
*सीबीआई से जांच का विकल्प भी न्यायालय के पास सुरक्षित*
भिलाई स्थित यस बैंक में एक फर्जी खाता खुलवाकर उस खाते से करोड़ों रुपए के लेनदेन के मामले में अंततः छत्तीसगढ़ के उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 2 महीने का समय दिया कि वह अपनी जांच फिर से पूरी करे और न्यायालय को 21 अप्रैल 2025 तक संपूर्ण जानकारी प्रदान करें। इससे पूर्व जनवरी में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की डबल बेंच ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी से व्यक्तिगत शपथ पत्र देकर संपूर्ण जानकारी प्रदान करने हेतु कहा था। साथ ही यस बैंक को इस मामले में पक्षकार बनाकर यस बैंक के अधिवक्ता से यस बैंक में खोले गए अनिमेष सिंह के नाम के खाते से होने वाले समस्त लेनदेन की संपूर्ण जानकारी न्यायालय को बताए जाने की अपेक्षा की गई थी। हाल ही में यस बैंक की अधिवक्ता ने खाते से किए गए लेन-देन के मामले में कुछ जानकारियां न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। जिस पर छत्तीसगढ़ सरकार के महाधिवक्ता ने मामले की पुनः जांच किए जाने हेतु न्यायालय से निवेदन किया। ज्ञातव्य है कि इस संपूर्ण मामले में खुर्सीपार भिलाई नगर थाने में दो अलग अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पहले प्रथम सूचना रिपोर्ट अनिमेष सिंह द्वारा लिखी गई थी। जिसका फिर क्रमांक 20/ 2020 था। इस रिपोर्ट के लिखे जाने के अगले ही दिन रायपुर के बड़े और प्रतिष्ठित सिविल ठेकेदार हितेश चौबे ने अपनी तरफ से काउंटर एफ आई आर दर्ज करा दी थी, जिसका क्रमांक 24/2020 था। प्रथम सूचना रिपोर्ट के तुरंत बाद लीपापोती की कार्यवाही करते हुए अनिमेष सिंह द्वारा दर्ज कराई गई प्रथम सूचना रिपोर्ट को शासन द्वारा खत्म किए जाने हेतु न्यायालय को लिखा गया जबकि हितेश चौबे के द्वारा दर्ज कराई गई एफ आई आर पर अब तक जांच चल रही है। अनिमेष सिंह के द्वारा प्रकरण में विधिवत जमानत ले लिए जाने के बावजूद डीजीपी द्वारा प्रस्तुत किए गए शपथ पत्र में इस बात का उल्लेख नहीं किया गया बल्कि अनिमेष सिंह को भगोड़ा घोषित करते हुए शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया है।
इस संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा 21 अप्रैल 2025 तक राज्य सरकार को पुनः विधिवत जांच कर आवश्यक कार्यवाही किए जाने की रिपोर्ट देने हेतु निर्देशित किया है। अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कहा है कि सीबीआई से जांच के विकल्प खुले हुए हैं। याचिकाकर्ता द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। ऐसे में यदि शासन द्वारा उचित प्रकार से जांच कर कार्यवाही नहीं की गई तो न्यायालय के सामने सीबीआई से जांच और कार्यवाही का विकल्प खुला रहेगा।
याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा ने कहा कि निश्चित रूप से अनिमेष सिंह के नाम से खोले गए खाते में हवाला के माध्यम से पैसे का लेनदेन हुआ है जो न्यायालय द्वारा संज्ञान लिए जाने के बाद अब परत दर परत खुलकर सामने आएगा। यह भी संभावना है कि महादेव सट्टा कांड के लोगों का पैसा भी इस खाते के साथ जुड़ा होगा। राज्य सरकार द्वारा दो माह के भीतर जांच कर कार्यवाही हेतु न्यायालय ने जो अपेक्षा की है उससे समाज के आर्थिक अपराधी तत्वों को यह स्पष्ट संदेश जा रहा है कि अपराधी के किए गए कृत्य का आनंद अपराधी कुछ समय अवश्य उठा सकता है लेकिन अंतत: अपराधियों को उनके कृत्य की अंतिम सजा को भोगना ही पड़ता है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सतीश कुमार त्रिपाठी ने बताया है कि इस मामले में पिछले तीन वर्षों से चल रही अपराधिक रिट याचिका में जिस प्रकार सुनवाई की गई है वह अपने आप में अपराधियों के विरुद्ध एक नजीर है। शासन के पास इस मामले में निष्पक्ष जांच कर सभी नामवार अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे डालने का अवसर मिला है। यदि याचिकाकर्ता शासन की जांच से संतुष्ट रहते हैं तो न्यायालय को इसकी सूचना प्रदान की जाएगी, अन्यथा सीबीआई से जांच किए जाने हेतु न्यायालय के आदेश अनुसार कार्यवाही करने की मांग की जाएगी। याचिकाकर्ता प्रभुनाथ मिश्रा ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता बादशाह प्रसाद सिंह और सतीश त्रिपाठी का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि ऐसे आपराधिक मामलों में पूरी निडरता के साथ न्यायालय के समक्ष दस्तावेजों सहित अपनी बात का प्रस्तुतीकरण करना काबिले तारीफ रहा है। इसलिए अब न्याय की उम्मीद जग गई है। जल्द ही बड़े बड़े आर्थिक अपराधी सलाखों के पीछे होंगे।









