025-26 में जिले की 40 प्रतिशत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त बनाना लक्ष्यित है।
तीन चरणों में जागरूकता अभियान, प्रथम चरण- स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, पोटाकेबिन, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और आंगनबाड़ी केंद्रों में जागरूकता शिविर। छात्र-छात्राओं, किशोरी बालिकाओं, गर्भवती एवं शिशुवती माताओं को योजनाओं और अधिकारों की विस्तृत जानकारी।
द्वितीय चरण- धार्मिक स्थलों एवं विवाह से संबंधित सेवा प्रदाताओं को बाल विवाह रोकथाम संबंधी कानूनी और सामाजिक जानकारी।
तृतीय चरण- ग्राम पंचायत एवं नगर पालिका वार्ड स्तर पर सामुदायिक जनजागरूकता कार्यक्रम।
सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों का क्षमतावर्धन प्रशिक्षण। अभियान के प्रमुख उद्देश्य -बाल विवाह उन्मूलन, लैंगिक समानता, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार, गरीबी उन्मूलन से जुड़े सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स 
SDGS को प्राप्त करना, बाल विवाह रोकथाम में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना।
योजनाओं और अधिकारों की जानकारी- जागरूकता शिविरों में महिलाओं और बालिकाओं को केंद्र एवं राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी दी जा रही है जिनमें प्रमुख हैं- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान, बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ, नोनी सुरक्षा योजना, सखी वन स्टॉप सेंटर, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, महतारी वंदन योजना, सक्षम महिला कोष से ऋण सुविधा, दहेज प्रतिषेध अधिनियम, टोनही प्रताड़ना अधिनियम, गुड टच-बैड टच जागरूकता, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 एवं महिला हेल्पलाइन 181 महिलाओं को बताया जा रहा है कि वे इन योजनाओं से किस प्रकार लाभान्वित होकर आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
सामुदायिक सहभागिता- अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, स्थानीय समुदाय, किशोरी बालिकाएँ, गर्भवती महिलाएँ, शिशुवती माताएँ सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं। साथ ही प्रतिभागियों को यह भी प्रेरित किया जा रहा है कि वे अपने आसपास के लोगों को शिक्षित कर बाल विवाह रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ। इस प्रकार 100 दिवसीय जन जागरूकता कार्यक्रम जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है।

 

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