
रायपुर, 9 सितम्बर 2025/ राज्य शासन के दिशा-निर्देशों के तहत नारायणपुर जिले में अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पूर्ण कर ली गई है। इसके परिणामस्वरूप अब जिले के दुर्गम और अबुझमाड़ क्षेत्र के विद्यालयों में भी शिक्षकों की कमी दूर हो गई है। काउंसलिंग प्रक्रिया के बाद नारायणपुर और ओरछा ब्लॉक के दूरस्थ विद्यालयों में गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित हो सकी है।
नारायणपुर जिले के 14 प्राथमिक और 15 पूर्व माध्यमिक शिक्षकविहीन विद्यालयों में अब शिक्षक पदस्थ कर दिए गए हैं। इनमें शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला मुरूमवाड़ा, प्राथमिक शाला जड्डा, धोबिनपारा, हिरंगई, ईकरभट्टी, तोयामेटा, गट्टाकाल, कस्तुरमेटा, मोहनार, गुमियाबेड़ा, ताड़ोबेड़ा, नेलांगुर, पुसालामा और पदमेटा जैसे दुर्गम क्षेत्रों के विद्यालय शामिल हैं। साथ ही उच्च प्राथमिक एवं आश्रम शालाओं जैसे जबगुण्डा, थुलथुली, रोहताड़, गोमागाल, कोंगे, आदेर, तोयनार, रेकावाया, लंका, जाटलूर, काकावाड़ा, छोटेटोण्डाबेड़ा, दुटाखार, पुंगारपाल, गारपा, पुसवालपारा, हितवाड़ा, कोडोनार, डुंगा, टाहकावाड़ा, आलवाड़ा, घोट और मरकाबेड़ा में भी शिक्षकों की नियुक्ति की गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी नारायणपुर ने बताया कि जिले में कुल 132 शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है, जिनमें हायर सेकेंडरी स्तर पर 1 व्याख्याता, पूर्व माध्यमिक स्तर पर 49 शिक्षक, प्राथमिक शाला में 10 प्रधानपाठक और 72 सहायक शिक्षक शामिल हैं। इसके बाद जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो गई है और नया शैक्षणिक सत्र पूर्ण शिक्षक स्टाफ के साथ प्रारंभ हो चुका है।
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया से न केवल विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी बल्कि शिक्षकों और अभिभावकों को भी राहत मिली है। पहले शिक्षकविहीन विद्यालयों के बच्चों को आसपास के स्कूलों से संलग्न शिक्षक भेजकर पढ़ाया जाता था, जिससे शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ जाता था। अब पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा और पालकों की चिंता भी समाप्त होगी।








