बेनजीर भुट्टो के पिता जुल्फीकार अली भुट्टो ने दावा किया था कि वो भारत से हजार साल तक लड़ता रहेगा। उसके इस डायलॉग से उसके मन में भारत के प्रति घृणा साफ दिखती है।
हश्र क्या हुआ उसके अपनों ने ही उसे फांसी पर चढ़ा दिया। उसकी बेटी बेनजीर को गोली से उड़ा दिया। बेहद बेरहम और क्रूर हैं पाकिस्तानी। जिसे जब भी सत्ता से उतारा यदि वो देश छोड़कर भागा नहीं तो उसके साथ अति की।
ताजा उदाहरण इमरान खान का है। जिन्हें जेल में डाल दिया गया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार इमरान खान के साथ जेल में यौन शोषण भी किया गया है और बाद में मार भी डाला गया। हालांकि इस खबर की पुष्टि नहीं हो पाई है।
बहरहाल…. यही खास बात है उनमें और हममें। जहां वे बेरहम और क्रूर हैं, वहीं हम रहमदिल और उदार हैं। हमारे पास उनसे अधिक और अच्छे हथियार हैं, हमारे पास उनसे कहीं अधिक हौसला है।
अभिनन्दन का जहाज जब पाकिस्तान में गिर गया था तो भी उनके तेवर कम नहीं हुए थे वे शेर की तरह वहां व्यवहार करते रहे। उस घटना से पूरी दुनिया को हमारे मनोबल का पता चल गया था।
नीच की नम्रता
दुखदाई होती है
सबसे बड़ी बात हमारे पास ईमान है। हमारी बातों में, हमारे कामों में ईमानदारी है। हमारे व्यवहार में, हमारे रिश्तों में सच्चाई है।
हमारी जबान की कीमत है। हम दोस्ती करते हैं तो पाक की तरह पीठ में छूरा नहीं भोंकते और दोस्त को कभी मुसीबत में अकेला नहीं छोड़ते।
न सिर्फ इतना बल्कि दुश्मन भी झुक जाता है तो हम उदारता से उसे सीने से गले लगा लेते हैं। हालांकि ये हमारी गलती होती है क्यांेकि नीच की नम्रता अत्यंत दुखदायी होती है।
नीच इंसान अपना मतलब देखकर पैंतरा बदल लेता है। नीच इंसान नम्रता का दिखावा कर गले लगता और पीठ पर वार कर देता है।
पाकिस्तान हर बार हमारे साथ यही करता रहा है। अभी भी उसने सीज फायर करवाया और फिर बाॅर्डर पर फायरिंग की खबरें आईं। ऐसा वो पिछले सत्तर सालों से लगातार करता आया है।
हम मासूम लोगों को बिना मतलब मारते नहीं। हम उनके जीवित या मृत सैनिकों या नागरिकों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हैं। जबकि वे अपने ही नागरिकों को आड़ बनाकर हमला करने के आदि हैं।
हम ऐसे समय में भी उनकी आड़ बने नागरिकों की सुरक्षा की चिन्ता करते हैं। हमने कभी मासूमों को नहीं सताया । हमने उनके 92 हजार सैनिकों को आत्मसमर्पण का मौका दिया। उनके सम्मान की रक्षा की।
एक भी सैनिक को या नागरिक को कभी सताया नहीं। जबकि उन लोगों ने हमेशा ही हमारे एक भी आदमी को चाहे वो सैनिक हो, किसान हो या मछूआरा हो पकड़ा तो हमें लौटाया नहीं। सिर्फ उसकी विक्षिप्त डेडबाॅडी ही हमें मिल पाई।
अभिनन्दन को बेहद मजबूरी में उन्हें लौटाना पड़ा कि मोदीजी के कोप से उनकी रूह कांप रही थी। उनकी संसद तक में इस बात की चर्चा थी कि यदि अभिनन्दन को नहीं लौटाया तो रात को भारत हमला कर देगा।
हमारी उदारता, ईमानदारी, रहमदिली और नेकी का ही परिणाम है कि हमें कुदरत से सदा विजय और सम्मान मिलता रहा है। निस्संदेह मोदीजी के आने के बाद से देश के इस रवैये और विश्व में सम्मान में वृद्धि हुई है।

जवाहर नागदेव, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, चिन्तक, विश्लेषक
मोबा. 9522170700
‘बिना छेड़छाड़ के लेख का प्रकाशन किया जा सकता है’







