Sunday, April 21

जनजातीय प्रकोष्ठ पेसा एक्ट के पालन की सतत मॉनीटरिंग करे : राज्यपाल  पटेल

राज्यपाल ने जनजातीय प्रकोष्ठ की समीक्षा बैठक में दिये निर्देश

भोपाल : गुरूवार, नवम्बर 25, 2022,

राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा पेसा एक्ट के पालन एवं प्रगति की सतत मॉनीटरिंग की जाए। जनजातीय क्षेत्र और लोगों के विकास के लिए बजट का समुचित उपयोग करना सुनिश्चित किया जाए। राज्यपाल श्री पटेल ने जनजातीय प्रकोष्ठ की बैठक में पेसा एक्ट, सिकल सेल एनीमिया निर्मूलन अभियान, विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए दुधारू पशु वितरण, टी.बी. मुक्त मध्यप्रदेश अभियान, क्षमादान, प्रकरण वापसी एवं सनसनीखेज़ अपराध, छात्रवृत्ति एवं छात्र आवास सहायता योजना और जनजाति कार्य विभाग के कार्यों की समीक्षा की।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि पेसा एक्ट प्रदेश के सभी 89 अनुसूचित जनजाति विकासखण्डों में लागू है। इसके प्रावधानों का पूरी तरह पालन कराना सुनिश्चित कराए। ग्राम सभा का समयावधि में गठन हो तथा ग्राम सभा नियमाधीन कार्यवाही करे, इसकी मॉनिटरिंग की जाए। साहूकार किसी भी स्थिति में जनजातियों का शोषण न कर पाएँ। प्रवासी मजदूरों का रिकॉर्ड संधारित किया जाये। केन्द्र सरकार की तरह राज्य सरकार भी प्रवासी मजदूरों की जानकारी रखने के लिए पोर्टल विकसित करे।

राज्यपाल ने कहा कि झाबुआ एवं अलीराजपुर में सिकल सेल एनीमिया के सर्वे के आंकड़ों का क्रॉस वेरीफिकेशन करवा कर सभी पीड़ितों का प्राथमिकता से इलाज कराया जाए। सभी पीड़ितों को समय पर दवाइयाँ एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन की उचित व्यवस्था की जाये। सिकल सेल एनीमिया पीड़ित को दिव्यांग सर्टिफिकेट दिलाने के लिए उचित कार्यवाही की जाए। सिकल सेल एनीमिया का आयुर्वेद एवं होम्योपैथी से इलाज के लिए भी उचित कदम उठाए जाएँ।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिए गए ग्रामों में हर साल नये ग्राम जोड़े जाएँ। साथ ही प्राइवेट विश्वविद्यालयों को भी स्वेच्छा से ग्रामों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाये। सभी योजनाओं के डेटा को पोर्टल पर समय पर अपलोड किया जाये, जिससे समय पर उचित कार्यवाही की जा सके। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि चयनित शिक्षकों की समय पर नियुक्ति कराई जाए।

राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि स्व-सहायता समूहों से अधिकाधिक जनजातीय महिलाओं को जोड़ा जाए। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण एवं उत्पादों के विपणन की उचित व्यवस्था की जाए। जनजाति युवाओं को उनके आस-पास के उद्योग परिसरों की आवश्यकता के आधार पर कौशल प्रशिक्षण दिलाया जाए, जिसमें उन्हें रोजगार एवं स्व-रोजगार के लिए अधिक दूर न जाना पड़े।

अध्यक्ष जनजातीय प्रकोष्ठ श्री दीपक खांडेकर ने प्रकोष्ठ की आगामी प्राथमिकताओं की जानकारी दी। राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री डी.पी. आहूजा, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य सचिव श्री बी.एस. जामोद, विधि विशेषज्ञ श्री भग्गू सिंह रावत, विषय-विशेषज्ञ डॉ. दीपमाला रावत और विधि सलाहकार श्री विक्रांत सिंह कुमरे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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