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शिवाजी महाराज की जयंती : जब 1666 में औरंगाबाद यात्रा के दौरान उमड़ा था जनसैलाब

Shivaji Maharaj : महाराष्ट्र का छत्रपति संभाजीनगर (पूर्व में औरंगाबाद) वैसे तो तत्कालीन हिंदवी स्वराज का हिस्सा नहीं था लेकिन इतिहास में इस स्थान का खास महत्व है. यह वही स्थान है जब छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक से आठ साल पहले अप्रैल 1666 में आगरा की यात्रा के दौरान उनके स्वागत में विशाल जलसैलाब उमड़ पड़ा था. मुगल प्रांत दक्कन की तत्कालीन राजधानी में उनके आगमन पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी जो मराठा योद्धा राजा के बढ़ते कद को दर्शाती थी. गुरुवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती मनाई जा रही है.

औरंगाबाद का नाम पूर्व मुगल शासक औरंगजेब के नाम पर रखा गया था. मुगल प्रशासन के एक अधिकारी भीमसेन सक्सेना ने अपने फारसी संस्मरण ‘तारीख-ए-दिलकुश’ में छत्रपति शिवाजी महाराज की औरंगाबाद यात्रा के बारे में लिखा था. इस पुस्तक का बाद में इतिहासकार जदुनाथ सरकार ने अंग्रेजी में अनुवाद किया. इस संस्मरण में शिवाजी महाराज के घुड़सवारों के दल और उनके प्रति जनता के उत्साह का वर्णन किया गया है. यह यात्रा मुगल सूबेदार मिर्जा राजा जयसिंह के साथ हुई पुरंदर की संधि के बाद हुई, जिसके बाद शिवाजी महाराज को आगरा में औरंगजेब से मिलने जाना था.

काफिले में स्वर्ण जड़ित नारंगी और सिंदूरी झंडा शामिल

अप्रैल 1666 में संभाजीनगर में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने 500 सुसज्जित और सशस्त्र सैनिकों के साथ यात्रा की, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी. आगरा में स्थित आमेर राज्य (वर्तमान जयपुर) के एक अधिकारी परकालदास द्वारा 29 मई, 1666 को एक अन्य अधिकारी को भेजे गए पत्र में भी उल्लेख किया गया है कि शिवाजी महाराज के साथ 200 से 250 लोग थे जिनमें 100 घुड़सवार शामिल थे. उनके काफिले में सोने और चांदी से मढ़ी एक पालकी, हौदा (हाथी की पीठ पर बना आसन) वाले दो हाथी, सामान ले जाने वाले कुछ ऊंट और स्वर्ण जड़ित उनका विशिष्ट नारंगी और सिंदूरी झंडा शामिल था.

परकलदास ने शिवाजी महाराज को प्रभावशाली बताया

परकलदास ने शिवाजी महाराज को दुबला-पतला, गोरे रंग का और प्रभावशाली बताया, साथ ही उनके नौ वर्षीय पुत्र संभाजी महाराज की उपस्थिति का भी उल्लेख किया. परकलदास ने पत्र में लिखा कि बिना यह जाने कि वह कौन है, सहज रूप से यह महसूस होता है कि वह जनता के शासक है. यह पत्र सरकार द्वारा लिखित ‘राजस्थानी रिकॉर्ड’ का हिस्सा है और जिसमें मराठा योद्धा की आगरा की प्रसिद्ध यात्रा का वर्णन है.

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