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कौन सी 3 खास चीज देकर पीएम मोदी ने व्लादिमीर पुतिन को किया रवाना

दो दिन की यात्रा समाप्त करके रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार शाम दिल्ली से रवाना हुए. इस दौरान पीएम मोदी ने पुतिन को असम की काली चाय, कश्मीरी केसर और भगवद गीता उपहार में दिए.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को उपहार स्वरूप असम की स्वादिष्ट काली चाय, कश्मीरी केसर, हस्तनिर्मित घोड़े की चांदी की प्रतिकृति, एक सजावटी टी सेट और भगवद गीता का एक रूसी संस्करण भेंट किया. श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत युद्ध के दौरान भगवान कृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्तव्य, शाश्वत आत्मा और आध्यात्मिक मुक्ति के बारे में मार्गदर्शन प्रस्तुत करती है. अधिकारियों ने बताया कि इसका कालातीत ज्ञान नैतिक जीवन, मन पर नियंत्रण और आंतरिक शांति के लिए प्रेरणा देता है और अनुवादों के माध्यम से यह दुनिया भर के आधुनिक पाठकों के लिए सुलभ हो गया है.

असम की काली चाय अपने अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध

ब्रह्मपुत्र के उपजाऊ मैदानों में उगाई जाने वाली असम की काली चाय अपने अनोखे स्वाद और ‘असमिका’ किस्म के पारंपरिक प्रसंस्करण के लिए प्रसिद्ध है. इस चाय को वर्ष 2007 में भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिला था. यह चाय अपनी सांस्कृतिक विरासत के अलावा, इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जानी जाती है. न्यूज एजेंसी पीटीआई को अधिकारियों ने बताया कि जटिल नक्काशी से निर्मित, अलंकृत मुर्शिदाबाद सिल्वर टी सेट, पश्चिम बंगाल की समृद्ध कलात्मकता और भारत एवं रूस दोनों में चाय के गहरे सांस्कृतिक महत्व को दर्शाता है. उन्होंने बताया कि यह सेट भारत-रूस की स्थायी मित्रता और चाय की शाश्वत परंपरा का प्रतीक है.

महाराष्ट्र से हस्तनिर्मित चांदी के घोड़े की प्रतिकृति, बारीक नक्काशी से सुसज्जित, भारत की धातु शिल्प परंपराओं की उत्कृष्टता को दर्शाती है. अधिकारियों ने कहा कि भारतीय और रूसी संस्कृतियों में सम्मान और वीरता का जो उत्सव मनाया जाता है, यह उसका प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह हमारी साझा विरासत और पारस्परिक सम्मान को दर्शाता है. हस्तनिर्मित घोड़े का संतुलित और आगे बढ़ता हुआ रुख, स्थायी और निरंतर आगे बढ़ती भारत-रूस साझेदारी का प्रतीक है. आगरा से हस्तनिर्मित संगमरमर शतरंज सेट उत्कृष्ट शिल्प कौशल का प्रतीक है, जो ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ओडीओपी) पहल के तहत क्षेत्र की पत्थर जड़ाई विरासत को रेखांकित करता है.

कश्मीरी केसर होता है खास

कश्मीरी केसर को स्थानीय रूप से कोंग या जाफरान के नाम से जाना जाता है और यह कश्मीर के ऊंचे इलाकों में उगाया जाता है. यह अपने समृद्ध रंग, सुगंध और स्वाद के लिए बेशकीमती है तथा इसका गहरा सांस्कृतिक और पाक महत्व है.

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