
राजनांदगांव 08 अगस्त 2026। राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के आयोजन के संबंध में जिले के शहरी क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का नगर पालिक निगम राजनांदगांव के टाउन हॉल में तथा शहरी क्षेत्र के निजी एवं शासकीय विद्यालयों के शिक्षकों का कार्यालय मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भवन में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण में बताया गया कि 10 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर जिले में 1 से 19 आयु वर्ग के 3 लाख 72 हजार 405 बच्चों को कृमि नाशक एल्बेंडाजोल टेबलेट के सेवन कराने का लक्ष्य रखा गया है। सभी शिक्षकों को प्रचार-प्रसार सामग्री एवं एल्बेंडाजोल टेबलेट का वितरण किया गया। एलबेन्डाजॉल 400 मिग्रा की दवा 1-2 वर्ष के आयु वर्ग वाले बच्चों को आधी गोली चूरा कर तथा 2-3 आयु वर्ग के बच्चों को 1 गोली चूरा कर तथा 3-19 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को 1 गोली चबाकर साफ पानी के साथ सेवन कराया जाएगा। इस दौरान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने प्रचार-प्रसार रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने जिले के 1 से 19 आयु वर्ग वाले बच्चों के अभिभावकों को स्कूल व आंगनबाड़ी केन्द्रों में कृमि नाशक एल्बेंडाजोल टेबलेट का सेवन कराने की अपील की है। इस अवसर पर जिला नोडल अधिकारी डॉ. बीएल तुलावी सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर 10 अगस्त 2026 को जिले के सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों एवं शासकीय विद्यालयों, शासकीय अनुदान प्राप्त शालाओं, केन्द्रीय विद्यालयों, नवोदय विद्यालयों, मदरसों, निजी स्कूलों, महाविद्यालयों एवं तकनीकी शिक्षा संस्थानों के माध्यम से 1 से 19 वर्ष तक के बालक-बालिकाओं को कृमि नाशक दवा एलबेंडाजॉल 400 मिग्रा का सेवन कराया जाएगा तथा छूटे हुए बच्चों को मॉपअॅप दिवस 17 अगस्त 2026 को कृमि नाशक दवा एलबेंडाजॉल का सेवन कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि कृमि संक्रमण के हानिकारक प्रभाव से खून की कमी एनीमिया, कुपोषण, भूख न लगना, जी मिचलना, उल्टी और दस्त लगना तथा वजन में कमी होती है। एलबेंडाजॉल के सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण का स्तर, एनिमिया की रोकथाम, बौद्धिक विकास, औसत आयु में वृद्धि तथा शाला में उपस्थिति में सुधार होती है एवं समुदाय में कृमि संक्रमण की दर में कमी आती है। कृमि संक्रमण की रोकथाम हेतु खाने के पहले एवं शौच के बाद हाथों को साबून से धोवे, फल एवं सब्जियां धोकर उपयोग करें, नाखून कटे हुए रखें, बच्चों को नंगे पांव न घूमने दें, साथ ही खुले में शौच न करें।
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