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Pax Silica क्या है, जिसमें अमेरिका के साथ शामिल हुआ भारत? AI सप्लाई चेन से जुड़ा है मामला

नई दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit 2026 का आज आखिरी दिन है. ऐसे में आज लास्ट दिन भारत ने अमेरिका की Pax Silica इनिशिएटिव में शामिल होने का ऐलान ऑफिशियली कर दिया है. यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सप्लाई चेन सुरक्षा को मजबूत करने से जुड़ी है. इस मौके पर अमेरिकी आर्थिक मामलों के अंडर सेक्रेटरी (Under Secretary of State for Economic Affairs) Jacob Helberg, भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी सचिव S Krishnan, केंद्रीय मंत्री Ashwini Vaishnaw और Google CEO Sundar Pichai मौजूद रहे. साथ ही भारत और अमेरिका ने इस दौरान घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर किए. इसे दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग का बड़ा और अहम कदम माना जा रहा है.

Pax Silica क्या है?

दिसंबर 2025 में शुरू किया गया Pax Silica अमेरिका के विदेश विभाग की एक खास पहल है. इसका मकसद AI तकनीक और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है. आसान शब्दों में कहें, तो Pax Silica एक ऐसी पार्टनरशिप है, जिसमें दोस्त और भरोसेमंद देश मिलकर यह सुनिश्चित करते हैं कि AI और जरूरी टेक्नोलॉजी सुरक्षित, विश्वसनीय और मजबूत सप्लाई चेन के साथ डेवलप हो.

इस नाम में Pax का मतलब है, शांति और Silica सिलिकॉन जो चिप्स और सेमीकंडक्टर बनाने में काम आता है. यानी यह पहल एक स्टेबल, को-ऑपरेटिव और सिक्योर टेक्नोलॉजी सिस्टम बनाने की दिशा में काम करती है.

इस अलायंस का टारगेट है मिनरल एक्सट्रैक्शन से लेकर एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स तक पूरी AI टेक्नोलॉजी चेन को सुरक्षित करना, ताकि किसी एक देश पर एक्सेसिव डिपेंडेंसी कम हो और आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो. वहीं, जैकब हेलबर्ग ने कहा कि Pax Silica यह घोषणा है, कि भविष्य उनका होता है जो खुद निर्माण करते हैं. जब स्वतंत्र देश मिलकर काम करते हैं, तो वे भविष्य का इंतजार नहीं करते, बल्कि खुद उसे बनाते हैं.

किन देशों ने किया समर्थन?

इस घोषणा-पत्र पर ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, यूएई और यूनाइटेड किंगडम जैसे कई देशों ने हस्ताक्षर किए हैं. कुछ अन्य देश और संस्थाएं भी इसमें सहयोग कर रहे हैं. अमेरिका ने कहा कि सभी देश मिलकर तकनीकी प्रगति, आर्थिक सुरक्षा और साझा समृद्धि के लिए काम करेंगे.

भारत के लिए Pax Silica क्यों जरूरी है?

अगर भारत इस अमेरिकी नेतृत्व वाले समूह में सक्रिय रूप से शामिल होता है, तो इसका सीधा मतलब यह होगा कि वह आने वाले समय में AI और एडवांस कंप्यूटिंग से जुड़ी ग्लोबल सप्लाई चेन तय करने में अहम भूमिका निभाएगा. यानी चिप बनाने से लेकर जरूरी टेक्नोलॉजी तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया में भारत की भागीदारी बढ़ेगी.

इससे जरूरी मिनरल्स की सुरक्षा और टेक्नोलॉजी निर्माण में भी भारत की स्थिति मजबूत होगी. आसान शब्दों में कहें, तो भारत सिर्फ टेक्नोलॉजी इस्तेमाल करने वाला देश नहीं रहेगा, बल्कि उसे बनाने और उसकी दिशा तय करने वाला देश बन सकता है.

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सचिव एस. कृष्णन ने भी कहा था, कि भारत के लिए ऐसे इंटरनेशनल ग्रुप्स का हिस्सा बनना जरूरी है, जो जरूरी मिनरल्स और टेक्नोलॉजी सुरक्षा पर ध्यान देते हैं. इससे भारत की आर्थिक और तकनीकी ताकत दोनों मजबूत होगी.

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