
पर्यटन, आजीविका, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं के विकास पर दिया जोर; ग्रामीणों से सीधे संवाद कर सुनी समस्याएं
धमतरी, 26 अगस्त 2026/ कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री जयंत नाहटा ने जिले के दूरस्थ एवं ग्रामीण अंचलों का सघन भ्रमण कर विकास कार्यों, पर्यटन स्थलों, आजीविका गतिविधियों, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का जायजा लिया। लगभग एक दर्जन गांवों के भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों एवं हितग्राहियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं, आवश्यकताएं और सुझाव सुने तथा संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निराकरण के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने सर्वप्रथम कुकरेल पहुंचकर मछली पालन गतिविधियों का निरीक्षण किया। उन्होंने मत्स्य पालन से जुड़े हितग्राहियों से चर्चा कर उत्पादन, आय, बाजार व्यवस्था और गतिविधियों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मछली पालन से जुड़े हितग्राहियों को तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो सके।
इसके बाद मॉडमसिल्ली में जल संसाधन विभाग द्वारा पर्यटकों की सुविधा के लिए विकसित किए जा रहे गार्डन का निरीक्षण किया। उन्होंने गार्डन के बेहतर रखरखाव, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और पर्यटकों के लिए आवश्यक अन्य सुविधाओं के संबंध में संबंधित समिति से चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थलों पर नियमित साफ-सफाई, सुरक्षा और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को ध्यान में रखते हुए पर्यटन सुविधाओं का विकास इस तरह किया जाए, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर सृजित हों।
उरपुटी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत निर्मित आवासों का निरीक्षण कर कलेक्टर ने हितग्राहियों से योजना के लाभ एवं आवास निर्माण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि आवास निर्माण से संबंधित शेष कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए तथा पात्र परिवारों को बिजली, पानी, सड़क, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं से भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से कमजोर एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों तक शासन की योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से पहुंचना चाहिए।
भोथापारा में वीबीआरएमजी के तहत निर्मित आजीविका डबरी का अवलोकन किया गया। इस डबरी में 17 हितग्राहियों द्वारा मछली पालन किया जा रहा है। डबरी में रोहू, कतला एवं झींगा आदि मछलियों के बीज डाले गए हैं। कलेक्टर ने हितग्राहियों से चर्चा कर मछली पालन से होने वाली आय, उत्पादन और विपणन व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि हितग्राहियों को नियमित तकनीकी मार्गदर्शन, मत्स्य आहार, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था की जाए, ताकि यह गतिविधि स्थायी एवं लाभदायक आजीविका का माध्यम बन सके।
हरफर में पर्यटन विकास की संभावनाओं का जायजा लेते हुए कलेक्टर ने पाथ-वे, पर्यटकों के बैठने के स्थान तथा कॉटेज निर्माण सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं के संबंध में चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि पर्यटन स्थल का विकास चरणबद्ध एवं समग्र योजना के तहत किया जाए। पाथ-वे का निर्माण गुणवत्तापूर्ण हो, पर्यटकों के लिए पर्याप्त बैठने की व्यवस्था हो तथा कॉटेज निर्माण में स्थानीय वास्तुकला और पर्यावरण का ध्यान रखा जाए। उन्होंने प्राकृतिक स्थलों के विकास के साथ स्वच्छता, सौंदर्यीकरण, सुरक्षित आवागमन, प्रकाश व्यवस्था और पर्यटकों की सुविधा को प्राथमिकता देने कहा।
अरौद में पंचायत भवन पहुंचकर PACS समिति के सदस्यों के साथ चर्चा की तथा किसानों और ग्रामीणों से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि किसानों को समय पर खाद, बीज, ऋण, फसल बीमा और अन्य कृषि सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। वहीं मोगरागहन में मछुआरा समिति के सदस्यों से संवाद कर मत्स्य व्यवसाय से संबंधित समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिलाने, समितियों को सक्रिय बनाने तथा आजीविका गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
कोड़ेगांव बी (सटियारा) एवं तिर्रा में मछुआरा समितियों की बैठक लेकर कलेक्टर ने मछुआरों की समस्याओं, मांगों एवं उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिए कि मछुआरा समितियों को आवश्यक प्रशिक्षण, उपकरण, मत्स्य बीज और विभागीय योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। तिर्रा क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों और प्राकृतिक विशेषताओं के अनुरूप योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएं तथा स्थानीय युवाओं और स्व-सहायता समूहों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जाए।
अकलाडोंगरी में छात्रावास एवं नव-निर्मित 6 बिस्तर अस्पताल का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने विद्यार्थियों को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा ग्रामीणों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावास में भोजन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा और अध्ययन की सुविधाओं की नियमित निगरानी करने कहा। अस्पताल के निरीक्षण के दौरान उन्होंने आवश्यक दवाइयों की उपलब्धता, चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति, साफ-सफाई, जांच सुविधाओं और मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।
माटेगहन में आजीविका डबरी का निरीक्षण कर ग्रामीण आजीविका संवर्धन की गतिविधियों की जानकारी ली गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि डबरी का नियमित रखरखाव किया जाए और अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों को मत्स्य पालन एवं अन्य संबद्ध गतिविधियों से जोड़ा जाए। वहीं चिखली में पर्यटन स्थल का निरीक्षण कर क्षेत्र के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की संभावनाओं पर चर्चा की गई। उन्होंने स्थल पर स्वच्छता, हरित क्षेत्र, बैठने की व्यवस्था, सूचना संकेतक और सुरक्षित आवागमन की सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय संसाधनों को आजीविका से जोड़ना, पर्यटन को बढ़ावा देना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी विकास कार्यों एवं योजनाओं का नियमित मैदानी निरीक्षण किया जाए। कार्यों की गुणवत्ता, समयसीमा, उपयोगिता और स्थायित्व पर विशेष ध्यान दिया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारी तय की जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रत्येक विभाग अपने-अपने क्षेत्र में चल रहे कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करे और लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराए। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनाए रखते हुए हितग्राहियों की सूची, स्वीकृत कार्यों और प्रगति की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों का मौके पर परीक्षण कर यथासंभव तत्काल समाधान किया जाए तथा जिन मामलों में समय लगे, उनमें स्पष्ट समयसीमा निर्धारित कर संबंधित आवेदक को जानकारी दी जाए।
कलेक्टर ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य योजनाओं और विकास कार्यों का लाभ अंतिम छोर पर बसे व्यक्ति तक पहुंचाना है। ग्रामीणों से सीधे संवाद के माध्यम से उनकी वास्तविक आवश्यकताओं को समझकर प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता, तत्परता और जवाबदेही के साथ जनसमस्याओं के निराकरण तथा शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि मैदानी अधिकारी नियमित रूप से गांवों का भ्रमण करें, ग्रामीणों से संवाद स्थापित करें और योजनाओं के लाभ से वंचित पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें शीघ्र लाभान्वित करें।
भ्रमण के दौरान संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।









